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Lakhimpur Kheri News: साठा धान पर प्रतिबंध से किसान आक्रोशित
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कलेक्ट्रेट परिसर में धरना देते किसान। संवाद
लखीमपुर खीरी। साठा धान की बोआई पर पूरे जिले में प्रशासन ने प्रतिबंध लगा दिया है। इसको लेकर जिले के किसान भड़क गए। सोमवार को बड़ी संख्या में किसान संगठन के लोग कलक्ट्रेट पहुंच गए और धरने पर बैठ गए।
भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के अध्यक्ष दिलबाग सिंह, भाकियू (चढूनी) के अध्यक्ष बलकार सिंह, भाकियू (अराजनैतिक) कुलवंत सिंह व भाकियू के अमनदीप सिंह संधू की अगुवाई में किसानों ने मांग की कि तराई क्षेत्र होने की वजह से यहां पानी की कोई कमी नहीं है। इसलिए साठा धान लगाने दिया जाए।
किसान संगठनों के अध्यक्षों ने कहा कि तराई इलाका होने के कारण यहां बाढ़ में फसलें बह जाती हैं और किसानों का बहुत नुकसान होता है। साठा धान लगाकर नुकसान की भरपाई की जा सकती है। उनका यह भी कहना था कि यदि प्रतिबंध लगाना था तो पहले बताना चाहिए था। किसानों ने अपनी जमीन खाली छोड़ दी है। अब अचानक प्रतिबंध लगाने से किसानों को बड़ा नुकसान होगा। किसानों ने चेतावनी दी यदि मांगें न मानी गईं तो वह अनिश्चितकाल धरना देंगे।
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भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष अमनदीप सिंह संधू ने बताया कि फिलहाल प्रशासन ने मांगें मान ली हैं। किसान साठा धान लगा सकते हैं। इसके बाद धरना समाप्त हो गया। सभी संगठनों के किसान वापस चले गए। एडीएम संजय सिंह को सौंपे गए ज्ञापन में मांगें रखी गईं कि किसानों का गन्ना भुगतान दिलाया जाए।
किसान कर्ज में डूबे हुए हैं, उनका कर्जा माफ किया जाए। ज्ञापन देने के समय भाकियू (चढूनी) से गुरविंदर सिंह, निशान सिंह, जितेंद्र पटेल, उत्तम यादव, सिद्धू सिंह, गुरजीत सिंह समेत सभी संगठनों के बड़ी संख्या में किसान नेता और जिले के किसान मौजूद रहे। संवाद
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भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के अध्यक्ष दिलबाग सिंह, भाकियू (चढूनी) के अध्यक्ष बलकार सिंह, भाकियू (अराजनैतिक) कुलवंत सिंह व भाकियू के अमनदीप सिंह संधू की अगुवाई में किसानों ने मांग की कि तराई क्षेत्र होने की वजह से यहां पानी की कोई कमी नहीं है। इसलिए साठा धान लगाने दिया जाए।
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किसान संगठनों के अध्यक्षों ने कहा कि तराई इलाका होने के कारण यहां बाढ़ में फसलें बह जाती हैं और किसानों का बहुत नुकसान होता है। साठा धान लगाकर नुकसान की भरपाई की जा सकती है। उनका यह भी कहना था कि यदि प्रतिबंध लगाना था तो पहले बताना चाहिए था। किसानों ने अपनी जमीन खाली छोड़ दी है। अब अचानक प्रतिबंध लगाने से किसानों को बड़ा नुकसान होगा। किसानों ने चेतावनी दी यदि मांगें न मानी गईं तो वह अनिश्चितकाल धरना देंगे।
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भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष अमनदीप सिंह संधू ने बताया कि फिलहाल प्रशासन ने मांगें मान ली हैं। किसान साठा धान लगा सकते हैं। इसके बाद धरना समाप्त हो गया। सभी संगठनों के किसान वापस चले गए। एडीएम संजय सिंह को सौंपे गए ज्ञापन में मांगें रखी गईं कि किसानों का गन्ना भुगतान दिलाया जाए।
किसान कर्ज में डूबे हुए हैं, उनका कर्जा माफ किया जाए। ज्ञापन देने के समय भाकियू (चढूनी) से गुरविंदर सिंह, निशान सिंह, जितेंद्र पटेल, उत्तम यादव, सिद्धू सिंह, गुरजीत सिंह समेत सभी संगठनों के बड़ी संख्या में किसान नेता और जिले के किसान मौजूद रहे। संवाद