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Lakhimpur Kheri News: चार साल बाद भी अधूरे आवास व सड़क... स्वास्थ्य कर्मी परेशान
Wed, 17 Sep 2025 12:07 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 17 Sep 2025 12:07 AM IST
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जिन आवास में स्टाफ रहता है उसके पास उगी लंबी झाड़ियां। संवाद
लखीमपुर खीरी। ओयल के एमसीएच विंग का भवन तो तैयार होकर शुरू हो गया, लेकिन यहां बने आवास व परिसर की सड़क आज भी अधूरी पड़ी है। नतीजतन डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अप्रैल, 2022 से एमसीएच विंग में जिला अस्पताल की ओपीडी और जुलाई 2022 से इमरजेंसी समेत सभी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, मगर डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों के रहने के लिए बने आवास अधूरे हैं। करीब 22 आवास आज भी निर्माण की राह देख रहे हैं।
जो आवास बनकर तैयार हुए भी हैं, उनके आसपास झाड़ियां और गंदगी फैली रहती है। बरसात के दिनों में जलभराव और कीचड़ के चलते स्थिति और बदतर हो जाती है। कई बार जहरीले जीव-जंतु निकलने से कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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परिसर में एक सीएमएस हाउस, 18 कमरों का नर्सिंग हॉस्टल और आठ टाइप-थ्री हाउस बनकर तैयार हैं, मगर डॉक्टरों के लिए बनाए गए 18 कमरों में छह और 32 टाइप-टू आवासों में से 16 अभी भी अधूरे हैं।
आवास की कमी के कारण डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को रोजाना मुख्यालय से ओयल तक आना-जाना पड़ता है। इससे न केवल स्वास्थ्यकर्मी बल्कि मरीज भी परेशान हैं, क्योंकि समय पर सेवाएं प्रभावित होती हैं।
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जानकारी है कि स्टाफ रह रहा है, लेकिन निर्माण अधूरा है। इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य को पूरा कराया जा सके। सड़क का निर्माण पहले हो जाए, ये भी कोशिश की जा रही है।
- डॉ. अमित गुप्ता, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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अप्रैल, 2022 से एमसीएच विंग में जिला अस्पताल की ओपीडी और जुलाई 2022 से इमरजेंसी समेत सभी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, मगर डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों के रहने के लिए बने आवास अधूरे हैं। करीब 22 आवास आज भी निर्माण की राह देख रहे हैं।
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जो आवास बनकर तैयार हुए भी हैं, उनके आसपास झाड़ियां और गंदगी फैली रहती है। बरसात के दिनों में जलभराव और कीचड़ के चलते स्थिति और बदतर हो जाती है। कई बार जहरीले जीव-जंतु निकलने से कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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परिसर में एक सीएमएस हाउस, 18 कमरों का नर्सिंग हॉस्टल और आठ टाइप-थ्री हाउस बनकर तैयार हैं, मगर डॉक्टरों के लिए बनाए गए 18 कमरों में छह और 32 टाइप-टू आवासों में से 16 अभी भी अधूरे हैं।
आवास की कमी के कारण डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को रोजाना मुख्यालय से ओयल तक आना-जाना पड़ता है। इससे न केवल स्वास्थ्यकर्मी बल्कि मरीज भी परेशान हैं, क्योंकि समय पर सेवाएं प्रभावित होती हैं।
जानकारी है कि स्टाफ रह रहा है, लेकिन निर्माण अधूरा है। इसके लिए पत्राचार किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य को पूरा कराया जा सके। सड़क का निर्माण पहले हो जाए, ये भी कोशिश की जा रही है।
- डॉ. अमित गुप्ता, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल

जिन आवास में स्टाफ रहता है उसके पास उगी लंबी झाड़ियां। संवाद