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Lakhimpur Kheri News: डेंगू वार्ड में भर्ती मरीज का खेत में मिला शव
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लखीमपुर खीरी। जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में भर्ती एक बुजुर्ग का शव रविवार सुबह संदिग्ध हालत में खेत में मिला। इससे जिला अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। उधर, अस्पताल प्रशासन का दावा है कि बुजुर्ग शौच के लिए खेत गए थे। उधर, स्थानीय पुलिस ऐसी किसी भी घटना की जानकारी से इन्कार करती रही।
निघासन थाना क्षेत्र के गांव खैरीगढ़ निवासी 70 वर्षीय सियाराम को तेज बुखार आने पर घरवाले बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर होने और डेंगू की आशंका पर सियाराम को डेंगू वार्ड में भर्ती किया गया था। बतौर तीमारदार बहू पूजा ने बताया कि रविवार वह शौच के लिए खेत में गए थे। काफी देर तक सियाराम के वार्ड में न आने पर तीमारदारों ने उनको खोजना शुरू किया। उनका शव अस्पताल से करीब 150 मीटर दूर एक गन्ने के खेत में मिला।
वार्ड स्टाफ का कहना है कि मृतक सियाराम रोजाना शौच के लिए बाहर ही जाते थे। उनका पैजामा का नाड़ा खुला मिला और पास में पानी की भरी बोतल भी पड़ी थी।
डेथ प्रमाण पत्र को लेकर फंसा पेच
सियाराम की मौत के बाद घरवाले इमरजेंसी में डेथ प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे। इस पर इमरजेंसी ओपीडी में मौजूद ईएमओ डॉ. अखिलेश ने डेथ प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया। ईएमओ ने बताया कि यदि सियाराम की मौत वार्ड में होती तो डेथ प्रमाण पत्र जारी होता, लेकिन शव अस्पताल के बाहर खेत में मिला है। इसलिए डेथ प्रमाणपत्र जारी नहीं होगा।
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जिला अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
जिला अस्पताल प्रशासन और वार्ड स्टाफ की लापरवाही से एक बुजुर्ग की जान चली गई। नियमानुसार एक बार भर्ती होने के बाद मरीज को तभी बाहर जाने दिया जा सकता है, जब वह डिस्चार्ज किया जाए। अथवा, जब तीमारदार अस्पताल से बाहर मरीज को ले जाना चाहे। ऐसी स्थिति में भी लिखा पढ़ी होती है। जबकि, अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मरीज बिना बताए चला गया था। अपनी जवाबदेही से बचने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन ने ब्रॉट डेड की रिपोर्ट बनाई है।
मरीज बिना बताए अपने वार्ड से चला गया था, जिसका शव एक खेत में मिला। ऐसे में अस्पताल से मृतक प्रमाण पत्र जारी करने का नियम नहीं है। घरवालों ने पोस्टमार्टम कराने से भी मना कर दिया। शव अस्पताल लेकर आने पर ब्राड डेड में अंकित किया गया है।
-डॉ. आईके राम चंदानी सीएमएस, जिला अस्पताल
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निघासन थाना क्षेत्र के गांव खैरीगढ़ निवासी 70 वर्षीय सियाराम को तेज बुखार आने पर घरवाले बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। हालत गंभीर होने और डेंगू की आशंका पर सियाराम को डेंगू वार्ड में भर्ती किया गया था। बतौर तीमारदार बहू पूजा ने बताया कि रविवार वह शौच के लिए खेत में गए थे। काफी देर तक सियाराम के वार्ड में न आने पर तीमारदारों ने उनको खोजना शुरू किया। उनका शव अस्पताल से करीब 150 मीटर दूर एक गन्ने के खेत में मिला।
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वार्ड स्टाफ का कहना है कि मृतक सियाराम रोजाना शौच के लिए बाहर ही जाते थे। उनका पैजामा का नाड़ा खुला मिला और पास में पानी की भरी बोतल भी पड़ी थी।
डेथ प्रमाण पत्र को लेकर फंसा पेच
सियाराम की मौत के बाद घरवाले इमरजेंसी में डेथ प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे। इस पर इमरजेंसी ओपीडी में मौजूद ईएमओ डॉ. अखिलेश ने डेथ प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया। ईएमओ ने बताया कि यदि सियाराम की मौत वार्ड में होती तो डेथ प्रमाण पत्र जारी होता, लेकिन शव अस्पताल के बाहर खेत में मिला है। इसलिए डेथ प्रमाणपत्र जारी नहीं होगा।
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जिला अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
जिला अस्पताल प्रशासन और वार्ड स्टाफ की लापरवाही से एक बुजुर्ग की जान चली गई। नियमानुसार एक बार भर्ती होने के बाद मरीज को तभी बाहर जाने दिया जा सकता है, जब वह डिस्चार्ज किया जाए। अथवा, जब तीमारदार अस्पताल से बाहर मरीज को ले जाना चाहे। ऐसी स्थिति में भी लिखा पढ़ी होती है। जबकि, अस्पताल प्रशासन का दावा है कि मरीज बिना बताए चला गया था। अपनी जवाबदेही से बचने के लिए जिला अस्पताल प्रशासन ने ब्रॉट डेड की रिपोर्ट बनाई है।
मरीज बिना बताए अपने वार्ड से चला गया था, जिसका शव एक खेत में मिला। ऐसे में अस्पताल से मृतक प्रमाण पत्र जारी करने का नियम नहीं है। घरवालों ने पोस्टमार्टम कराने से भी मना कर दिया। शव अस्पताल लेकर आने पर ब्राड डेड में अंकित किया गया है।
-डॉ. आईके राम चंदानी सीएमएस, जिला अस्पताल