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Lakhimpur Kheri News: अत्यधिक उल्टी से पेट और आंतों में घाव बने बाघिन की मौत का कारण
Thu, 25 Jun 2026 11:30 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Thu, 25 Jun 2026 11:30 PM IST
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लखीमपुर/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन की मझगईं रेंज में दो लोगों पर हमले के बाद ट्रैंक्युलाइज की गई बाघिन की मौत का प्रारंभिक कारण सामने आ गया है। भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), बरेली की प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक उल्टी होने से पेट खाली हो गया, जिससे आंतों में घाव (हेमरेजिक गैस्ट्रोएंट्राइटिस) हो गए और उसकी मौत हुई।
वन विभाग ने मंगलवार को दो लोगों की मौत के बाद बाघिन को बेहोश कर पकड़ा था, लेकिन कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए आईवीआरआई, बरेली भेजा गया।
प्रारंभिक रिपोर्ट में बाघिन के पेट में कीड़े मिलने का भी उल्लेख है। अधिकारियों का कहना है कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि बेहोश किए जाने से पहले उसने मांस खाया था। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन और बफर जोन की डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद अन्य पहलुओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
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शावकों को लेकर संशय बरकरार, ग्रामीणों और वन विभाग के दावे अलग
मझगईं में बाघिन के कथित शावकों को लेकर संशय बना हुआ है। ग्रामीणों का दावा है कि बाघिन के साथ दो शावक भी देखे गए थे, जबकि वन विभाग का कहना है कि निगरानी के दौरान कैमरा ट्रैप में एक बार भी शावक दिखाई नहीं दिए। वन विभाग के अनुसार दो लोगों की मौत के बाद लगाए गए कैमरों में एक नहीं, दो बाघों की तस्वीरें कैद हुई थीं। निगरानी टीमों को लगातार पगचिह्न भी मिले, लेकिन दूसरे बाघ का पता नहीं चल सका। कुछ वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में किसी अन्य बाघ की मौजूदगी रही होगी। उनका अनुमान है कि उसने शावकों पर हमला किया होगा, जिसके बाद बाघिन आक्रामक हुई। हालांकि इस संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि कैमरा ट्रैप में कहीं भी शावक नजर नहीं आए हैं। वनकर्मियों की टीम गठित कर क्षेत्र की लगातार निगरानी कराई जा रही है।
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वन विभाग ने मंगलवार को दो लोगों की मौत के बाद बाघिन को बेहोश कर पकड़ा था, लेकिन कुछ घंटे बाद उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव को पोस्टमाॅर्टम के लिए आईवीआरआई, बरेली भेजा गया।
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प्रारंभिक रिपोर्ट में बाघिन के पेट में कीड़े मिलने का भी उल्लेख है। अधिकारियों का कहना है कि इससे यह भी संकेत मिलता है कि बेहोश किए जाने से पहले उसने मांस खाया था। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन और बफर जोन की डीएफओ कीर्ति चौधरी ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद अन्य पहलुओं का भी परीक्षण किया जाएगा।
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शावकों को लेकर संशय बरकरार, ग्रामीणों और वन विभाग के दावे अलग
मझगईं में बाघिन के कथित शावकों को लेकर संशय बना हुआ है। ग्रामीणों का दावा है कि बाघिन के साथ दो शावक भी देखे गए थे, जबकि वन विभाग का कहना है कि निगरानी के दौरान कैमरा ट्रैप में एक बार भी शावक दिखाई नहीं दिए। वन विभाग के अनुसार दो लोगों की मौत के बाद लगाए गए कैमरों में एक नहीं, दो बाघों की तस्वीरें कैद हुई थीं। निगरानी टीमों को लगातार पगचिह्न भी मिले, लेकिन दूसरे बाघ का पता नहीं चल सका। कुछ वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में किसी अन्य बाघ की मौजूदगी रही होगी। उनका अनुमान है कि उसने शावकों पर हमला किया होगा, जिसके बाद बाघिन आक्रामक हुई। हालांकि इस संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फील्ड डायरेक्टर डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि कैमरा ट्रैप में कहीं भी शावक नजर नहीं आए हैं। वनकर्मियों की टीम गठित कर क्षेत्र की लगातार निगरानी कराई जा रही है।