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शिक्षामित्रों में उबाल, क्रमिक अनशन शुरू
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 28 Jul 2017 10:38 PM IST
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क्रमिक अनशन
- फोटो : अमर उजाला
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तीसरे दिन भी बीएसए कार्यालय पर उमड़ा शिक्षा मित्रों का सैलाब
अध्यापक सेवा नियमावली में संशोधन करने की मांग
भाजपा जिलाध्यक्ष के माध्यम से राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। सुप्रीम कोर्ट फैसले के खिलाफ शिक्षामित्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। फैसले से नाराज शिक्षामित्रों ने तीसरे दिन भी बीएसए कार्यालय पर क्रमिक अनशन जारी रखा। शिक्षामित्र केंद्र व प्रदेश सरकार से रोजी रोटी की व्यवस्था बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार से 61 शिक्षामित्रों ने क्रमिक अनशन भी शुरू कर दिया है।
आदर्श शिक्षामित्र एवं समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को भी शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय पर एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे शिक्षामित्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सारे सपने ही चकनाचूर हो गए और अब रोजी रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है, जिससे आहत शिक्षामित्र आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। शिक्षामित्रों ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को संबोधित ज्ञापन जिलाध्यक्ष शरद बाजपेई को सौंपा। प्रदर्शन जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, अरविंद सिंह, सतीश कुमार,आशा सिंह, पूनम मिश्रा, प्रवीण कुमार वर्मा, कंचन दुबे, राम सागर सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष समिति ने किया समर्थन
समिति के संयोजक एवं बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष व सदस्य अजय कुमार शुक्ला ने धरना स्थल पर पहुंचकर शिक्षामित्रों का समर्थन किया। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षामित्रों की रोजी रोटी के लिए पुनरविचार याचिका दाखिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को शिक्षामित्रों के भविष्य के लिए आवश्यक कदम उठाए।
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यह है मांग
1. प्रदेश सरकार द्वारा अध्यापक सेवा नियमावली में शीघ्र संशोधन कर हम सभी को सहायक अध्यापक पद पर वापस लिया जाए।
2. तत्काल प्रभाव से समान कार्य समान वेतन लागू किया जाए।
61 लोगों ने शुरू किया क्रमिक अनशन
राजेश कुमार, प्रेम कुमार, माया प्रसाद, मेनका तिवारी, मिलन शुक्ला, पूनम सिंह, कल्पना पांडे, ज्योत्सना, दीपमाला अवस्थी, ज्योत्सना शुक्ला, शिखा वर्मा, सोनी मिश्रा, कृष्ण कुमार, बलराम सिंह, रामकैलाश, ज्योति सिंह, अनीता सिंह, नीलम सक्सेना, राजेश त्रिवेदी सहित 61 लोगों ने क्रमिक अनशन शुरू किया है।
समायोजन रद्द होने से रोजी रोटी का संकट
लखीमपुर खीरी। सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित होने के बाद शिक्षामित्रों की तो दुनिया ही बदल गई थी। कुछ ने बच्चों की शिक्षा की खातिर तो कुछ ने ग्रामीण जीवन से आजिज आकर शहरों की रुख कर लिया। बच्चों का शहर के अच्छे स्कूलों में नाम लिखाकर अपना आशियाना भी बना लिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उनकी सपनों की दुनियां को ही खत्म कर दिया और एक झटके में अर्श से लाकर फर्श पर खड़ा कर दिया। समायोजन निरस्त होने से शिक्षामित्रों में जहां आक्रोश है वहीं जीवन यापन व बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताएं भी हैं।
समायोजित होने के बाद शिक्षामित्रों ने अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए जहां अच्छे स्कूलों में दाखिला करा दिया तो कुछ न उन्हें और बेहतर शिक्षा की खातिर घर से बाहर ही भेज दिया, जिससे उनके बच्चे अच्छी शिक्षा पा सकें, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नौकरी जाने का झटका लगते ही क्या महिला और क्या पुरुष सभी की आंखें नम हो गईं। वहीं कुछ महिला शिक्षामित्र इस आदेश से बीमार ही हो गईं। वहीं तीन दिन से हो रहे धरना प्रदर्शन के बाद भी शासन की ओर से कोई सकारात्मक जवाब ना मिलने से शिक्षामित्रों की बेचैनी भी बढ़ रही है। समायोजित शिक्षामित्र अपनी नौकरी की खातिर केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर आस लगाए हैं।
फैक्ट फाइल=
