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हर माह लाखों की कमाई, फिर भी ब्लड बैंक की व्यवस्थाएं चरमराईं
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जिला अस्पताल का जर्जर बेड।
काफी दिन से खराब पड़ा है ब्लड बैंक में लगा एसी
सीलन के कारण काउंसलर कक्ष में बैठना मुश्किल
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की हर माह लाखों की कमाई है। बावजूद इसके वहां की व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। न तो काउंसलर कक्ष दुरुस्त है और न ही ब्लड डोनेशन का कमरा ही। ब्लड बैंक के लोगों के मुताबिक, हर माह अच्छा खासी रकम प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में जमा होती है, लेकिन ब्लड बैंक के रखरखाव पर कितना खर्च होता है यह खराब लगे एसी और टूटी काऊ चेयर बता रही है।
ब्लड बैंक से रोजाना 15 से 20 यूनिट ब्लड जरूरतमंदों को दिया जाता है। इसमें कुछ लोग जिला एवं महिला अस्पताल के होते हैं तो कुछ लोग निजी अस्पतालों के। निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों से 1050 रुपये का प्रोसेसिंग शुल्क लिया जाता है। इस धनराशि से ही ब्लड बैंक के रखरखाव से लेकर जांच किट, रक्तदाता के लिए फ्रूटी, ब्लड रखने के लिए बैग आदि की खरीदारी होती है।
ब्लड बैंक के स्टॉफ के मुताबिक, जांच किट, फ्रूटी एवं बैग के अलावा ब्लड बैंक के रखरखाव पर कितनी धनराशि खर्च होती है इसका अंदाजा ब्लडबैंक की स्थिति बयां कर रही है। काउंसलर कक्ष में सीलन के कारण बैठना मुश्किल है तो वहीं एसी भी लंबे समय से खराब है। वहीं ब्लड डोनेशन रूम में न तो रक्तदाता को लिटाने वाली कुर्सी सही और न ही एसी। ऐसे में रक्तदान करने वालों को भी तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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सीलन के कारण काउंसलर कक्ष में बैठना मुश्किल
लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की हर माह लाखों की कमाई है। बावजूद इसके वहां की व्यवस्थाएं चरमराई हुई हैं। न तो काउंसलर कक्ष दुरुस्त है और न ही ब्लड डोनेशन का कमरा ही। ब्लड बैंक के लोगों के मुताबिक, हर माह अच्छा खासी रकम प्रोसेसिंग शुल्क के रूप में जमा होती है, लेकिन ब्लड बैंक के रखरखाव पर कितना खर्च होता है यह खराब लगे एसी और टूटी काऊ चेयर बता रही है।
ब्लड बैंक से रोजाना 15 से 20 यूनिट ब्लड जरूरतमंदों को दिया जाता है। इसमें कुछ लोग जिला एवं महिला अस्पताल के होते हैं तो कुछ लोग निजी अस्पतालों के। निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों से 1050 रुपये का प्रोसेसिंग शुल्क लिया जाता है। इस धनराशि से ही ब्लड बैंक के रखरखाव से लेकर जांच किट, रक्तदाता के लिए फ्रूटी, ब्लड रखने के लिए बैग आदि की खरीदारी होती है।
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ब्लड बैंक के स्टॉफ के मुताबिक, जांच किट, फ्रूटी एवं बैग के अलावा ब्लड बैंक के रखरखाव पर कितनी धनराशि खर्च होती है इसका अंदाजा ब्लडबैंक की स्थिति बयां कर रही है। काउंसलर कक्ष में सीलन के कारण बैठना मुश्किल है तो वहीं एसी भी लंबे समय से खराब है। वहीं ब्लड डोनेशन रूम में न तो रक्तदाता को लिटाने वाली कुर्सी सही और न ही एसी। ऐसे में रक्तदान करने वालों को भी तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
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