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एजेंसियों की मनमानी से मुश्किलों में घिरे किसान
लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 03 Nov 2015 11:24 PM IST
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खरीफ सीजन में धान खरीद में लगी एजेंसियों ने मनमाने ढंग से क्रय केंद्र खोले हैं, जिसमें तहसील और ब्लाक मुख्यालय सहित महत्वपूर्ण कस्बों को दरकिनार कर दिया है। मसलन तहसील मुख्यालय मितौली पर क्रय केंद्र नहीं बनाया गया है, जिससे किसानों को झटका लगा है। इसी तरह बेहजम और बिजुआ जैसे ब्लाक मुख्यालय पर भी धान क्रय केंद्र नहीं बनाया गया है। बल्कि दुर्गम इलाकों में क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां अधिकतर किसान नहीं पहुंच सकते और न ही अफसर। लिहाजा सरकार की मंशा के विपरीत किसानों को बिचौलियों के हाथों औने-पौने दामों नौ सौ से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल मूल्य पर उपज बेचनी पड़ रही है।
खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में जिले भर में 105 क्रय केंद्र खोले गए हैं, जिसमें खाद्य विभाग विपणन शाखा के चार, पीसीएफ के 57, यूपीएसएस के 17, एनसीसीएफ के छह, एफसीआई के पांच, एसएफसी के चार, यूपी स्टेट एग्रो के तीन, कर्मचारी कल्याण निगम के चार और पंजीकृत सहकारी समितियों के पांच क्रय केंद्र शामिल हैं। शासन ने इस वर्ष 1,29,640 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया है।
किसानों से सीधे धान खरीद में लगी एजेंसियों ने इस बार मनमानी करते हुए क्रय केंद्र खोले हैं, जिससे किसानों को झटका लगा है।
तहसील और ब्लाक मुख्यालयों पर क्रय केंद्र न खोलकर दुर्गम गांवों में केंद्र बनाए हैं, जहां धान बेचने के लिए जाना किसानों के लिए लोहे के चने चबाना जैसा है। सबसे ज्यादा क्रय केंद्र खोलने वाली एजेंसी पीसीएफ में सबसे ज्यादा गड़बड़ी हैं, क्योंकि एजेंसी ने बिचौलियों और आढ़तियों को क्रय केंद्र का जिम्मा सौंप रखा हैै।
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लिहाजा क्रय केंद्रों को ऐसी जगहों पर खोला गया है, जहां पहुंचना किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। वहीं अफसरों की निगाह से भी क्रय केंद्रों को सेफ है।
क्रय केंद्रों की संख्या के लिहाज से दूसरे नंबर पर यूपीएसएस के 17 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं, जिनके कई क्रय केंद्र संचालन के लिए बिचौलियों के सुपुर्द किए गए हैं। इसी का नतीजा है कि तहसील मुख्यालय मितौली पर एक भी क्रय केंद्र नहीं खोला गया। इसी तरह बेहजम और बिजुआ ब्लाक मुख्यालय पर भी क्रय केंद्र नहीं खुला है। जबकि प्रस्तावित सूची को डीएम ने एप्रूवल दिया था।
विरिष्ठ विपणन निरीक्षक वीणा सिंह के अनुसार एजेंसियों की प्रस्तावित सूची के आधार पर क्रय केंद्र खोले गए हैं। मितौली में क्रय केंद्र खोलने के लिए शायद किसी एजेंसी ने प्रस्ताव नहीं दिया होगा। यदि कोई एजेंसी प्रस्ताव देती है, तो क्रय केंद्र खोलवाया जाएगा।
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खरीफ विपणन वर्ष 2015-16 में जिले भर में 105 क्रय केंद्र खोले गए हैं, जिसमें खाद्य विभाग विपणन शाखा के चार, पीसीएफ के 57, यूपीएसएस के 17, एनसीसीएफ के छह, एफसीआई के पांच, एसएफसी के चार, यूपी स्टेट एग्रो के तीन, कर्मचारी कल्याण निगम के चार और पंजीकृत सहकारी समितियों के पांच क्रय केंद्र शामिल हैं। शासन ने इस वर्ष 1,29,640 मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य दिया है।
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किसानों से सीधे धान खरीद में लगी एजेंसियों ने इस बार मनमानी करते हुए क्रय केंद्र खोले हैं, जिससे किसानों को झटका लगा है।
तहसील और ब्लाक मुख्यालयों पर क्रय केंद्र न खोलकर दुर्गम गांवों में केंद्र बनाए हैं, जहां धान बेचने के लिए जाना किसानों के लिए लोहे के चने चबाना जैसा है। सबसे ज्यादा क्रय केंद्र खोलने वाली एजेंसी पीसीएफ में सबसे ज्यादा गड़बड़ी हैं, क्योंकि एजेंसी ने बिचौलियों और आढ़तियों को क्रय केंद्र का जिम्मा सौंप रखा हैै।
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लिहाजा क्रय केंद्रों को ऐसी जगहों पर खोला गया है, जहां पहुंचना किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। वहीं अफसरों की निगाह से भी क्रय केंद्रों को सेफ है।
क्रय केंद्रों की संख्या के लिहाज से दूसरे नंबर पर यूपीएसएस के 17 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं, जिनके कई क्रय केंद्र संचालन के लिए बिचौलियों के सुपुर्द किए गए हैं। इसी का नतीजा है कि तहसील मुख्यालय मितौली पर एक भी क्रय केंद्र नहीं खोला गया। इसी तरह बेहजम और बिजुआ ब्लाक मुख्यालय पर भी क्रय केंद्र नहीं खुला है। जबकि प्रस्तावित सूची को डीएम ने एप्रूवल दिया था।
विरिष्ठ विपणन निरीक्षक वीणा सिंह के अनुसार एजेंसियों की प्रस्तावित सूची के आधार पर क्रय केंद्र खोले गए हैं। मितौली में क्रय केंद्र खोलने के लिए शायद किसी एजेंसी ने प्रस्ताव नहीं दिया होगा। यदि कोई एजेंसी प्रस्ताव देती है, तो क्रय केंद्र खोलवाया जाएगा।