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किसी खतरे का संकेत तो नहीं दुधवा के जंगल में दरार
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पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के आदिवासी थारू गांव बजाही के पास जंगल की जमीन में पड़ी दरार को भविष्य में किसी खतरे के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञ दुधवा के जंगल में दरार की वजह कम बारिश और बढ़ते यूकेलिप्टस के पेड़ों की देन बता रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो ऐसी दरार जमीन सूखने के बाद अक्सर पड़ जाती हैं। पहले भी कई स्थानों पर ऐसा हो चुका है।
बजाही गांव में ज्यादातर वाशिंदे आदिवासी हैं। वह इस हादसे से काफी डरे हुए हैं। गांव वाले दुधवा की दरार को किसी बड़ी आपदा का संकेत मान रहे हैं। तेज आवाज के साथ ऐसी दरार किसी को कुछ भी सोचने के लिए मजबूर कर सकती है। जिस तरह से धरती फटने की आवाज हुई तो वह डराने वाला ही था। वन विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक यह भविष्य में किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसा हादसा जमीन सूखी होने की वजह से है। जमीन में पानी की कमी उसे खुश्क कर देती है और इस वजह से जमीन दरक जाती है। इलाके में इस बार पिछले वर्षों की तुलना में बारिश काफी कम हुई है। इससे भी उनकी बात में दम नजर आ रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन में बढ़ते यूकेलिप्टस के पेड़ों की वजह से पानी काफी कम हो रहा है। जहां पर धरती में दरार पड़ी है, वहां पास में ही यूकेलिप्टस के पेड़ का जंगल भी है। यूकेलिप्टस के पेड़ बड़े पैमाने पर पानी खींचते हैं जो कि प्रकृति के लिए काफी खतरनाक है और इससे आने वाले समय में दुधवा की जमीन में काफी बदलाव हो सकते हैं।
जमीन में दरारें पानी की कमी से अक्सर देखने को मिलती हैं। मौके पर यूकेलिप्टस के जंगल का एरिया है। पेड़ को पानी की आवश्यकता बहुत होती है।
- डॉ. संजय अरोड़ा, प्रधान भूगर्भ वैज्ञानिक, लखनऊ
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बजाही गांव में ज्यादातर वाशिंदे आदिवासी हैं। वह इस हादसे से काफी डरे हुए हैं। गांव वाले दुधवा की दरार को किसी बड़ी आपदा का संकेत मान रहे हैं। तेज आवाज के साथ ऐसी दरार किसी को कुछ भी सोचने के लिए मजबूर कर सकती है। जिस तरह से धरती फटने की आवाज हुई तो वह डराने वाला ही था। वन विभाग के विशेषज्ञों के मुताबिक यह भविष्य में किसी बड़े खतरे का संकेत हो सकता है। ऐसा हादसा जमीन सूखी होने की वजह से है। जमीन में पानी की कमी उसे खुश्क कर देती है और इस वजह से जमीन दरक जाती है। इलाके में इस बार पिछले वर्षों की तुलना में बारिश काफी कम हुई है। इससे भी उनकी बात में दम नजर आ रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जमीन में बढ़ते यूकेलिप्टस के पेड़ों की वजह से पानी काफी कम हो रहा है। जहां पर धरती में दरार पड़ी है, वहां पास में ही यूकेलिप्टस के पेड़ का जंगल भी है। यूकेलिप्टस के पेड़ बड़े पैमाने पर पानी खींचते हैं जो कि प्रकृति के लिए काफी खतरनाक है और इससे आने वाले समय में दुधवा की जमीन में काफी बदलाव हो सकते हैं।
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जमीन में दरारें पानी की कमी से अक्सर देखने को मिलती हैं। मौके पर यूकेलिप्टस के जंगल का एरिया है। पेड़ को पानी की आवश्यकता बहुत होती है।
- डॉ. संजय अरोड़ा, प्रधान भूगर्भ वैज्ञानिक, लखनऊ