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ग्लोबल टाइगर्स डे पर मुख्य कार्यक्रम करेगा दुधवा
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संजय पाठक
गोरखपुर प्राणि उद्यान समारोह का होगा मेजबान, संयोजक होंगे दुधवा के एफडी
लखीमपुर खीरी। ग्लोबल टाइगर्स डे का मुख्य कार्यक्रम उत्तर प्रदेश में इस बार गोरखपुर प्राणि उद्यान में हो रहा है। 29 जुलाई को होने वाले इस कार्यक्रम का संयोजन दुधवा टाइगर रिजर्व को सौंपा गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक कार्यक्रम के संयोजन के लिए गोरखपुर रवाना हो गए हैं।
संजय पाठक ने बताया कि प्रदेश में होने वाले ग्लोबल टाइगर्स डे की मेजबानी तो गोरखपुर प्राणि उद्यान कर रहा है, लेकिन कार्यक्रम का संयोजक दुधवा टाइगर रिजर्व को बनाया गया है। क्योंकि प्रदेश में बाघों की सर्वाधिक आबादी को सहेजने का श्रेय दुधवा टाइगर रिजर्व को है। जहां कुल 107 बाघ हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 400 बाघ होने का अनुमान है। इस तरह बाघों की कुल आबादी का 25 फीसदी से अधिक आबादी केवल दुधवा टाइगर रिजर्व में है।
उन्होंने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की एक बाघिन इन दिनों गोरखपुर प्राणि उद्यान में है। वर्ष 2013 में इस बाघिन को पकड़कर लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान भेजा गया था। मैलानी से पकड़े जाने के कारण इसका नाम मैलानी रखा गया। इसे एक साल पहले गोरखपुर चिड़ियाघर में शिफ्ट किया गया है। दरअसल यह बाघिन बचपन में हिंसक हो गई थी। परीक्षण से पता चला कि उसके पैर में चोट आ गई है। जिसके चलते वह शिकार नहीं कर पा रही है। इंसानों के लिए खतरा न बने इसके लिए उसे चिड़ियाघर में रखा गया था।
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बाघिन मैलानी के कारण दुधवा टाइगर रिजर्व का नाता गोरखपुर प्राणि उद्यान से जुड़ गया है। यह गौरव की बात है कि प्रदेश में ग्लोबल टाइगर दिवस पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम का संयोजन करने का मौका दुधवा को मिला है।
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लखीमपुर खीरी। ग्लोबल टाइगर्स डे का मुख्य कार्यक्रम उत्तर प्रदेश में इस बार गोरखपुर प्राणि उद्यान में हो रहा है। 29 जुलाई को होने वाले इस कार्यक्रम का संयोजन दुधवा टाइगर रिजर्व को सौंपा गया है। दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक कार्यक्रम के संयोजन के लिए गोरखपुर रवाना हो गए हैं।
संजय पाठक ने बताया कि प्रदेश में होने वाले ग्लोबल टाइगर्स डे की मेजबानी तो गोरखपुर प्राणि उद्यान कर रहा है, लेकिन कार्यक्रम का संयोजक दुधवा टाइगर रिजर्व को बनाया गया है। क्योंकि प्रदेश में बाघों की सर्वाधिक आबादी को सहेजने का श्रेय दुधवा टाइगर रिजर्व को है। जहां कुल 107 बाघ हैं। उत्तर प्रदेश में कुल 400 बाघ होने का अनुमान है। इस तरह बाघों की कुल आबादी का 25 फीसदी से अधिक आबादी केवल दुधवा टाइगर रिजर्व में है।
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उन्होंने बताया कि दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की एक बाघिन इन दिनों गोरखपुर प्राणि उद्यान में है। वर्ष 2013 में इस बाघिन को पकड़कर लखनऊ स्थित नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान भेजा गया था। मैलानी से पकड़े जाने के कारण इसका नाम मैलानी रखा गया। इसे एक साल पहले गोरखपुर चिड़ियाघर में शिफ्ट किया गया है। दरअसल यह बाघिन बचपन में हिंसक हो गई थी। परीक्षण से पता चला कि उसके पैर में चोट आ गई है। जिसके चलते वह शिकार नहीं कर पा रही है। इंसानों के लिए खतरा न बने इसके लिए उसे चिड़ियाघर में रखा गया था।
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बाघिन मैलानी के कारण दुधवा टाइगर रिजर्व का नाता गोरखपुर प्राणि उद्यान से जुड़ गया है। यह गौरव की बात है कि प्रदेश में ग्लोबल टाइगर दिवस पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम का संयोजन करने का मौका दुधवा को मिला है।