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दुधवा पार्क में सैलानियों को खूब हो रहे बाघ के दीदार
ब्यूरो/पलियाकलां।
Updated Thu, 17 Mar 2016 10:53 PM IST
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दुधवा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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गौरीफंटा मार्ग पर भी दिखाई दिया राहगीरों को बाघ
दुधवा में इन दिनों सैलानियों को बाघ के खूब दीदार हो रहे हैं। इसके साथ ही गौरीफंटा मार्ग पर भी एक बाघ राहगीरों को दिखाई दिया। बाघ के दीदार होने से जहां सैलानियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा वहीं राहगीर दहशत में आ गए।
गौरतलब है कि करीब एक माह से ज्यादा दुधवा कर्मियों की हड़ताल रही और इसके चलते पयर्टन भी ठप रहा। शुरुआत में सैलानी यहां आकर वापस जाते रहे और बाद में उन्होंने आना बंद कर दिया। इसके बाद कर्मियों ने प्रधान प्रमुख वन संरक्षक से वार्ता के बाद हड़ताल खत्म कर दी। इसके बाद पर्यटन शुरू हुआ। पर्यटन शुरू होने के शुरुआती दौर में तो सैलनियों की तादाद कम रही लेकिन धीरे-धीरे दुधवा में इनकी संख्या बढ़ गई। अब यहां सैलानियों को लगातार बाघों के दीदार होने लगे हैं जिससे उनके चेहरे खिल जाते हैं और फिर दुधवा आने की बात कहते हैं। लखनऊ से कारवां ग्रुप के करीब 35 बच्चों ने जंगल भ्रमण के दौरान एक बाघ को देखा तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। वहीं बनारस से दुधवा घूमने आए अजीत कुमार को भी जंगल में बाघ के दीदार हो गए फिर क्या था उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने कहा कि वह फिर दुधवा आएंगे। जंगल के साथ बाघ सड़कों पर भी दिखाई दे रहे हैं। वृहस्पतिवार को कई राहगीरों ने गौरीफंटा मार्ग के पास बाघ को देखा जो सड़क पार कर रहा था। कई तो हिम्मत कर इधर उधर के लिए निकल लिए लेकिन कई दहशत में रहकर काफी देर बाद रवाना हुए।
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दुधवा में इन दिनों सैलानियों को बाघ के खूब दीदार हो रहे हैं। इसके साथ ही गौरीफंटा मार्ग पर भी एक बाघ राहगीरों को दिखाई दिया। बाघ के दीदार होने से जहां सैलानियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा वहीं राहगीर दहशत में आ गए।
गौरतलब है कि करीब एक माह से ज्यादा दुधवा कर्मियों की हड़ताल रही और इसके चलते पयर्टन भी ठप रहा। शुरुआत में सैलानी यहां आकर वापस जाते रहे और बाद में उन्होंने आना बंद कर दिया। इसके बाद कर्मियों ने प्रधान प्रमुख वन संरक्षक से वार्ता के बाद हड़ताल खत्म कर दी। इसके बाद पर्यटन शुरू हुआ। पर्यटन शुरू होने के शुरुआती दौर में तो सैलनियों की तादाद कम रही लेकिन धीरे-धीरे दुधवा में इनकी संख्या बढ़ गई। अब यहां सैलानियों को लगातार बाघों के दीदार होने लगे हैं जिससे उनके चेहरे खिल जाते हैं और फिर दुधवा आने की बात कहते हैं। लखनऊ से कारवां ग्रुप के करीब 35 बच्चों ने जंगल भ्रमण के दौरान एक बाघ को देखा तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे। वहीं बनारस से दुधवा घूमने आए अजीत कुमार को भी जंगल में बाघ के दीदार हो गए फिर क्या था उनका खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने कहा कि वह फिर दुधवा आएंगे। जंगल के साथ बाघ सड़कों पर भी दिखाई दे रहे हैं। वृहस्पतिवार को कई राहगीरों ने गौरीफंटा मार्ग के पास बाघ को देखा जो सड़क पार कर रहा था। कई तो हिम्मत कर इधर उधर के लिए निकल लिए लेकिन कई दहशत में रहकर काफी देर बाद रवाना हुए।
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