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Lakhimpur Kheri News: गांव में काम न मिलने पर अक्तूबर में गए थे गन्ना छीलने

Sat, 11 May 2024 12:34 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 11 May 2024 12:34 PM IST
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Due to lack of work in the village, he went to peel sugarcane in October.
हादसे की सूचना के बाद गांव में चर्चा करते ग्रामीण। संवाद
निघासन। पीलीभीत के गजरौला के पास शुक्रवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे के बाद सिंगाही क्षेत्र के नौरंगाबाद और टांडा गांव में कोहराम मचा है। हादसे में नौरंगाबाद निवासी 10 साल की रेशमा और टांडा निवासी 30 साल की शमीना की जान चली गई। दोनों गांवों के करीब 33 लोग घायल हुए। देर रात दोनों के शव गांवों में पहुंचे, तो परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ये सभी लोग गांव में काम न मिलने पर अक्तूबर में मुरादाबाद में गन्ना छीलने गए थे।
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टांडा निवासी आबिद ने बताया कि उनके भाई इस्तियाक, छोटे भाई अल्ताफ का जाॅब कार्ड बना है। काम नहीं मिलने की वजह से भाई इस्तियाक पत्नी शमीना, बच्चे इन्तियाज, मायरा, अल्ताफ की पत्नी आजबा बानो, बेटा जमशेद व बिजली के साथ अक्टूबर में गन्ना छीलने के लिए गए थे। गन्ना सीजन में पूरा परिवार वहीं रहता है।
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गन्ने का सीजन समाप्त होने पर ये लोग डीसीएम में बैठकर मुरादाबाद से लखीमपुर खीरी आ रहे थे। असम हाईवे पर गांव बिजनौर के पास चालक को झपकी आ जाने से डीसीएम अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गई और 30 वर्षीय शमीना की मौत हो गई।
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सिंगाही थाना क्षेत्र के गांव नौरंगाबाद निवासी 10 साल की रेशमा की भी जान गई। धर्मेंद्र की पुत्री रेशमा की मौत से उसकी दादी जगराना का रो-रोकर बुरा हाल है। जगराना ने बताया कि बेटा धर्मेंद्र पत्नी नीलम और रेशमा के साथ गया था।

दोनों गावों में पसरा सन्नाटा

हादसे में दो की मौत से नौरंगाबाद और टांडा में मातमी सन्नाटा पसरा है। पूरे गांव के लोग कह रहे थे कि यदि यहां पर काम मिलता तो वे लोग मजदूरी करने बाहर नहीं। जान बच जाती। दोनों गांव के 33 से अधिक घायल हुए हैं। सभी मजदूर गन्ना छिलाई करते थे।



गन्ना सीजन में मुरादाबाद मजदूरी करने जाते हैं दोनों गांव के लोग
निघासन। हर साल गन्ना सीजन में नौरंगाबाद और टांडा गांव के सभी लोग मजदूरी करने के लिए मुरादाबाद क्षेत्र में ही जाते हैं। जॉब कार्ड बना है, लेकिन उन्हें यहां काम नहीं मिल रहा है। वहां उन्हें एक कुंतल गन्ने की छिलाई पर 50 रुपये से लेकर 80 रुपये तक मिलते हैं। खाना-रहना खर्चा भी खेत मालिक ही देते हैं। इसलिए लोग परिवार के साथ जाते हैं।

हादसे की सूचना के बाद गांव में चर्चा करते ग्रामीण। संवाद

हादसे की सूचना के बाद गांव में चर्चा करते ग्रामीण। संवाद

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