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Lakhimpur Kheri News: जब से अस्पताल की जगह बदली... मरीज ही नहीं पहुंच रहे
Tue, 16 Jan 2024 03:45 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 16 Jan 2024 03:45 AM IST
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जिला होम्योपैथिक अस्पताल में ओपीडी करते हुए डॉ. हरीलाल भार्गव।- संवाद
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लखीमपुर-खीरी। पहले जिला अस्पताल में संचालित होने वाले जिला होम्योपैथिक अस्पताल की जबसे जगह बदली है, मरीज आने कम हो गए हैं। अब यह अस्पताल सीएमएस दफ्तर में चल रहा है। यहां केवल दो दिन डॉक्टर बैठते हैं। अन्य दिन अस्पताल स्टाफ के हवाले रहता है।
जिला अस्पताल परिसर में वर्षों से होम्योपैथिक अस्पताल संचालित था, लेकिन अब वहां मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है। ऐसे में होम्योपैथिक अस्पताल के भवन को ध्वस्त कर सीएमएस कार्यालय के भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। कहने को तो यह जिला होम्योपैथिक अस्पताल है, लेकिन यहां सप्ताह में मात्र दो दिन ही डॉक्टर ओपीडी करते है। अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर डॉ. हरीलाल भार्गव मंगलवार और बृहस्पतिवार को ओपीडी करते हैं। अन्य दिन वह दो अन्य अस्पतालों में मरीजों को देखते हैं।
होम्योपैथिक अस्पताल जब जिला अस्पताल में संचालित था तब यहां काफी मरीज दवा लेने आते थे, लेकिन जब से यह अस्पताल सीएमएस कार्यालय के अस्थाई भवन में शिफ्ट हुआ है, अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। ऐसे में बहुत ही कम मरीज दवा लेने पहुंच पाते है।
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शहर से सात किमी दूर बैठते हैं विभागीय अफसर
होम्योपैथिक विभाग के विभागीय अफसर शहर से सात किलो मीटर दूर बेहजम रोड पर स्थित कालाआम गांव में बैठते हैं। जिला होम्योपैथिक अधिकारी का वहीं कार्यालय हैं और वहीं पर पूरा स्टाफ बैठता है। वहीं से विभागीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है।
जिलेभर के अस्पताल में डॉक्टरों की कमी
जिले में 28 होम्योपैथिक अस्पताल हैं। इतने ही डॉक्टर और फार्मासिस्ट होने चाहिए, लेकिन काफी समय से डॉक्टरों का टोटा है। 28 की जगह 21 डॉक्टर ही तैनात हैं। वहीं छह फार्मासिस्ट भी कम है। जिन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं है, वहां की जिम्मेदारी दूसरे डॉक्टरों के कंधों पर है। एक डॉक्टर के पास दो-दो अस्पताल की जिम्मेदारी होने पर मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। समस्या तब और बढ़ जाती है जब कोई डॉक्टर छुट्टी पर चल जाए। डॉक्टर के छुट्टी पर जाने से दो अस्पतालों की ओपीडी प्रभावित हो जाती है। वहीं फार्मासिस्ट न होने की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
पांच दिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले रहता है अस्पताल
सिकंदराबाद। मितौली ब्लॉक क्षेत्र के बैबहा गांव में होम्योपैथिक अस्पताल है। डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति न होने से यहां काफी कम मरीज दवा लेने पहुंचते है। यहां के डॉक्टर का जून में तबादला हो गया था। उनके जाने के बाद फरधान के डॉक्टर आशुतोष वर्मा की अस्थायी तैनाती है, जो सोमवार और बृहस्पतिवार को आते है। शेष दिन यह अस्पताल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी परशुराम की देखरेख में संचालित है।
वर्जन
अस्पताल के लिए गुरुनानक इंटर कॉलेज के पास जमीन मिल गई है। अनुमोदन के बाद भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा। डॉक्टरों की कमी है, जिससे कुछ दिक्कतें होती है। इसके लिए शासन को लिखा जा चुका है।
-डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह, जिला होम्योपैथिक अधिकारी
जिला अस्पताल परिसर में वर्षों से होम्योपैथिक अस्पताल संचालित था, लेकिन अब वहां मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है। ऐसे में होम्योपैथिक अस्पताल के भवन को ध्वस्त कर सीएमएस कार्यालय के भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। कहने को तो यह जिला होम्योपैथिक अस्पताल है, लेकिन यहां सप्ताह में मात्र दो दिन ही डॉक्टर ओपीडी करते है। अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉक्टर डॉ. हरीलाल भार्गव मंगलवार और बृहस्पतिवार को ओपीडी करते हैं। अन्य दिन वह दो अन्य अस्पतालों में मरीजों को देखते हैं।
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होम्योपैथिक अस्पताल जब जिला अस्पताल में संचालित था तब यहां काफी मरीज दवा लेने आते थे, लेकिन जब से यह अस्पताल सीएमएस कार्यालय के अस्थाई भवन में शिफ्ट हुआ है, अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। ऐसे में बहुत ही कम मरीज दवा लेने पहुंच पाते है।
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शहर से सात किमी दूर बैठते हैं विभागीय अफसर
होम्योपैथिक विभाग के विभागीय अफसर शहर से सात किलो मीटर दूर बेहजम रोड पर स्थित कालाआम गांव में बैठते हैं। जिला होम्योपैथिक अधिकारी का वहीं कार्यालय हैं और वहीं पर पूरा स्टाफ बैठता है। वहीं से विभागीय गतिविधियों की निगरानी की जाती है।
जिलेभर के अस्पताल में डॉक्टरों की कमी
जिले में 28 होम्योपैथिक अस्पताल हैं। इतने ही डॉक्टर और फार्मासिस्ट होने चाहिए, लेकिन काफी समय से डॉक्टरों का टोटा है। 28 की जगह 21 डॉक्टर ही तैनात हैं। वहीं छह फार्मासिस्ट भी कम है। जिन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं है, वहां की जिम्मेदारी दूसरे डॉक्टरों के कंधों पर है। एक डॉक्टर के पास दो-दो अस्पताल की जिम्मेदारी होने पर मरीजों को पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। समस्या तब और बढ़ जाती है जब कोई डॉक्टर छुट्टी पर चल जाए। डॉक्टर के छुट्टी पर जाने से दो अस्पतालों की ओपीडी प्रभावित हो जाती है। वहीं फार्मासिस्ट न होने की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
पांच दिन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के हवाले रहता है अस्पताल
सिकंदराबाद। मितौली ब्लॉक क्षेत्र के बैबहा गांव में होम्योपैथिक अस्पताल है। डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति न होने से यहां काफी कम मरीज दवा लेने पहुंचते है। यहां के डॉक्टर का जून में तबादला हो गया था। उनके जाने के बाद फरधान के डॉक्टर आशुतोष वर्मा की अस्थायी तैनाती है, जो सोमवार और बृहस्पतिवार को आते है। शेष दिन यह अस्पताल एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी परशुराम की देखरेख में संचालित है।
वर्जन
अस्पताल के लिए गुरुनानक इंटर कॉलेज के पास जमीन मिल गई है। अनुमोदन के बाद भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा। डॉक्टरों की कमी है, जिससे कुछ दिक्कतें होती है। इसके लिए शासन को लिखा जा चुका है।
-डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह, जिला होम्योपैथिक अधिकारी