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निलंबित सचिव को बचाने में जुटे जांच अधिकारी
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लखीमपुर खीरी। बेहजम ब्लॉक की छह ग्राम पंचायतों गौरिया, भूलनपुर, प्रतापपुर, मिर्जापुर, अछनिया और हसनापुर में 26 लाख 30 हजार 572 रुपये के गबन मामले में निलंबित ग्राम विकास अधिकारी (सचिव) कमाल अहमद को बचाने के लिए जांच अधिकारी/बीडीओ बांकेगंज ने आख्या रिपोर्ट दबा दी है। चार महीने में जांच पूरी नहीं की, जबकि पांच माह बीत गए हैं। सीडीओ रवि रंजन ने जांच अधिकारी को कड़ी चेतावनी देते हुए तुरंत जांच आख्या प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं।
डीडीओ अरविंद कुमार ने बेहजम ब्लॉक में तैनात रहे सचिव कमाल अहमद को गबन में दोषी पाए जाने पर 13 मार्च 2019 को निलंबत कर दिया था। डीडीओ ने निलंबन अवधि में सचिव को फूलबेहड़ ब्लॉक में संबद्ध कर दिया था। इसके बाद सचिव ने निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली, जिसमें कोर्ट ने 29 मार्च 2019 को आदेश दिया कि चार माह के अंदर जांच अधिकारी आख्या देंगे। इसके बाद दो माह में नियुक्ति प्राधिकारी/दंडाधिकारी अंतिम निर्णय लेंगे। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि यदि निर्र्धारित छह माह में मामले का निस्तारण नहीं हुआ, तो निलंबन आदेश स्वत: निरस्त माना जाएगा। जांच अधिकारी/बीडीओ बांकेगंज एके सिंह ने धीरे-धीरे पांच माह बिता दिए। इस दौरान डीडीओ ने तीन बार रिमाइंडर जारी कर तुरंत आख्या देने को कहा, लेकिन जांच अधिकारी मामले को दबाकर आरोपी को लाभ देने का कुचक्र रचते रहे। कोर्ट की मियाद करीब आते देख डीडीओ ने मामले की जानकारी सीडीओ रवि रंजन को दी। तब सीडीओ ने चेतावनी पत्र जारी करते हुए बीडीओ बांकेगंज को 28 अगस्त तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। फिर भी बेखौफ बीडीओ आख्या को दबाए रहे। जब मामले में डीडीओ ने बीडीओ को सीडीओ की चेतावनी का हवाला दिया, तो बीडीओ ने कहा कि कमरा बंद करके जांच आख्या तैयार कर रहे हैं। शनिवार को आख्या सीडीओ के समक्ष प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया है।
आख्या प्रस्तुत करने में देरी किए जाने पर बीडीओ बांकेगंज को कड़ी चेतावनी दी गई है। जल्द ही आख्या प्रस्तुत न करने पर बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रवि रंजन, सीडीओ
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डीडीओ अरविंद कुमार ने बेहजम ब्लॉक में तैनात रहे सचिव कमाल अहमद को गबन में दोषी पाए जाने पर 13 मार्च 2019 को निलंबत कर दिया था। डीडीओ ने निलंबन अवधि में सचिव को फूलबेहड़ ब्लॉक में संबद्ध कर दिया था। इसके बाद सचिव ने निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली, जिसमें कोर्ट ने 29 मार्च 2019 को आदेश दिया कि चार माह के अंदर जांच अधिकारी आख्या देंगे। इसके बाद दो माह में नियुक्ति प्राधिकारी/दंडाधिकारी अंतिम निर्णय लेंगे। साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिए कि यदि निर्र्धारित छह माह में मामले का निस्तारण नहीं हुआ, तो निलंबन आदेश स्वत: निरस्त माना जाएगा। जांच अधिकारी/बीडीओ बांकेगंज एके सिंह ने धीरे-धीरे पांच माह बिता दिए। इस दौरान डीडीओ ने तीन बार रिमाइंडर जारी कर तुरंत आख्या देने को कहा, लेकिन जांच अधिकारी मामले को दबाकर आरोपी को लाभ देने का कुचक्र रचते रहे। कोर्ट की मियाद करीब आते देख डीडीओ ने मामले की जानकारी सीडीओ रवि रंजन को दी। तब सीडीओ ने चेतावनी पत्र जारी करते हुए बीडीओ बांकेगंज को 28 अगस्त तक आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। फिर भी बेखौफ बीडीओ आख्या को दबाए रहे। जब मामले में डीडीओ ने बीडीओ को सीडीओ की चेतावनी का हवाला दिया, तो बीडीओ ने कहा कि कमरा बंद करके जांच आख्या तैयार कर रहे हैं। शनिवार को आख्या सीडीओ के समक्ष प्रस्तुत करने का आश्वासन दिया है।
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आख्या प्रस्तुत करने में देरी किए जाने पर बीडीओ बांकेगंज को कड़ी चेतावनी दी गई है। जल्द ही आख्या प्रस्तुत न करने पर बीडीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रवि रंजन, सीडीओ