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दुधवा की लाइफ लाइन सुहेली की हो सकती है डिसिल्टिंग
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 03 Feb 2018 06:34 PM IST
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suheli river
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इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दुधवा नेशनल पार्क आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। अगर ऐसा होता है तो दुधवा की लाइफ लाइन कही जाने वाली सुहेली नदी की डिसिल्टिंग की आस अब लोगों में बढ़ गई है। विधायक रोमी भी मुख्यमंत्री को इससे अवगत करा चुके हैं, लेकिन सर्वे को छोड़ अभी तक कोई भी काम शुरू नहीं हुआ।
सुहेली के सूखे होने से जंगली जीवों को पानी की तकलीफ तो है ही, साथ ही हजारों एकड़ खेती इससे प्रभावित होकर बंजर होने की कगार पर है। जिम्मेदारों के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते दुधवा नेशनल पार्क की लाइफ लाइन कही जाने वाली सुहेली नदी सालों पहले अपना वजूद खो चुकी है। सिल्ट सफाई न होने से सुहेली पुल से पर्वतिया घाट तक करीब दस किलोमीटर में नदी ने रेत का टीला बना दिया है और रुख मोड़ कर नकउवा नाले को चली गई, जिससे नेशनल पार्क के जीवों को करीब 50 प्रतिशत पानी की पूर्ति नहीं हो पा रही, तो वहीं नदी किनारे गांवों के हजारों एकड़ खेत बंजर हो रहे हैं। लोगों ने चंदा कर नदी खुदवाने का प्रयास किया तो वन विभाग की एनओसी आड़े आ गई।
लोगों के कहने पर विधायक रोमी साहनी ने मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचाया और सर्वे भी हुआ, लेकिन कोई काम शुरू नहीं हो पाया। सांसद अजय मिश्र टेनी के साथ ही बीते दिनों दुधवा भ्रमण को आए वन राज्यमंत्री उपेन्द्र तिवारी ने भी इस समस्या को गंभीर माना था और मुख्यमंत्री को अवगत कराने की बात भी कही थी। अब नौ फरवरी से दुधवा में इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल होने जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री के आने की संभावना जताई जा रही है। इसी को लेकर अब इलाके के किसानों की आस मुख्यमंत्री से लग गई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री की नजर इस गंभीर समस्या पर पड़ती है तो हजारों एकड़ बंजर हो रही जमीन फिर से उपजाऊ हो जाएगी।
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आयोजन स्थल के पास बहती है नदी
सुहेली नदी की अगर बात करें तो जहां पर इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल होने जा रहा है उससे कुछ ही दूरी पर सुहेली नदी बहती है। इसी को लेकर आयोजन स्थल के चारों तरफ खाई भी खोदी गई है, जिससे जंगली जानवर आयोजन स्थल की ओर न आ सकें।
सिल्ट के कारण सूखी नदी दुर्लभ जीव नहीं करते रुख
दुधवा नेशनल पार्क के दुर्लभ वन्यजीव गर्मी के दिनों में पानी की तलाश में दूसरे इलाकों में भाग जाते हैं। सिल्ट के कारण सूखी नदी का रुख वन्यजीव भी नहीं करते हैं और पानी की तलाश में कभी-कभार बाहर भी आ जाते हैं, जिससे उन पर शिकार का खतरा मंडराने लगता है।
बर्ड फेस्टिवल की तैयारियों से ही लोगों को लगने लगा है कि मुख्यमंत्री यहां जरूर आएंगे, जिससे लोगों को कई उम्मीदें बंधी हैं। फिलहाल, सुहेली नदी की डिसिल्टिंग की एनओसी के लिए पत्राचार किया जा चुका है। यदि सुहेली की सफाई के लिए कोई परियोजना को मंजूरी मिलती है तो यहां के किसानों के साथ वन्य जंतुओं का भी भला होगा।
-महावीर कौजलगि, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व
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सुहेली के सूखे होने से जंगली जीवों को पानी की तकलीफ तो है ही, साथ ही हजारों एकड़ खेती इससे प्रभावित होकर बंजर होने की कगार पर है। जिम्मेदारों के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते दुधवा नेशनल पार्क की लाइफ लाइन कही जाने वाली सुहेली नदी सालों पहले अपना वजूद खो चुकी है। सिल्ट सफाई न होने से सुहेली पुल से पर्वतिया घाट तक करीब दस किलोमीटर में नदी ने रेत का टीला बना दिया है और रुख मोड़ कर नकउवा नाले को चली गई, जिससे नेशनल पार्क के जीवों को करीब 50 प्रतिशत पानी की पूर्ति नहीं हो पा रही, तो वहीं नदी किनारे गांवों के हजारों एकड़ खेत बंजर हो रहे हैं। लोगों ने चंदा कर नदी खुदवाने का प्रयास किया तो वन विभाग की एनओसी आड़े आ गई।
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लोगों के कहने पर विधायक रोमी साहनी ने मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचाया और सर्वे भी हुआ, लेकिन कोई काम शुरू नहीं हो पाया। सांसद अजय मिश्र टेनी के साथ ही बीते दिनों दुधवा भ्रमण को आए वन राज्यमंत्री उपेन्द्र तिवारी ने भी इस समस्या को गंभीर माना था और मुख्यमंत्री को अवगत कराने की बात भी कही थी। अब नौ फरवरी से दुधवा में इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल होने जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री के आने की संभावना जताई जा रही है। इसी को लेकर अब इलाके के किसानों की आस मुख्यमंत्री से लग गई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री की नजर इस गंभीर समस्या पर पड़ती है तो हजारों एकड़ बंजर हो रही जमीन फिर से उपजाऊ हो जाएगी।
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आयोजन स्थल के पास बहती है नदी
सुहेली नदी की अगर बात करें तो जहां पर इंटरनेशनल बर्ड फेस्टिवल होने जा रहा है उससे कुछ ही दूरी पर सुहेली नदी बहती है। इसी को लेकर आयोजन स्थल के चारों तरफ खाई भी खोदी गई है, जिससे जंगली जानवर आयोजन स्थल की ओर न आ सकें।
सिल्ट के कारण सूखी नदी दुर्लभ जीव नहीं करते रुख
दुधवा नेशनल पार्क के दुर्लभ वन्यजीव गर्मी के दिनों में पानी की तलाश में दूसरे इलाकों में भाग जाते हैं। सिल्ट के कारण सूखी नदी का रुख वन्यजीव भी नहीं करते हैं और पानी की तलाश में कभी-कभार बाहर भी आ जाते हैं, जिससे उन पर शिकार का खतरा मंडराने लगता है।
बर्ड फेस्टिवल की तैयारियों से ही लोगों को लगने लगा है कि मुख्यमंत्री यहां जरूर आएंगे, जिससे लोगों को कई उम्मीदें बंधी हैं। फिलहाल, सुहेली नदी की डिसिल्टिंग की एनओसी के लिए पत्राचार किया जा चुका है। यदि सुहेली की सफाई के लिए कोई परियोजना को मंजूरी मिलती है तो यहां के किसानों के साथ वन्य जंतुओं का भी भला होगा।
-महावीर कौजलगि, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व