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बाढ़ प्रभावित गांवों में फैला डायरिया, एक की मौत
अमर उजाला ब्यूरो निघासन (खीरी)।
Updated Wed, 03 Aug 2016 09:57 PM IST
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डायरिया
- फोटो : अमर उजाला
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- बाढ़ से निपटने के प्रशासन के दावे फेल
- बाढ़ क्षेत्र में नहीं पहुंच रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
- झोलाछाप डाक्टरों से इलाज करा रहे हैं पीड़ित
बाढ़ प्रभावित गांवों में फैला डायरिया से करीब एक दर्जन से अधिक लोग बीमार हैं। भदुरहिया गांव में डायरिया के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी नहीं पहुंच रही हैं। छेदुई पतिया का उपस्वास्थ्य केंद्र बंद पड़ा है। बाढ़ पीड़ित झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं।
भदुरहिया, गदियाना छुदुई आदि गांवों में चार दिनों से बाढ़ का पानी भरा रहने से गांवों में डायरिया ने अपने पांव पसार लिए हैं। खाने और पीने का शुद्ध पानी न मिलने के कारण बीमारी बढ़ती जा रही है। बीमार हुए लोगों को किसी तरह ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर प्राइवेट डाक्टर के यहां इलाज करा रहे हैं। यह बीमारी भदुरहिया निवासी छोटकन्नी (55) पत्नी इब्राहिम, रईस पुत्र कल्लू (30) करमा बानो (32) पत्नी शमसुल, सद्दीक (50) को उल्टी दस्त चालू हुई। सभी को पतिया में झोलाछाप के यहां भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान सद्दीक की मौत हो गई। उधर, मोतीपुरवा निवासी खुशीराम (30), देवतादीन (40), ढखवा निवासी अमर जहां (25), चुन्ना (30) पुत्र इरफान, सलमान (25) पुत्र इरफान, समीम (26) उल्टी दस्त और बुखार से परेशान हैं। आरोप है कि छेदुई पतिया में बने उपकेंद्र का कई दिनों से ताला नहीं खुला हैं। सीएचसी प्रभारी लालजी पासी ने बताया कि बीमारी की जानकारी मिली है। गांवों में दवा वितरण के लिए टीमें भेजी जांएगी। छेदुई पतिया उपकेंद्र में कोई भी डाक्टर नहीं है। वहां पर एएनम को भेजा जा रहा है।
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- बाढ़ क्षेत्र में नहीं पहुंच रही स्वास्थ्य विभाग की टीम
- झोलाछाप डाक्टरों से इलाज करा रहे हैं पीड़ित
बाढ़ प्रभावित गांवों में फैला डायरिया से करीब एक दर्जन से अधिक लोग बीमार हैं। भदुरहिया गांव में डायरिया के चलते एक व्यक्ति की मौत हो गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी नहीं पहुंच रही हैं। छेदुई पतिया का उपस्वास्थ्य केंद्र बंद पड़ा है। बाढ़ पीड़ित झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने को मजबूर हैं।
भदुरहिया, गदियाना छुदुई आदि गांवों में चार दिनों से बाढ़ का पानी भरा रहने से गांवों में डायरिया ने अपने पांव पसार लिए हैं। खाने और पीने का शुद्ध पानी न मिलने के कारण बीमारी बढ़ती जा रही है। बीमार हुए लोगों को किसी तरह ट्रैक्टर-ट्रॉली पर लादकर प्राइवेट डाक्टर के यहां इलाज करा रहे हैं। यह बीमारी भदुरहिया निवासी छोटकन्नी (55) पत्नी इब्राहिम, रईस पुत्र कल्लू (30) करमा बानो (32) पत्नी शमसुल, सद्दीक (50) को उल्टी दस्त चालू हुई। सभी को पतिया में झोलाछाप के यहां भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान सद्दीक की मौत हो गई। उधर, मोतीपुरवा निवासी खुशीराम (30), देवतादीन (40), ढखवा निवासी अमर जहां (25), चुन्ना (30) पुत्र इरफान, सलमान (25) पुत्र इरफान, समीम (26) उल्टी दस्त और बुखार से परेशान हैं। आरोप है कि छेदुई पतिया में बने उपकेंद्र का कई दिनों से ताला नहीं खुला हैं। सीएचसी प्रभारी लालजी पासी ने बताया कि बीमारी की जानकारी मिली है। गांवों में दवा वितरण के लिए टीमें भेजी जांएगी। छेदुई पतिया उपकेंद्र में कोई भी डाक्टर नहीं है। वहां पर एएनम को भेजा जा रहा है।
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