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सब्जियों के दामों में लगातार गिरने से किसान बेहाल 

Wed, 07 Dec 2016 10:08 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Wed, 07 Dec 2016 10:08 PM IST
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Farmers suffering from a steady fall in the prices of vegetables
सब्जी - फोटो : अमर उजाला
फूलगोभी, पालक, सोया, मेथी, धनिया की नहीं मिल रही लागत
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आलू, प्याज के थोक मूल्यों में आई भारी गिरावट

एक पखवाड़े से सब्जियों के दामों में लगातार गिरावट आई है, जिसमें सबसे ज्यादा हरी सब्जियों के दाम कम हुए हैं। फूलगोभी, पालक, सोया, मेथी और धनिया के दाम इस कदर गिरे हैं कि किसानों को उनकी लागत मिलना तो दूर भाड़ा भी नहीं वसूल हो पा रहा है। मंडी के जानकारों का मानना है कि ठंड के सीजन में खासकर दिसंबर, जनवरी में ताजी सब्जियों की आवक एकाएक बढ़ने से रेट कम हो जाते हैं। तो कुछ व्यापारी इसे नोटबंदी के असर से जोड़कर देख रहे हैं। जबकि इस मौसम में ग्रामीण इलाकों में भी सब्जी का अच्छा उत्पादन हो रहा है, जिससे देहात से आने वाले फुटकर व्यापारियों की संख्या काफी कम हुई है। 
राजापुर मंडी में एक महीने पहले तक थोक में 20 रुपये प्रति किग्रा बिकने वाला टमाटर बुधवार को 10 रुपये प्रति किग्रा बिका। आलू की नई फसल आने से रेट काफी कम हुए हैं। 20 रुपये किग्रा बिकने वाले पुराने आलू के खरीदार नहीं मिल रहे हैं और नया आलू पांच से छह रुपये प्रति किग्रा बिक रहा है। इसी तरह मूली दो रुपये गड्डी बिक रही है। सोया और पालक उत्पादक किसानों को तगड़ा झटका लगा है, क्योंकि मंडी में सोया और पालक दो-दो रुपये किग्रा बिक रही है। धनिया भी पांच से आठ रुपये प्रति किग्रा बिक रही है। फूलगोभी की आवक बढ़ने से कई दिनों से माल मंडी में पड़ा है। तीन रुपये प्रति पीस के हिसाब से गोभी बिक रही है तो बैगन पांच से सात रुपये, मटर 30 से 35 रुपये, भिंडी 10 रुपये, चुकंदर 15 रुपये, प्याज आठ रुपये, गाजर छह रुपये और अदरक 18 रुपये प्रति किग्रा की दर से बिक रही है।
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क्या कहते हैं आढ़ती
मंडी में करेंसी की कोई किल्लत नहीं है। सामान्य तौर से व्यापार चल रहा है, लेकिन यहां कुछ अव्यवस्थाओं से खासकर किसानों को जूझना पड़ रहा है। इस मौसम में सब्जियों की आवक ज्यादा रहने से रेट में कमी आई है। 
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-विनोद गुप्ता, सब्जी आढ़ती
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गोभी उत्पादक किसानों को उनकी लागत नहीं मिल पा रही है। नोटबंदी के बाद कुछ समय तक नकदी की समस्या से जूझना पड़ा, लेकिन अब गांवों से लोग खरीदारी के लिए मंडी कम आ रहे हैं। 

-फरीद अहमद, आढ़ती
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सब्जियों के रेट काफी कम होने से लागत नहीं मिल पा रही है। गांवों से आने वाले पैकार (फुटकर कारोबारी) मंडी नहीं आ रहे हैैं। 
-खालिद उमर, आढ़ती
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क्या कहते हैं किसान
मंडी में मूली का रेट कम हो गया है, जिससे आमदनी में कमी आई है। पनगी कला से रोज सब्जी लेकर मंडी आने में भाड़ा खर्च होता है। 
-विनोद निषाद, किसान
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फूलगोभी का कोई रेट नहीं मिल रहा है। सीजन की शुरुआत में 80 रुपये किग्रा बिकने वाली गोभी बुधवार को दो रुपये किग्रा से भी कम दाम पर बिकी। इससे आमदनी तो दूर भाड़ा भी नहीं निकल रहा है। 
-सूरज कुमार, किसान
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दो बीघा सोया बुवाई की थी, लेकिन इसका खरीदार नहीं मिल रहा है। दो रुपये किग्रा में भी खरीददार नहीं मिल रहे हैं। 
-जहीर, किसान
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