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समय पर नहीं हुआ भुगतान, ब्याज के हकदार हुए किसान
अमित गुप्ता/लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 19 Oct 2015 05:55 PM IST
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चीनी मिलों ने इस बार भी निर्धारित समय पर किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है, जिससे मिलों पर बकाया गन्ना मूल्य के साथ ही ब्याज की देनदारी बन गई हैै। जिले में संचालित नौ चीनी मिलों में से आठ मिलों पर 73.57 करोड़ रुपये ब्याज बन गया है, जिसे जोड़कर मिलों पर 342 करोड़ की देनदारी बन गई है। गन्ना विभाग ने बकाया गन्ना मूल्य के साथ ही ब्याज की रकम जोड़कर लिस्ट तैयार की है।
हाईकोर्ट ने दो बार निर्णय सुनाते हुए किसानों के हक में जून 2015 तक बकाया गन्ना मुल्य भुगतान के आदेश दिए थे। इसके बावजूद चीनी मिलों ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद एक बार फिर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए चीनी मिलों को तय समय में भुगतान करने के आदेश दिए थे। साथ ही आदेेश का अनुपालन न करने वाले मिल अध्यासियों और गन्ना आयुक्त के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए थे। वहीं शासन-प्रशासन को मिलकर आदेश का अनुपालन सुनिश्चत कराना था, जो अमल नहीं करा सके। एसएपी की दर से अजबापुर चीनी मिल ने संपूर्ण बकाया भुगतान कर दिया है, जिससे इस मिल पर ब्याज की रकम शून्य है। जबकि अन्य आठ मिलों पर गन्ना एक्ट के मुताबिक करोड़ों रुपये ब्याज की देनदारी बन गई है। किसान संगठन भी गन्ना एक्ट के मुताबिक किसानों को ब्याज दिलाने की मांग उठा चुके हैं। लिहाजा गन्ना विभाग ने भी विलंबित अवधि पर ब्याज की रकम बकाया गन्ना मूल्य भुगतान में जोड़ी है। हालांकि ब्याज के भुगतान को लेकर संशय बरकरार है, क्योंकि पिछले वर्षों में भी मिलों ने ब्याज का भुगतान नहीं किया है।
--
मिलवार ब्याज की स्थिति (लाख में)
गोला 1760.85
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पलिया 2034.97
खंभारखेड़ा 1275.70
ऐरा 803.18
कुंभी 323.28
गुलरिया 346.24
बेलरायां 393.29
संपूर्णानगर 419.98
बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान तेज गति से कराया जा रहा है। आठ चीनी मिलों पर बकाया मूल्य के सापेक्ष ब्याज की रकम गणना की हैै, जिसकी रिपोर्ट गन्ना आयुक्त को भेजी गई है। उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुसार ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी
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हाईकोर्ट ने दो बार निर्णय सुनाते हुए किसानों के हक में जून 2015 तक बकाया गन्ना मुल्य भुगतान के आदेश दिए थे। इसके बावजूद चीनी मिलों ने भुगतान नहीं किया। इसके बाद एक बार फिर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए चीनी मिलों को तय समय में भुगतान करने के आदेश दिए थे। साथ ही आदेेश का अनुपालन न करने वाले मिल अध्यासियों और गन्ना आयुक्त के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने के आदेश दिए थे। वहीं शासन-प्रशासन को मिलकर आदेश का अनुपालन सुनिश्चत कराना था, जो अमल नहीं करा सके। एसएपी की दर से अजबापुर चीनी मिल ने संपूर्ण बकाया भुगतान कर दिया है, जिससे इस मिल पर ब्याज की रकम शून्य है। जबकि अन्य आठ मिलों पर गन्ना एक्ट के मुताबिक करोड़ों रुपये ब्याज की देनदारी बन गई है। किसान संगठन भी गन्ना एक्ट के मुताबिक किसानों को ब्याज दिलाने की मांग उठा चुके हैं। लिहाजा गन्ना विभाग ने भी विलंबित अवधि पर ब्याज की रकम बकाया गन्ना मूल्य भुगतान में जोड़ी है। हालांकि ब्याज के भुगतान को लेकर संशय बरकरार है, क्योंकि पिछले वर्षों में भी मिलों ने ब्याज का भुगतान नहीं किया है।
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मिलवार ब्याज की स्थिति (लाख में)
गोला 1760.85
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पलिया 2034.97
खंभारखेड़ा 1275.70
ऐरा 803.18
कुंभी 323.28
गुलरिया 346.24
बेलरायां 393.29
संपूर्णानगर 419.98
बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान तेज गति से कराया जा रहा है। आठ चीनी मिलों पर बकाया मूल्य के सापेक्ष ब्याज की रकम गणना की हैै, जिसकी रिपोर्ट गन्ना आयुक्त को भेजी गई है। उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुसार ही कोई कार्रवाई की जाएगी।
-जगदीश चंद्र यादव, जिला गन्ना अधिकारी