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पानी में जहर घोल रहा चीनी मिल का औद्योगिक कचरा
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 25 May 2018 12:47 AM IST
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क्षेत्र की गोविंद शुगर मिल नदियों के अलावा भूगर्भीय जल में भी जहर घोल रही है। चीनी मिल के संयंत्रों से निकलने वाला जहरीला पानी जीवन दायनी शारदा और घाघरा नदियों के पानी को तो जहरीला बना ही रही है, साथ ही भूगर्भीय जल को भी प्रदूषित कर रहा है। चिमनियों से निकलने वाली राख हवाओं को भी प्रदूषित कर रही है। इससे क्षेत्र के लोग अनेक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निरीक्षण में यह चीनी मिल मापदंडों पर खरी नही उतर पायी। यहां लगे जल शोधक संयंत्र सफेद हाथी साबित हो रहे हैं।
गोविंद शुगर मिल ऐरा से निकलने वाला गंदा और प्रदूषित पानी खमरिया चीनी मिल से तीन किलोमीटर दूर दहौरा नाला में गिरता है। यह नाला दिलावलपुर, समैसा गांव से निकलता हुआ शारदानदी में मिलता है। यह नदी आगे चल कर घाघरा नदी और सरयू नदी में मिलती है। इस तरह चीनी मिल से निकलने वाला यह पानी जीवन दायनी शारदा, घाघरा, सरयू नदी को प्रदूषित कर रहा है। चीनी मिल से निकलने वाले कचरा युक्त प्रदूषित पानी से जानवर तो बीमार पड़ ही रहे है, इसका असर मानव जीवन पर भी पड़ रहा है। इस प्रदूषित जल की वजह से लोगों को त्वचा संबंधी बीमारियां हो रही हैं। दूसरी तरफ चीनी मिल की चिमनियों की राख खमरिया, ऐरा समेत कई गांवों की फिजां को जहरीला बना रही हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिली भारी खामियां
तीन मई को जारी किया था कारण बताओ नोटिस
धौरहरा। जन शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गोविंद शुगर मिल की जांच की तो उसमें कई खामियां मिलीं। बोर्ड ने तीन मई को ऐरा चीनी मिल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लालपुर गांव निवासी रामेंद्र कुमार शुक्ला की शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता आशुतोष पांडेय और अमित मिश्रा समेत तीन लोगों ने जांच की थी। निरीक्षण के दौरान बोर्ड के अधिकारियों को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बंद मिला। मिल से निकला गंदा पानी पड़ोस के दहौरा नाले में जा रहा है। अधिकारियों ने डिस्चार्ज वाटर के इनलेट और आउटलेट प्वांइट से सैंपलिंग करके जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा। जांच करने गई टीम को पीएच मॉनीटर का डिस्प्ले भी बंद मिला। अबतक चीनी मिल की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जवाब नही दिया गया है।
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जल प्रदूषण के चलते बढ़ रही आर्सेनिक की मात्रा
धौरहरा। बढ़ते जल प्रदूषण के चलते भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो रहा है। यह पानी ऐरा चीनी मिल से सरैया तक तो पाइप लाइन के जरिए अंडरग्राउंड निकलता है फिर खुला प्रदूषित जल दिलावलपुर, समैसा, सरैंया, मटरिया, लालपुर, अल्लीपुर, बसढ़िया, चौरा, अंधपुर दरिगापुर, कोला सिंगावर आदि गांवों से गुजरता हुआ सीधा शारदानदी में गिरता है। जो शारदा नदी से घाघरा और फिर सरयू नदी को प्रभावित करता है नतीजतन इस इलाके में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा बढ़ रही है। यदि यही स्थित रही तो आने वाले दिनों में नलों से जहरीला पानी ही निकलेगा। पूर्व विधायक शमशेर बहादुर कहते है कि चीनी मिल जल शोधन के बाद पाइप लाइन के जरिए नदी में पानी छोडे़ तो काफी राहत होगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार मिल अधिकारी
गोविंद शुगर मिल के सुरक्षा एवं पर्यावरण मैनेजर अमित सिंह कहते है कि मिल में जल संशोधक संयंत्र लगे हैं जो काम कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नोटिस मेरी जानकारी में नहीं है।
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गोविंद शुगर मिल ऐरा से निकलने वाला गंदा और प्रदूषित पानी खमरिया चीनी मिल से तीन किलोमीटर दूर दहौरा नाला में गिरता है। यह नाला दिलावलपुर, समैसा गांव से निकलता हुआ शारदानदी में मिलता है। यह नदी आगे चल कर घाघरा नदी और सरयू नदी में मिलती है। इस तरह चीनी मिल से निकलने वाला यह पानी जीवन दायनी शारदा, घाघरा, सरयू नदी को प्रदूषित कर रहा है। चीनी मिल से निकलने वाले कचरा युक्त प्रदूषित पानी से जानवर तो बीमार पड़ ही रहे है, इसका असर मानव जीवन पर भी पड़ रहा है। इस प्रदूषित जल की वजह से लोगों को त्वचा संबंधी बीमारियां हो रही हैं। दूसरी तरफ चीनी मिल की चिमनियों की राख खमरिया, ऐरा समेत कई गांवों की फिजां को जहरीला बना रही हैं।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को मिली भारी खामियां
तीन मई को जारी किया था कारण बताओ नोटिस
धौरहरा। जन शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गोविंद शुगर मिल की जांच की तो उसमें कई खामियां मिलीं। बोर्ड ने तीन मई को ऐरा चीनी मिल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। लालपुर गांव निवासी रामेंद्र कुमार शुक्ला की शिकायत पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक पर्यावरण अभियंता आशुतोष पांडेय और अमित मिश्रा समेत तीन लोगों ने जांच की थी। निरीक्षण के दौरान बोर्ड के अधिकारियों को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बंद मिला। मिल से निकला गंदा पानी पड़ोस के दहौरा नाले में जा रहा है। अधिकारियों ने डिस्चार्ज वाटर के इनलेट और आउटलेट प्वांइट से सैंपलिंग करके जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा। जांच करने गई टीम को पीएच मॉनीटर का डिस्प्ले भी बंद मिला। अबतक चीनी मिल की ओर से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जवाब नही दिया गया है।
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जल प्रदूषण के चलते बढ़ रही आर्सेनिक की मात्रा
धौरहरा। बढ़ते जल प्रदूषण के चलते भूगर्भ जल भी प्रदूषित हो रहा है। यह पानी ऐरा चीनी मिल से सरैया तक तो पाइप लाइन के जरिए अंडरग्राउंड निकलता है फिर खुला प्रदूषित जल दिलावलपुर, समैसा, सरैंया, मटरिया, लालपुर, अल्लीपुर, बसढ़िया, चौरा, अंधपुर दरिगापुर, कोला सिंगावर आदि गांवों से गुजरता हुआ सीधा शारदानदी में गिरता है। जो शारदा नदी से घाघरा और फिर सरयू नदी को प्रभावित करता है नतीजतन इस इलाके में आर्सेनिक की मात्रा ज्यादा बढ़ रही है। यदि यही स्थित रही तो आने वाले दिनों में नलों से जहरीला पानी ही निकलेगा। पूर्व विधायक शमशेर बहादुर कहते है कि चीनी मिल जल शोधन के बाद पाइप लाइन के जरिए नदी में पानी छोडे़ तो काफी राहत होगी।
क्या कहते हैं जिम्मेदार मिल अधिकारी
गोविंद शुगर मिल के सुरक्षा एवं पर्यावरण मैनेजर अमित सिंह कहते है कि मिल में जल संशोधक संयंत्र लगे हैं जो काम कर रहे हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नोटिस मेरी जानकारी में नहीं है।