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Lakhimpur Kheri News: दुधवा के हाथियों की अब रेडियो कॉलर से होगी निगरानी

Sat, 26 Sep 2026 11:26 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sat, 26 Sep 2026 11:26 PM IST
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Dudhwa elephants will now be monitored with radio collars
लखीमपुर खीरी/बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में नेपाल से आने वाले हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए रेडियो कॉलर लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से केरल, असम, बंगाल और कर्नाटक की तर्ज पर यह योजना बनाई जा रही है। साथ ही हाथी-मानव संघर्ष रोकने के लिए विशेष दस्तों के गठन की पहल भी की गई है।
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नेपाल के शुक्लाफांटा, बर्दिया और चितवन नेशनल पार्क से हर साल जंगली हाथियों के झुंड दुधवा टाइगर रिजर्व के बफर जोन समेत कतर्नियाघाट वन्यजीव विहार तक पहुंचते हैं। करीब चार माह के प्रवास के दौरान हाथी किसानों की धान, गन्ना और केला की फसल रौंदकर बर्बाद कर देते हैं। कई बार इंसानों पर हमला भी करते हैं।
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डीटीआर के एफडी डॉ. एच. राजामोहन ने बताया कि नेपाल के जंगलों से आने वाले प्रवासी हाथियों को यहां की आबोहवा रास आने लगी है। जंगलों में रुकने के दौरान वे फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ इंसानों पर भी हमला कर रहे हैं। इन घटनाओं को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सहयोग से समस्या से निपटने के उपाय तलाशने शुरू किए हैं। टाइगर रिजर्व प्रशासन पहले रेडियो कॉलर मगवाएगा। इसके बाद एक नर और एक मादा हाथीके गले में लगाया जाएगा।
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इससे झुंड के मुखिया समेत अन्य हाथियों की गतिविधियों, आवागमन, प्राकृतिक आवास और भोजन-पानी की स्थिति का अध्ययन किया जा सकेगा।
नेपाल के जंगलों से गणेश चतुर्थी के आसपास हाथियों के झुंड आते हैं। इससे करीब 15 दिन पहले एक नर और एक मादा टस्कर हाथी दुधवा के जंगल में पहुंचकर प्राकृतिक आवास, भोजन और सुरक्षा का जायजा लेते हैं। इसके बाद इनके संदेश के आधार पर हाथियों का दल बच्चों समेत यहां पहुंचता है।
हालांकि, हाथियों को रेडियो कॉलर लगाना चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसका प्रस्ताव तैयार कर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेजा जाएगा।
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