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Lakhimpur Kheri News: सूनी हुईं दुधवा की झीलें और जलाशय
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व के जलाशयों और झीलों में हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर आए प्रवासी परिंदे तीन माह का प्रवास करने के बाद अब अपने वतन लौटने लगे हैं। इस बार गर्मी देर से शुरू होने के कारण प्रवासी पक्षियों का लौटना मार्च के तीसरे सप्ताह से शुरू हुआ है। सैकड़ों पक्षियों के कई झुंड पिछले दो तीन दिन में उड़ान भर चुके हैं। जो बचे हैं वे भी जाने की तैयारी में हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, दुधवा के भादीताल के अलावा बफरजोन की मैलानी रेंज की महुरेना बीट जंगल से सटी नगरिया झील, कुकरगढ़ा में हर साल मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी आते हैं। इनका नवंबर मध्य से आना शुरू हो जाता है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में झीलों समेत सभी जलाशय रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों से गुलजार रहते हैं। इन पक्षियों की चहचहाहट से वातावरण गूंजता रहता है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी तीन माह यहां प्रवास करने के बाद फरवरी के अंत से मार्च के अंतिम सप्ताह तक प्रवासी परिंदे अपने वतन को लौट जाते हैं।
जिन दिनों यह विदेशी पक्षी यहां प्रवास करते हैं, पक्षी प्रेमियों और विशेषज्ञों के अलावा नेचर फोटोग्राफरों का जमावड़ा रहता है। जो कई-कई दिनों तक यहां रूककर पक्षियों की गतिविधियों का अध्ययन करते हैं।
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ये प्रवासी परिंदे आते हैं
दुधवा टाइगर रिजर्व की झीलों और जलाशयों में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन और लद्दाख से खूबसूरत रंग-बिरंगे पक्षी आते हैं। इसमें अबलक बतख, गुर्चिया बतख, ब्राहमानी डक, कूट मूर हेन, ग्रेलेग गूस, बार हेडेड गूस, टस्टेड डक समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में यहां आते हैं।
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गर्मी की दस्तक के साथ ही ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी परिंदों की वापसी शुरू हो गई है। दुधवा की झीलों और जलाशयों से अब तक बड़ी संख्या में प्रवासी परिंदे जा चुके हैं।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी के झादीताल, दुधवा के भादीताल के अलावा बफरजोन की मैलानी रेंज की महुरेना बीट जंगल से सटी नगरिया झील, कुकरगढ़ा में हर साल मध्य एशिया और यूरोप के ठंडे देशों से विभिन्न प्रजातियों के पक्षी आते हैं। इनका नवंबर मध्य से आना शुरू हो जाता है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में झीलों समेत सभी जलाशय रंग-बिरंगे प्रवासी परिंदों से गुलजार रहते हैं। इन पक्षियों की चहचहाहट से वातावरण गूंजता रहता है। दिसंबर, जनवरी और फरवरी तीन माह यहां प्रवास करने के बाद फरवरी के अंत से मार्च के अंतिम सप्ताह तक प्रवासी परिंदे अपने वतन को लौट जाते हैं।
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जिन दिनों यह विदेशी पक्षी यहां प्रवास करते हैं, पक्षी प्रेमियों और विशेषज्ञों के अलावा नेचर फोटोग्राफरों का जमावड़ा रहता है। जो कई-कई दिनों तक यहां रूककर पक्षियों की गतिविधियों का अध्ययन करते हैं।
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ये प्रवासी परिंदे आते हैं
दुधवा टाइगर रिजर्व की झीलों और जलाशयों में मुख्य रूप से यूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन और लद्दाख से खूबसूरत रंग-बिरंगे पक्षी आते हैं। इसमें अबलक बतख, गुर्चिया बतख, ब्राहमानी डक, कूट मूर हेन, ग्रेलेग गूस, बार हेडेड गूस, टस्टेड डक समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में यहां आते हैं।
गर्मी की दस्तक के साथ ही ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी परिंदों की वापसी शुरू हो गई है। दुधवा की झीलों और जलाशयों से अब तक बड़ी संख्या में प्रवासी परिंदे जा चुके हैं।
- ललित कुमार वर्मा, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व