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किसानों को नहीं मिल रहीं पर्ची, तोल में भी देरी
अमर उजाला ब्यूरो हैरमखेड़ा।
Updated Wed, 07 Dec 2016 10:07 PM IST
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पेड़ी के खेत खाली न होने से पिछड़ रही गेहूं की बुआई
डीएससीएल ग्रुप की अजवापुर चीनी मिल के किसानों को दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। एक तो किसानों को गन्ने की पर्चियां समय से नहीं मिल रही हैं, तो कांटे पर तोल में हो रही देरी परेशानी का सबब बन गई है।
गांवों से मिल गेट पर गन्ना तोल कराने के लिए जाने वाले किसानों को दो से तीन दिन तक लाइन में कड़ाके की ठंड से ठिठुरना पड़ रहा है। बताते चलें कि इस बार पेराई सत्र की शुरुआत में ही अजवापुर मिल के ब्वायलर में खराबी आ गई थी, जिससे कुछ दिनों तक एक चौथाई क्षमता से गन्ने की पेराई हो सकी थी। लिहाजा कुछ दिनों तक मिल ने पर्चियों को जारी करने से रोक दिया था। किसानों की माने तो लघु एवं सीमांत किसानों की पर्चियां जारी करने में कोताही बरती जा रही है। पेराई सत्र प्रारंभ हुए करीब एक माह बीतने को है, लेकिन किसानों को एक के बाद दूसरी पर्ची नहीं मिली है। किसान औने पौने दामों पर क्रेशर पर गन्ना बेचने को मजबूर है। वहीं अधिकतर किसान पेड़ी की सप्लाई न होने के कारण गेहूं बुवाई भी नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ गन्ना माफिया दूसरे क्षेत्र से औने-पौने दामों में गन्ना खरीदकर मिल में सप्लाई कर रहे हैं।
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डीएससीएल ग्रुप की अजवापुर चीनी मिल के किसानों को दोहरी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। एक तो किसानों को गन्ने की पर्चियां समय से नहीं मिल रही हैं, तो कांटे पर तोल में हो रही देरी परेशानी का सबब बन गई है।
गांवों से मिल गेट पर गन्ना तोल कराने के लिए जाने वाले किसानों को दो से तीन दिन तक लाइन में कड़ाके की ठंड से ठिठुरना पड़ रहा है। बताते चलें कि इस बार पेराई सत्र की शुरुआत में ही अजवापुर मिल के ब्वायलर में खराबी आ गई थी, जिससे कुछ दिनों तक एक चौथाई क्षमता से गन्ने की पेराई हो सकी थी। लिहाजा कुछ दिनों तक मिल ने पर्चियों को जारी करने से रोक दिया था। किसानों की माने तो लघु एवं सीमांत किसानों की पर्चियां जारी करने में कोताही बरती जा रही है। पेराई सत्र प्रारंभ हुए करीब एक माह बीतने को है, लेकिन किसानों को एक के बाद दूसरी पर्ची नहीं मिली है। किसान औने पौने दामों पर क्रेशर पर गन्ना बेचने को मजबूर है। वहीं अधिकतर किसान पेड़ी की सप्लाई न होने के कारण गेहूं बुवाई भी नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ गन्ना माफिया दूसरे क्षेत्र से औने-पौने दामों में गन्ना खरीदकर मिल में सप्लाई कर रहे हैं।
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