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Lakhimpur Kheri News: गन्ना की फसल सूखने से किसान परेशान, बचाव की मांग

Sat, 31 Aug 2024 12:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 31 Aug 2024 12:48 AM IST
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Farmers worried due to drying of sugarcane crop, demand for rescue
सूख रही गन्ने की फसल को देखता किसान।संवाद
संसारपुर। क्षेत्र के बांकेगंज ब्लाॅक की ग्राम पंचायत भरिगवां में गन्ने की पत्तियां पीली होने और फसल के सूखने से किसान परेशान हैं। फसल पककर तैयार होने को है, ऐसे में कीटनाशक डालने से शेष बची फसल भी खराब होने की आशंका है। वहीं गन्ने के खेतों में बाघों के छिपने से भी किसान खेत नहीं जा पा रहे हैं।
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किसानों ने बताया कि गन्ना 6 से 7 फीट ऊंचा हो चुका है। इस समय कोई दवा छिड़काव करने में भी फसल के खराब होने का खतरा है। वहीं अब तक जितनी भी कीटनाशक दवाइयां गन्ने में डाली, उनका भी कोई असर नहीं दिख रहा है। दूसरी समस्या बाघों के खेतों में छिपने की है। फसल ऊंची होने के कारण बाघ आसानी से गन्ने के खेतों में छिपे रहते हैं। इससे किसान गन्ने के खेतों में जाने से डर रहे हैं। नौवाखेड़ा के किसान जितेंद्र पटेल ने बताया कि चार एकड़ गन्ने की फसल पीली पड़ने के बाद सूख गई है। क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत गन्ना किसानों की फसल पीली हो गई है। पकरिया गांव के मोनू वर्मा ने बताया कि उनका डेढ़ एकड़ गन्ना बिल्कुल पीला हो गया है। फसल की बढ़त रुक गई है। काफी नुकसान हो रहा है। गोला गन्ना समिति के पूर्व डायरेक्टर बादाम सिंह यादव ने बताया कि उनकी पांच एकड़ गन्ने की पेड़ी में तीन एकड़ फसल बिल्कुल पीली पड़ गई है। अब बाकी फसल खराब होने की चिंता सताने लगी है।
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बिल्ट, पोक्का बोइंग, रूट बोरर से खराब होती है फसल
गन्ना शोध व बीज संवर्धन केंद्र जमुनाबाद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाॅ. एके तिवारी ने बताया कि पत्ती पीली पड़ने के कई कारण हो सकते हैं। फफूंद जनित बिल्ट बीमारी, पोक्का बोइंग, रूट बोरर, इंटरनोड बोरर, व्हाइट ग्रब, रेड राट और टॉप बोरर के प्रकोप से गन्ना की फसल को नुकसान होता है।
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बचाव के उपायों पर अमल करें किसान
वरिष्ठ वैज्ञानिक एके तिवारी ने बताया कि कार्बेन्डाजिम 50 डब्लयूपी का दो ग्राम प्रति लीटर घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर दो बार गन्ने की जड़ों के पास ड्रिंचिंग करें। सात दिन बाद ट्राइकोडर्मा काे चार किलो प्रति एकड़ की दर से गोबर की खाद में मिलाकर जड़ों के पास डालकर हल्का पानी दें। क्लोरोपाईरिफास, सायपर और मीथेन का घोल बनाकर दो बार ड्रिंचिंग करें।
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