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शाम ढले जुल्फों के तले...
गोला गोकर्णनाथ
Updated Fri, 02 Jan 2015 06:35 PM IST
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नववर्ष पर फलक चिल्ड्रेंस एकेडमी में शमीम फातिमा शिक्षा सेवा समिति के तत्वावधान में नगर पालिका के सदस्य कफील अहमद की अध्यक्षता में कवि गोष्ठी हुई, जिसमें कवियों ने विभिन्न विधाओं में कविता पाठ किया।
रमाकांत चौधरी ने कहा कि-
हाथों में हाथ लेकर हाथ छोड़ देता है, कुछ दूर साथ चलके साथ छोड़ देता है।
संचालन करते हुए तारिक ने कहा कि-
शाम ढले जुल्फों के तले रुखसार का आलम क्या होगा,
हो जिसमें छपी तस्वीर तेरी,
अखबार का आलम क्या होगा।
अरविंद पटेल ने कहा कि-
कुछ कर गुजरने का हौसला हो अगर दिल में, करना वो काम जो देश के काम हो,
मोहम्मद यूनुस बादल ने कहा कि-
मेरी तस्वीर को आंखों में बसाए रखना, दिल ए बेताब तो सीने से लगाए रखना।
अब्दुल वहीद अंसारी ने कहा कि-
फूल गुलशन में तो खिलते हैं बहार आने के बाद, याद आती है जवानी पीर हो जाने के बाद।
आलोक तिवारी ने कहा कि-
काला धन वापस होकर क्या भारत में आ जाएगा, भारत के कुछ भ्रष्टों को क्या ऐसा सब कुछ भाएगा।
इस मौके पर इसहाक अली, अभिषेक मिश्र निष्कर्ष, मोहम्मद आरिफ खान, मोहित कमर, आजाद अर्जुन नगरीम ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर महबूब, अच्छन अली, रईस वारसी, मोबीन अहमद, वारिस अली, महेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।
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रमाकांत चौधरी ने कहा कि-
हाथों में हाथ लेकर हाथ छोड़ देता है, कुछ दूर साथ चलके साथ छोड़ देता है।
संचालन करते हुए तारिक ने कहा कि-
शाम ढले जुल्फों के तले रुखसार का आलम क्या होगा,
हो जिसमें छपी तस्वीर तेरी,
अखबार का आलम क्या होगा।
अरविंद पटेल ने कहा कि-
कुछ कर गुजरने का हौसला हो अगर दिल में, करना वो काम जो देश के काम हो,
मोहम्मद यूनुस बादल ने कहा कि-
मेरी तस्वीर को आंखों में बसाए रखना, दिल ए बेताब तो सीने से लगाए रखना।
अब्दुल वहीद अंसारी ने कहा कि-
फूल गुलशन में तो खिलते हैं बहार आने के बाद, याद आती है जवानी पीर हो जाने के बाद।
आलोक तिवारी ने कहा कि-
काला धन वापस होकर क्या भारत में आ जाएगा, भारत के कुछ भ्रष्टों को क्या ऐसा सब कुछ भाएगा।
इस मौके पर इसहाक अली, अभिषेक मिश्र निष्कर्ष, मोहम्मद आरिफ खान, मोहित कमर, आजाद अर्जुन नगरीम ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर महबूब, अच्छन अली, रईस वारसी, मोबीन अहमद, वारिस अली, महेंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।
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