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धूल भरी हवाएं अस्थमा पीड़ितों के लिए गंभीर खतरा
अमर उजाला ब्यूरो-लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 05 May 2016 12:00 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सावधान रहकर नियंत्रित की जा सकती है बीमारी
बदलता मौसम और हवाओं में बढ़ रहे प्रदूषण के चलते अस्थमा जैसी बीमारी तेजी से लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है। ऐसे में धूल भरी हवाएं और हवा में उड़ते पराग कण तथा सेमल की रुई अस्थमा रोगियों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसे नियंत्रित न कर पाने की स्थिति में यह जानलेवा साबित हो सकती है। अस्थमा रोगियों के लिए इस तरह के मौसम में खास सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
अस्थमा जैसी बीमारियों के लिए सबसे बड़ा कारण बढ़ता वायु प्रदूषण है, इसके अलावा धूल, धुआं, नमी, धूम्रपान और घर की डस्ट यह सब अस्थमा के कारण होते हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग अस्थमा से पीड़ित तीन करोड़ लोग हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा.आरएस माधौरिया ने बताया कि धूल कण, धुंआ, और परागकण आदि सांस नली में पहुंचने से अस्थमा रोगी की सांस नलियों में सूजन आ जाती है। सांस नलिकाओं की भीतरी दीवारों में लालिमा आ जाती है। बलगम बनने लगता है पीड़ित को सांस लेने में कठिनाई होती है। खांसी आने लगती है रात में यह समस्या और भी बढ़ जाती है। इस समय धूल भरी हवाएं अस्थमा रोगियों के लिए और खतरनाक हो सकती हैं। डा.माधौरिया ने बताया कि पीड़ितों में अधिकांश में इसके लक्षण बचपन से ही दिखने लगते हैं। बच्चों में खांसी, सांस फूलना, सीने में भारीपन यह सब अस्थमा के ही लक्षण हैं इससे बच्चे का विकास रुक जाता है। कुछ लोगों में इसके लक्षण युवा अवस्था में प्रकट होते हैं। जांच में इसकी पुष्टि हो जाती है। डा.माधौरिया ने बताया कि अस्थमा पूरी तरह ठीक तो नहीं होता लेकिन सावधानी रखकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। खास कर बदलते मौसम में इसमें विशेष सावधान रहने की आवश्यकता होती है।
क्या रखें सावधानी
डा.आरएस माधौरिया बताते हैं कि बदलते मौसम में खास सावधान रहने की आवश्यकता होती है प्रयास करें कि धूल और धुएं से बचाव रखें। धूम्रपान न करें। जहां पर लोग धूम्रपान कर रहें हों वहां पर न रुकें। पालतू पशुओं के पास अधिक देर तक न रुकें। सेमल की रुई के तकिये आदि हों तों उन्हें हटा दें। प्रयास करें कि धूल आदि हो तो नाक को ढक लें, जिससे बारीक कण सांस नली तक न पहुंच। इसके अलावा नमी जैसे स्थानों पर न रहें।
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इनहेलर से मिलता है लाभ
डा.आरएस माधौरिया ने बताया कि वैसे तो अस्थमा से संबंधित तमाम दवाएं हैं लेकिन इसमें इनहेलर शीघ्र सांस नली में पहुंचता है इससे रोगी को शीघ्र ही आराम मिल जाता है। सांस रोगियों को चाहिए कि वे आवश्यक दवाएं और इनहेलर अपने साथ रखें कोई मेहनत वाला कार्य कर रहें हैं तो कार्य करने से पहले इनहेलर का प्रयोग करें।
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बदलता मौसम और हवाओं में बढ़ रहे प्रदूषण के चलते अस्थमा जैसी बीमारी तेजी से लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है। ऐसे में धूल भरी हवाएं और हवा में उड़ते पराग कण तथा सेमल की रुई अस्थमा रोगियों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। इसे नियंत्रित न कर पाने की स्थिति में यह जानलेवा साबित हो सकती है। अस्थमा रोगियों के लिए इस तरह के मौसम में खास सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
अस्थमा जैसी बीमारियों के लिए सबसे बड़ा कारण बढ़ता वायु प्रदूषण है, इसके अलावा धूल, धुआं, नमी, धूम्रपान और घर की डस्ट यह सब अस्थमा के कारण होते हैं। डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग अस्थमा से पीड़ित तीन करोड़ लोग हैं। जिला अस्पताल के फिजीशियन डा.आरएस माधौरिया ने बताया कि धूल कण, धुंआ, और परागकण आदि सांस नली में पहुंचने से अस्थमा रोगी की सांस नलियों में सूजन आ जाती है। सांस नलिकाओं की भीतरी दीवारों में लालिमा आ जाती है। बलगम बनने लगता है पीड़ित को सांस लेने में कठिनाई होती है। खांसी आने लगती है रात में यह समस्या और भी बढ़ जाती है। इस समय धूल भरी हवाएं अस्थमा रोगियों के लिए और खतरनाक हो सकती हैं। डा.माधौरिया ने बताया कि पीड़ितों में अधिकांश में इसके लक्षण बचपन से ही दिखने लगते हैं। बच्चों में खांसी, सांस फूलना, सीने में भारीपन यह सब अस्थमा के ही लक्षण हैं इससे बच्चे का विकास रुक जाता है। कुछ लोगों में इसके लक्षण युवा अवस्था में प्रकट होते हैं। जांच में इसकी पुष्टि हो जाती है। डा.माधौरिया ने बताया कि अस्थमा पूरी तरह ठीक तो नहीं होता लेकिन सावधानी रखकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। खास कर बदलते मौसम में इसमें विशेष सावधान रहने की आवश्यकता होती है।
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क्या रखें सावधानी
डा.आरएस माधौरिया बताते हैं कि बदलते मौसम में खास सावधान रहने की आवश्यकता होती है प्रयास करें कि धूल और धुएं से बचाव रखें। धूम्रपान न करें। जहां पर लोग धूम्रपान कर रहें हों वहां पर न रुकें। पालतू पशुओं के पास अधिक देर तक न रुकें। सेमल की रुई के तकिये आदि हों तों उन्हें हटा दें। प्रयास करें कि धूल आदि हो तो नाक को ढक लें, जिससे बारीक कण सांस नली तक न पहुंच। इसके अलावा नमी जैसे स्थानों पर न रहें।
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इनहेलर से मिलता है लाभ
डा.आरएस माधौरिया ने बताया कि वैसे तो अस्थमा से संबंधित तमाम दवाएं हैं लेकिन इसमें इनहेलर शीघ्र सांस नली में पहुंचता है इससे रोगी को शीघ्र ही आराम मिल जाता है। सांस रोगियों को चाहिए कि वे आवश्यक दवाएं और इनहेलर अपने साथ रखें कोई मेहनत वाला कार्य कर रहें हैं तो कार्य करने से पहले इनहेलर का प्रयोग करें।