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किसानों को नोटिस जारी करने पर रोक
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 01 May 2015 06:57 PM IST
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बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान और किसानों की दयनीय स्थिति को देखते हुए शासन ने उनको कर्ज अदायगी में राहत दी है। शासन ने बैंकों, सहकारी समितियों तथा अन्य संस्थाओं को निर्देश जारी कर किसानों को नोटिस जारी करने या अन्य तरीके से की जाने वाली उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इस बाबत संस्थागत वित्त सचिव राहुल भटनागर ने सहकारिता विभाग को पत्र भेजकर शासन के निर्देशों से अवगत कराया है। वहीं निबंधक सहकारिता आयुक्त ने भी वर्ष 2014-15 में रबी की फसल के लिए ली गई अल्पकालीन ऋण (छह माह) को मध्यकालीन ऋण (तीन वर्ष) में परिवर्तित करने का निर्देश दिया है। इस श्रेणी में उन किसानों को राहत मिलेगी, जिनकी फसल को बारिश और ओलावृष्टि से 50 फीसदी या उससे ज्यादा का नुकसान हुआ है।
सहकारिता विभाग ने शासन के इस निर्देश से जिले भर की सहकारी समितियों को अवगत करा दिया है। उनके मुताबिक जिले भर में 125 सहकारी समितियां हैं। इन समितियों के 52 हजार बकाएदार हैं। रबी और खरीफ की फसलों के लिए इन किसानों ने समितियों से करीब 95 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। निर्धारित समय में इन किसानों से ऋण न अदा होने पर वसूली के लिए प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस बार ओलावृष्टि और किसानों की स्थिति को देखते हुए शासन ने निर्देश दिया है कि अगर स्वेच्छा से किसान बकाया जमा कर रहा है तो ठीक है, अन्यथा उन पर दबाव न डाला जाए।
खीरी जिले में मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल को देखकर सदमे से नौ किसानों की मौत हुई है। हालांकि प्रशासन ने अब तक फसल बर्बादी से किसी भी किसान की मौत से इनकार किया है।
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रबी फसल की ऋण वसूली का है समय
सहकारिता विभाग में ऋण वितरण और वसूली के लिए समय निर्धारित होता है। एक अप्रैल से लेकर 30 सितंबर तक खरीफ की फसलों के लिए ऋण वितरण किया जाता है। इसी तरह एक अक्तूबर से लेकर 31 मार्च तक खरीफ फसलों पर दिए गए ऋण की वसूली और रबी की फसल पर ऋण का वितरण शुरू किया जाता है। एक अप्रैल से लेकर 30 जून तक रबी की फसल के लिए दिए गए ऋण की वसूली शुरू हो जाती है।
सहायक निबंधक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। शासन ने इसे देखते हुए समितियों, बैंकों आदि संस्थाओं द्वारा किसानों को नोटिस जारी करने या अन्य तरह से उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। इस बाबत सभी समिति प्रभारियों को पत्र भेजकर अवगत भी कराया गया है।
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सहकारिता विभाग ने शासन के इस निर्देश से जिले भर की सहकारी समितियों को अवगत करा दिया है। उनके मुताबिक जिले भर में 125 सहकारी समितियां हैं। इन समितियों के 52 हजार बकाएदार हैं। रबी और खरीफ की फसलों के लिए इन किसानों ने समितियों से करीब 95 करोड़ रुपये का ऋण लिया है। निर्धारित समय में इन किसानों से ऋण न अदा होने पर वसूली के लिए प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाती है, लेकिन इस बार ओलावृष्टि और किसानों की स्थिति को देखते हुए शासन ने निर्देश दिया है कि अगर स्वेच्छा से किसान बकाया जमा कर रहा है तो ठीक है, अन्यथा उन पर दबाव न डाला जाए।
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खीरी जिले में मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल को देखकर सदमे से नौ किसानों की मौत हुई है। हालांकि प्रशासन ने अब तक फसल बर्बादी से किसी भी किसान की मौत से इनकार किया है।
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रबी फसल की ऋण वसूली का है समय
सहकारिता विभाग में ऋण वितरण और वसूली के लिए समय निर्धारित होता है। एक अप्रैल से लेकर 30 सितंबर तक खरीफ की फसलों के लिए ऋण वितरण किया जाता है। इसी तरह एक अक्तूबर से लेकर 31 मार्च तक खरीफ फसलों पर दिए गए ऋण की वसूली और रबी की फसल पर ऋण का वितरण शुरू किया जाता है। एक अप्रैल से लेकर 30 जून तक रबी की फसल के लिए दिए गए ऋण की वसूली शुरू हो जाती है।
सहायक निबंधक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि बारिश और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। शासन ने इसे देखते हुए समितियों, बैंकों आदि संस्थाओं द्वारा किसानों को नोटिस जारी करने या अन्य तरह से उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। इस बाबत सभी समिति प्रभारियों को पत्र भेजकर अवगत भी कराया गया है।