फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   fathers day

बहनें बोलीं : हमारी पढ़ाई के लिए पापा ने छोड़ दी नौकरी

Sun, 20 Jun 2021 05:29 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 20 Jun 2021 05:29 PM IST
विज्ञापन
fathers day
भाई बहनों की ग्रुप फोटो। - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। आर्मी में एक साल के अंदर सेलेक्शन होने पर लिम्का बुक में नाम दर्ज कराने वाली शहर की अमर बिहार कॉलोनी निवासी तीन बहनें राखी, रोली और रुचि चौहान बताती हैं कि आर्मी में कैप्टन बनने का सौभाग्य उन्हें पिता मंजू सिंह चौहान की मेहनत की बदौलत मिला।
विज्ञापन

फादर्स डे पर उन्होंने चंडीगढ़ और दिल्ली से अपने पिता को शुभकामनाएं भेजी हैं। वहीं, मंजू सिंह चौहान के चेहरे पर पॉसिंग आउट परेड के दौरान पिता को पैंट में आने की बात का जिक्र करते हुए मुस्कान छा जाती है।
विज्ञापन

बड़ी पुत्री राखी बतातीं हैं कि हम लोगों का भविष्य बनाने के लिए पिता ने बैंक की नौकरी से रिटायरमेंट लेकर हम लोगों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया। वह पढ़ाई के दौरान काफी सख्त रहते थे। स्कूल में क्या पढ़ा और अगले दिन क्या पढ़ाया जाएगा। जब तक पढ़ा हुआ सुन नहीं लेते तब तक बैठने तक नहीं देते थे। वह बताती हैं कि पढ़ाई के दौरान उनकी सख्ती से ही तीनों बहनों का एक साथ आर्मी में चयन हुआ, जो लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज है।
विज्ञापन
विज्ञापन

वहीं, मंजू सिंह चौहान बताते हैं कि बेटा ब्रिगेडियर बनने वाला है, जबकि बेटियों ने कैप्टन होने के बाद रिजाइन कर दूसरे सेक्टरों में ज्वाइनिंग ले ली। मंजू सिंह चौहान बताते हैं कि पॉसिंग आउट परेड में शामिल होने के लिए छोटी बेटी ने पायजामा में न आने को कहा, लेकिन बड़ी बेटी राखी ने कहा कि ‘पायजामा में हो या पैंट में आखिर पापा तो पापा हैं’। आर्मी में कर्नल मृदुल कुमार एवं राखी, रोली व रूचि बताती हैं कि आज वह जिस मुकाम पर हैं वह पिता जी की देन है।
-
पिता के वह शब्द : शहर में जो पढ़ता है वह अच्छा आदमी बनता है
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया कहते हैं गरीबी का कभी साया नहीं पढ़ने दिया पिता ने
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। फादर्स डे पर पिता जी को याद करते हुए जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. आरएस मधौरिया बताते हैं कि बेहद गरीबी के बाद भी पिता जी ने उन दोनो भाइयों को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पिताजी का ख्वाब था कि मैं एक अच्छा आदमी बनूं, इसलिए उन्होंने पांचवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद पांच किलोमीटर दूर कस्बा जसवंत नगर के स्कूल में कक्षा छह में दाखिला कराया। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण हम दोनो भाई पैदल ही स्कूल आते जाते थे। इस बीच पिताजी बीमार हो गए, पैसों के अभाव में उनका इलाज न करा सका, जिससे उनकी मौत हो गई। पिताजी की मौत से टूट गया।

मगर, मां अच्छा आदमी बनकर पिताजी का सपना पूरा करने के लिए निरंतर प्रेरित करती रहीं, जिससे हिम्मत बढ़ती रही। इंटर के बाद इटावा से बीएसएसी की। इसके लिए रोजाना साइकिल से 48 किलोमीटर आते जाते थे। आर्थिक तंगी के कारण पैसों के लिए काम भी करने के साथ पढ़ाई भी करते रहे। मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में सेलेक्शन होकर डॉक्टर बन गया। पिता जी के शब्द ‘जो शहर में पढ़ता है वह अच्छा आदमी बनता है’, आज भी कानों में गूंजा करते हैं। संवाद

मंजू सिंह चौहान। संवाद

मंजू सिंह चौहान। संवाद- फोटो : LAKHIMPUR

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed