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Lakhimpur Kheri News: हसनापुर बी-पैक्स में 70 बोरी एनपीके का अंतर, नोटिस जारी
Sat, 08 Aug 2026 11:08 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 08 Aug 2026 11:08 PM IST
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धौरहरा। खाद की कमी और कथित कालाबाजारी की शिकायतों के बीच हसनापुर बी-पैक्स के सत्यापन में पीओएस मशीन और मौके के स्टॉक में एनपीके की 70 बोरी का अंतर मिला। इस पर जिला कृषि अधिकारी/उर्वरक निरीक्षक ने सात अगस्त को बी-पैक्स को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है।
नोटिस के अनुसार, संयुक्त टीम ने उर्वरक परिसर का निरीक्षण कर पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक का मौके के स्टॉक से मिलान किया। इसमें एनपीके की 70 बोरी का अंतर मिला। इसके बाद किसानों ने बी-पैक्स से अब तक वितरित यूरिया, डीएपी और एनपीके का पूरा रिकॉर्ड खंगालने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अभिलेखों में जिन किसानों के नाम खाद वितरण दिखाया गया है, उनका सत्यापन कराया जाए कि उन्हें वास्तव में खाद मिली या नहीं।
किसान राम लखन, रमजान, शिवपल आदि ने कहा कि समितियों के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें खाद नहीं मिल पाती। एक सचिव को कई समितियों की जिम्मेदारी दिए जाने से निगरानी और पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। खाद को प्रभावशाली लोगों के माध्यम से क्षेत्र से बाहर और नेपाल तक पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं।
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एआर कोऑपरेटिव प्रवीण कुमार ने बताया कि 70 बोरी के अंतर का मामला अनियमितता नहीं है। उनके अनुसार स्टॉक में मौजूद एनपीके का रेट 1470 रुपये है, जबकि पीओएस मशीन पर 1900 रुपये का रेट दर्ज है। ऐसे में मशीन पर स्टॉक खारिज नहीं हो सका। सचिव ने इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने सचिव को किसानों से 1470 रुपये लेने और मशीन पर 1900 रुपये दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसे अनियमितता नहीं माना।
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नोटिस के अनुसार, संयुक्त टीम ने उर्वरक परिसर का निरीक्षण कर पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक का मौके के स्टॉक से मिलान किया। इसमें एनपीके की 70 बोरी का अंतर मिला। इसके बाद किसानों ने बी-पैक्स से अब तक वितरित यूरिया, डीएपी और एनपीके का पूरा रिकॉर्ड खंगालने की मांग की है। किसानों का कहना है कि अभिलेखों में जिन किसानों के नाम खाद वितरण दिखाया गया है, उनका सत्यापन कराया जाए कि उन्हें वास्तव में खाद मिली या नहीं।
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किसान राम लखन, रमजान, शिवपल आदि ने कहा कि समितियों के चक्कर लगाने के बाद भी उन्हें खाद नहीं मिल पाती। एक सचिव को कई समितियों की जिम्मेदारी दिए जाने से निगरानी और पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। खाद को प्रभावशाली लोगों के माध्यम से क्षेत्र से बाहर और नेपाल तक पहुंचाए जाने के आरोप भी लगाए जाते रहे हैं।
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एआर कोऑपरेटिव प्रवीण कुमार ने बताया कि 70 बोरी के अंतर का मामला अनियमितता नहीं है। उनके अनुसार स्टॉक में मौजूद एनपीके का रेट 1470 रुपये है, जबकि पीओएस मशीन पर 1900 रुपये का रेट दर्ज है। ऐसे में मशीन पर स्टॉक खारिज नहीं हो सका। सचिव ने इसकी जानकारी दी थी। उन्होंने सचिव को किसानों से 1470 रुपये लेने और मशीन पर 1900 रुपये दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसे अनियमितता नहीं माना।