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मां की स्वपनिद्रा से बना है श्री दुर्गा मंदिर
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गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी में पुराण वर्णित मां मंगला देवी मंदिर के अलावा यहां देवी मां के दो अन्य मंदिर श्रद्धा के केंद्र हैं। इनमें रक्षा मंदिर के नाम से जाना जाने वाला मां दुर्गा का मंदिर और सिद्ध संत फूलबाबा द्वारा निर्मित करवाया गया मां नारायणी देवी मंदिर भी है। नवरात्र में इन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।
मोहल्ला मुन्नूगंज की रक्षा देवी मां की अनन्य भक्त थीं। वह मां के मंदिरों और लोगों के घरों में भजन कीर्तन करती थीं। बताते हैं कि एक रात मां ने उन्हें सपने में मंदिर बनवाने का निर्देश दिया और बताया कि वह व्यापारी श्रीभगवान माहेश्वरी की पत्नी रेवती देवी से संपर्क करें। सुबह होने पर वह रेवती देवी के घर गईं तो रेवती देवी मंदिर बनवाने के लिए सहर्ष तैयार हो गईं। दोनों महिलाएं नगर पालिका के मुन्नूगंज वार्ड सदस्य संजीव सक्सेना से मिलीं तो उन्होंने नजूल की भूमि दिखाई और मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया। मां के इस मंदिर में मां दुर्गा, भगवान श्री गणेश, कार्तिकेय की प्रतिमाएं और शिवलिंग स्थापित हैं। भक्तों ने रक्षा देवी के स्वर्गवास के बाद उनकी भी एक प्रतिमा स्थापित कर दी है।
नगर में देवी मां के भक्त सिद्ध संत थे। फूल बाबा वह पत्तों की डलिया लेकर चलते थे, जिसमें फूल रहते थे। पूरे दिन बाबा फूल बांटते पर उनकी डलिया के फूल हमेशा ताजे और कभी कम नहीं होते थे। बाबाजी नारायणी देवी के परम भक्त थे। उन्होंने खुटार मार्ग पर मां नारायणी देवी का भव्य मंदिर निर्माण कराया। मां के मंदिर के लिए भूमि सरदार अवतार सिंह लांबा ने दान में दी थी। काफी समय तक बाबा जी मंदिर पर रहे और मां नारायणी देवी की पूजा करते रहे। एक रात बाबा अपने खड़ाऊं छोड़कर अदृश्य हो गए। तब से बाबा की खड़ाऊं मंदिर के पास रखे हैं। यहां मां नारायणी देवी की सुंदर प्रतिमा के अलावा एक शिवलिंग, नंदी और कछुए की प्रतिमा है। आईएएस अधिकारी शंभु कुमार ने नगरवासियों के सहयोग से मंदिर के समीप यज्ञशाला, प्रवचन के लिए मंच का निर्माण करवाया था। इस समय कमेटी द्वारा मंदिर के शिखर का पुनर्निर्माण चल रहा है।
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मोहल्ला मुन्नूगंज की रक्षा देवी मां की अनन्य भक्त थीं। वह मां के मंदिरों और लोगों के घरों में भजन कीर्तन करती थीं। बताते हैं कि एक रात मां ने उन्हें सपने में मंदिर बनवाने का निर्देश दिया और बताया कि वह व्यापारी श्रीभगवान माहेश्वरी की पत्नी रेवती देवी से संपर्क करें। सुबह होने पर वह रेवती देवी के घर गईं तो रेवती देवी मंदिर बनवाने के लिए सहर्ष तैयार हो गईं। दोनों महिलाएं नगर पालिका के मुन्नूगंज वार्ड सदस्य संजीव सक्सेना से मिलीं तो उन्होंने नजूल की भूमि दिखाई और मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो गया। मां के इस मंदिर में मां दुर्गा, भगवान श्री गणेश, कार्तिकेय की प्रतिमाएं और शिवलिंग स्थापित हैं। भक्तों ने रक्षा देवी के स्वर्गवास के बाद उनकी भी एक प्रतिमा स्थापित कर दी है।
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नगर में देवी मां के भक्त सिद्ध संत थे। फूल बाबा वह पत्तों की डलिया लेकर चलते थे, जिसमें फूल रहते थे। पूरे दिन बाबा फूल बांटते पर उनकी डलिया के फूल हमेशा ताजे और कभी कम नहीं होते थे। बाबाजी नारायणी देवी के परम भक्त थे। उन्होंने खुटार मार्ग पर मां नारायणी देवी का भव्य मंदिर निर्माण कराया। मां के मंदिर के लिए भूमि सरदार अवतार सिंह लांबा ने दान में दी थी। काफी समय तक बाबा जी मंदिर पर रहे और मां नारायणी देवी की पूजा करते रहे। एक रात बाबा अपने खड़ाऊं छोड़कर अदृश्य हो गए। तब से बाबा की खड़ाऊं मंदिर के पास रखे हैं। यहां मां नारायणी देवी की सुंदर प्रतिमा के अलावा एक शिवलिंग, नंदी और कछुए की प्रतिमा है। आईएएस अधिकारी शंभु कुमार ने नगरवासियों के सहयोग से मंदिर के समीप यज्ञशाला, प्रवचन के लिए मंच का निर्माण करवाया था। इस समय कमेटी द्वारा मंदिर के शिखर का पुनर्निर्माण चल रहा है।
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