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फैक्ट्री में तो धान नहीं बनता साहब, कब तक नमी की आड़ में किसानों का होगा शोषण
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लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद का एक माह से अधिक समय निकल चुका है, लेकिन ज्यादातर केंद्र प्रभारी धान की नमी को अपनी ढाल बनाए हैं। जबकि मंडियों में 12-12 लाख रुपये खर्च करके धान सुखाने के लिए ड्रायर मशीनें लगाई जा चुकी हैं। हैरानी की बात है कि पिछले वर्ष भी एक किसान का धान इस मशीन में नहीं सुखाया गया और न ही इस वर्ष इन मशीनों का उपयोग किया गया। जबकि इसमें धान सुखाने के लिए किसानों को कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है और न ही क्रय केंद्र प्रभारी को कोई चार्ज देना है। मंडी परिषद ने किसानों और क्रय केंद्र प्रभारी की सुविधा के लिए लखीमपुर और गोला मंडी में ड्रायर मशीनें लगाई हैं।
इस सीजन में धान खरीद का जायजा लेने के लिए खाद्य आयुक्त, संभागीय खाद्य नियंत्रक, पीसीएफ के प्रबंध निदेशक समेत कई आला अधिकारी राजापुर मंडी का दौरा कर चुके हैं। इसके बाद भी ड्रायर मशीन का उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि क्रय केंद्र के प्रभारियों और एजेंसी के जिला प्रबंधकों ने धान में नमी अधिक होने का रटा रटाया जवाब देकर अपनी गर्दन बचाई है। यही वजह है कि मंडी के क्रय केंद्रों पर सिर्फ एक-दो किसानों से धान खरीदे जाने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सोमवार को खाद्य आयुक्त ने वीडियो कांफ्रेंसिंग कर धान की खरीद की समीक्षा की, जिसमें कम खरीद के बावत अधिकारियों ने नमी का रोना रोया। साथ ही ड्रायर मशीन के चालू न होने की बात कही है। वहीं मंडी सचिव रामबाबू शर्मा ने कहा है कि ड्रायर मशीन चालू है और आपरेटर भी रखा है। अब केंद्र प्रभारी की जिम्मेदारी है कि वह किसान का धान ड्रायर मशीन में सुखाकर धान खरीद सुनिश्चित करें। उधर, जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने कहा कि मंडी सचिव ड्रायर के चालू होने की बात कहते हैं, लेकिन मौके पर कोई आपरेटर नहीं है। किसान और केंद्र प्रभारी को ड्रायर मशीन चलाने की जानकारी नहीं है।
महेवागंज। ग्रामीण इलाके में सरकारी धान खरीद का बुरा हाल है। अधिकतर क्रय केंद्रों पर धान का एक दाना भी खरीदा नहीं गया। खरीद के नाम पर आंकड़ा जीरो है। दुबग्गा रोड पर विपणन शाखा का क्रय केंद्र है। केंद्र पर मौजूद केंद्र सहायक अखिलेश शर्मा ने बताया कि अभी तक मानक के अनुरूप धान न मिल पाने से खरीद नहीं हो सकी है। बारदाना, पैसा आदि की कमी नहीं है। बावजूद राइस मिलों और आढ़तियों के यहां धान बिक्री के लिए किसानों की लाइन लगी है। किसान महेंद्र ने बताया कि पहले क्रय केंद्र पर धान बेचने गए थे। आरोप है कि वहां मौजूद कर्मचारी ने धान में नमी अधिक होने और गुणवत्ता में कमी की बात कहकर धान लेने से मना कर दिया। यह तो बानगी है। प्रशासनिक लापरवाही के चलते बेचारे किसान अपना धान बिचौलियों के हाथ औने पौने दामों में बेचने को मजबूर है।
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इस सीजन में धान खरीद का जायजा लेने के लिए खाद्य आयुक्त, संभागीय खाद्य नियंत्रक, पीसीएफ के प्रबंध निदेशक समेत कई आला अधिकारी राजापुर मंडी का दौरा कर चुके हैं। इसके बाद भी ड्रायर मशीन का उपयोग नहीं किया गया है, बल्कि क्रय केंद्र के प्रभारियों और एजेंसी के जिला प्रबंधकों ने धान में नमी अधिक होने का रटा रटाया जवाब देकर अपनी गर्दन बचाई है। यही वजह है कि मंडी के क्रय केंद्रों पर सिर्फ एक-दो किसानों से धान खरीदे जाने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सोमवार को खाद्य आयुक्त ने वीडियो कांफ्रेंसिंग कर धान की खरीद की समीक्षा की, जिसमें कम खरीद के बावत अधिकारियों ने नमी का रोना रोया। साथ ही ड्रायर मशीन के चालू न होने की बात कही है। वहीं मंडी सचिव रामबाबू शर्मा ने कहा है कि ड्रायर मशीन चालू है और आपरेटर भी रखा है। अब केंद्र प्रभारी की जिम्मेदारी है कि वह किसान का धान ड्रायर मशीन में सुखाकर धान खरीद सुनिश्चित करें। उधर, जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने कहा कि मंडी सचिव ड्रायर के चालू होने की बात कहते हैं, लेकिन मौके पर कोई आपरेटर नहीं है। किसान और केंद्र प्रभारी को ड्रायर मशीन चलाने की जानकारी नहीं है।
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महेवागंज। ग्रामीण इलाके में सरकारी धान खरीद का बुरा हाल है। अधिकतर क्रय केंद्रों पर धान का एक दाना भी खरीदा नहीं गया। खरीद के नाम पर आंकड़ा जीरो है। दुबग्गा रोड पर विपणन शाखा का क्रय केंद्र है। केंद्र पर मौजूद केंद्र सहायक अखिलेश शर्मा ने बताया कि अभी तक मानक के अनुरूप धान न मिल पाने से खरीद नहीं हो सकी है। बारदाना, पैसा आदि की कमी नहीं है। बावजूद राइस मिलों और आढ़तियों के यहां धान बिक्री के लिए किसानों की लाइन लगी है। किसान महेंद्र ने बताया कि पहले क्रय केंद्र पर धान बेचने गए थे। आरोप है कि वहां मौजूद कर्मचारी ने धान में नमी अधिक होने और गुणवत्ता में कमी की बात कहकर धान लेने से मना कर दिया। यह तो बानगी है। प्रशासनिक लापरवाही के चलते बेचारे किसान अपना धान बिचौलियों के हाथ औने पौने दामों में बेचने को मजबूर है।
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