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धान क्रय केंद्रों के आवंटन में झोल, तभी केंद्र प्रभारी कर पाएंगे खेल
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लखीमपुर खीरी। सरकारी धान क्रय केंद्रों के आवंटन में भी धांधली हुई है। मनमाने तरीके से क्रय केंद्रों को इधर-उधर शिफ्ट किया गया है। गांवों में केंद्र खोलने के नाम पर मंजूरी लेकर उन्हें दूसरे स्थानों पर खोला गया है। ऐसे ही ग्रामीण क्षेत्र के दो क्रय केंद्रों को लखीमपुर की राजापुर मंडी में खोला गया है। वहीं एक एजेंसी ने एक केंद्र प्रभारी को दो क्रय केंद्र आवंटित कर दिए हैं, जिनके बीच की दूरी करीब 90 किमी है। ऐसे में दोनों जगह एक केंद्र प्रभारी कैसे खरीद कर सकता हैै।
किसानों से सीधे धान खरीदने के लिए कुल 115 क्रय केंद्र खोलने को मंजूरी मिली है। पिछले वर्षों में क्रय केंद्रों पर हुई गड़बड़ियों के बावजूद अफसरों ने सबक नहीं लिया है। बल्कि गड़बड़ियों के लिए खुद ही रास्ता बना रहे हैैं। यूपी कोआपरेटिव फेडरेशन ने लखपेड़ागंज में स्वीकृत क्रय केंद्र को लखीमपुर की राजापुर मंडी में खोला है। इससे लखपेड़ागंज एवं उसके आसपास के किसानों को 20 किमी दूरी तय करके राजापुर मंडी आना होगा। इसी तरह यूपी कोआपरेटिव यूनियन ने फूलबेहड़ में स्वीकृत क्रय केंद्र को लखीमपुर मंडी में खोला है। जबकि फूलबेहड़ ब्लाक मुख्यालय है, जो लखीमपुर मंडी से करीब 18 किमी दूर है। इससे फूलबेहड़ क्षेत्र के किसानों को असुविधा होगी। इसके अलावा क्रय केंद्रों के आवंटन में खेल किया गया है। मसलन एक केंद्र प्रभारी को दो क्रय केंद्रों का जिम्मा दिया गया है। खास बात यह है कि दोनों क्रय केंद्रों के बीच की दूरी दो-चार किमी नहीं बल्कि 90 किमी का अंतर है। ऐसे में एक केंद्र प्रभारी दो केंद्रों पर कैसे खरीद कर सकता है। सूत्रों की माने तो प्राइवेट आदमियों को लगाकर खरीद की जाती है। ऐसा होने पर किसानों का शोषण होता है।
ज्यादातर साधन सहकारी समितियों में प्रस्तावित क्रय केेंद्रों को दूसरे स्थानों पर खोले जाने के मामले सामने आए हैं। स्वीकृत स्थल के बजाय दूसरे स्थान पर केंद्र खोलने के लिए एट शब्द का प्रयोग करके पहले वाले स्थान का नाम अंकित किया जाता है। इसके लिए संबंधित एजेंसियां व्यवस्थाओं का हवाला देती हैैं। इन केंद्रों पर विशेष नजर रखी जाएगी। यदि एक केंद्र प्रभारी को दो केंद्र दिए गए हैं तो मामले की जांच की जाएगी। -लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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किसानों से सीधे धान खरीदने के लिए कुल 115 क्रय केंद्र खोलने को मंजूरी मिली है। पिछले वर्षों में क्रय केंद्रों पर हुई गड़बड़ियों के बावजूद अफसरों ने सबक नहीं लिया है। बल्कि गड़बड़ियों के लिए खुद ही रास्ता बना रहे हैैं। यूपी कोआपरेटिव फेडरेशन ने लखपेड़ागंज में स्वीकृत क्रय केंद्र को लखीमपुर की राजापुर मंडी में खोला है। इससे लखपेड़ागंज एवं उसके आसपास के किसानों को 20 किमी दूरी तय करके राजापुर मंडी आना होगा। इसी तरह यूपी कोआपरेटिव यूनियन ने फूलबेहड़ में स्वीकृत क्रय केंद्र को लखीमपुर मंडी में खोला है। जबकि फूलबेहड़ ब्लाक मुख्यालय है, जो लखीमपुर मंडी से करीब 18 किमी दूर है। इससे फूलबेहड़ क्षेत्र के किसानों को असुविधा होगी। इसके अलावा क्रय केंद्रों के आवंटन में खेल किया गया है। मसलन एक केंद्र प्रभारी को दो क्रय केंद्रों का जिम्मा दिया गया है। खास बात यह है कि दोनों क्रय केंद्रों के बीच की दूरी दो-चार किमी नहीं बल्कि 90 किमी का अंतर है। ऐसे में एक केंद्र प्रभारी दो केंद्रों पर कैसे खरीद कर सकता है। सूत्रों की माने तो प्राइवेट आदमियों को लगाकर खरीद की जाती है। ऐसा होने पर किसानों का शोषण होता है।
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ज्यादातर साधन सहकारी समितियों में प्रस्तावित क्रय केेंद्रों को दूसरे स्थानों पर खोले जाने के मामले सामने आए हैं। स्वीकृत स्थल के बजाय दूसरे स्थान पर केंद्र खोलने के लिए एट शब्द का प्रयोग करके पहले वाले स्थान का नाम अंकित किया जाता है। इसके लिए संबंधित एजेंसियां व्यवस्थाओं का हवाला देती हैैं। इन केंद्रों पर विशेष नजर रखी जाएगी। यदि एक केंद्र प्रभारी को दो केंद्र दिए गए हैं तो मामले की जांच की जाएगी। -लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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