जिले में शिक्षामित्रों की संख्या- 3734
समायोजित हुए शिक्षामित्र-3534
शेष रह गए- 200
महिला शिक्षामित्र - 2240
पुरुषों की संख्या- 1494
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अध्यापक सेवा नियमावली में संशोधन करने की मांग
भाजपा जिलाध्यक्ष के माध्यम से राष्ट्रीय अध्यक्ष को भेजा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी। सुप्रीम कोर्ट फैसले के खिलाफ शिक्षामित्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। फैसले से नाराज शिक्षामित्रों ने तीसरे दिन भी बीएसए कार्यालय पर क्रमिक अनशन जारी रखा। शिक्षामित्र केंद्र व प्रदेश सरकार से रोजी रोटी की व्यवस्था बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार से 61 शिक्षामित्रों ने क्रमिक अनशन भी शुरू कर दिया है।
आदर्श शिक्षामित्र एवं समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले शुक्रवार को भी शिक्षामित्रों ने बीएसए कार्यालय पर एकत्रित होकर धरना प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे शिक्षामित्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सारे सपने ही चकनाचूर हो गए और अब रोजी रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है, जिससे आहत शिक्षामित्र आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। शिक्षामित्रों ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को संबोधित ज्ञापन जिलाध्यक्ष शरद बाजपेई को सौंपा। प्रदर्शन जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, अरविंद सिंह, सतीश कुमार,आशा सिंह, पूनम मिश्रा, प्रवीण कुमार वर्मा, कंचन दुबे, राम सागर सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
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भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष समिति ने किया समर्थन
समिति के संयोजक एवं बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष व सदस्य अजय कुमार शुक्ला ने धरना स्थल पर पहुंचकर शिक्षामित्रों का समर्थन किया। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षामित्रों की रोजी रोटी के लिए पुनरविचार याचिका दाखिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को शिक्षामित्रों के भविष्य के लिए आवश्यक कदम उठाए।
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यह है मांग
1. प्रदेश सरकार द्वारा अध्यापक सेवा नियमावली में शीघ्र संशोधन कर हम सभी को सहायक अध्यापक पद पर वापस लिया जाए।
2. तत्काल प्रभाव से समान कार्य समान वेतन लागू किया जाए।
61 लोगों ने शुरू किया क्रमिक अनशन
राजेश कुमार, प्रेम कुमार, माया प्रसाद, मेनका तिवारी, मिलन शुक्ला, पूनम सिंह, कल्पना पांडे, ज्योत्सना, दीपमाला अवस्थी, ज्योत्सना शुक्ला, शिखा वर्मा, सोनी मिश्रा, कृष्ण कुमार, बलराम सिंह, रामकैलाश, ज्योति सिंह, अनीता सिंह, नीलम सक्सेना, राजेश त्रिवेदी सहित 61 लोगों ने क्रमिक अनशन शुरू किया है।
समायोजन रद्द होने से रोजी रोटी का संकट
लखीमपुर खीरी। सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित होने के बाद शिक्षामित्रों की तो दुनिया ही बदल गई थी। कुछ ने बच्चों की शिक्षा की खातिर तो कुछ ने ग्रामीण जीवन से आजिज आकर शहरों की रुख कर लिया। बच्चों का शहर के अच्छे स्कूलों में नाम लिखाकर अपना आशियाना भी बना लिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उनकी सपनों की दुनियां को ही खत्म कर दिया और एक झटके में अर्श से लाकर फर्श पर खड़ा कर दिया। समायोजन निरस्त होने से शिक्षामित्रों में जहां आक्रोश है वहीं जीवन यापन व बच्चों के भविष्य को लेकर चिंताएं भी हैं।
समायोजित होने के बाद शिक्षामित्रों ने अपने बच्चों का भविष्य बनाने के लिए जहां अच्छे स्कूलों में दाखिला करा दिया तो कुछ न उन्हें और बेहतर शिक्षा की खातिर घर से बाहर ही भेज दिया, जिससे उनके बच्चे अच्छी शिक्षा पा सकें, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नौकरी जाने का झटका लगते ही क्या महिला और क्या पुरुष सभी की आंखें नम हो गईं। वहीं कुछ महिला शिक्षामित्र इस आदेश से बीमार ही हो गईं। वहीं तीन दिन से हो रहे धरना प्रदर्शन के बाद भी शासन की ओर से कोई सकारात्मक जवाब ना मिलने से शिक्षामित्रों की बेचैनी भी बढ़ रही है। समायोजित शिक्षामित्र अपनी नौकरी की खातिर केंद्र व प्रदेश सरकार की ओर आस लगाए हैं।
फैक्ट फाइल=
जिले में शिक्षामित्रों की संख्या- 3734
समायोजित हुए शिक्षामित्र-3534
शेष रह गए- 200
महिला शिक्षामित्र - 2240
पुरुषों की संख्या- 1494