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Lakhimpur Kheri News: बरसात में खतरा बनीं शहर की 10 जर्जर इमारतें, नोटिस देकर जिम्मेदार चुप
Wed, 06 Aug 2025 11:23 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 06 Aug 2025 11:23 PM IST
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कुष्ठ रोग अस्पताल का जर्जर भवन। संवाद
लखीमपुर खीरी। बरसात के मौसम में शहर की कई पुरानी और जर्जर इमारतें लोगों के लिए खतरा बन गई हैं। इनकी दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। कई की तो छतें भी झुक चुकी हैं। इसी तरह की चिह्नित 10 इमारतों को नगर पालिका प्रशासन ने नोटिस जारी किया है, लेकिन जिम्मेदार कार्रवाई के नाम पर चुप हैं।
मोहल्ला संकटा देवी, हाथीपुर, बाजार मोहल्ला, रानीगंज सहित कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां करीब 40-50 घर गिरने के कगार पर हैं। बारिश की वजह से इन इमारतों के गिरने का खतरा और भी बढ़ गया है। नगर पालिका के मुताबिक, शहर में करीब 10 इमारतें ही बेहद खतरनाक स्थिति में हैं, जिनके मालिकों को इन्हें ध्वस्त कराने के लिए कहा गया है।
कुछ जगह मालिक आर्थिक तंगी के कारण मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं करा पा रहे हैं तो कुछ मामलों में कानूनी विवाद के चलते भवन वर्षों से अधर में लटके हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ नोटिस चिपकाकर अपनी कागजी औपचारिकता को पूरी कर लेता है, लेकिन असली खतरे को नजरअंदाज किया जा रहा है।
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लोगों का मानना है कि बारिश और नमी के कारण कमजोर ढांचे की मजबूती तेजी से घट जाती है। दीवारों में सीलन, लोहे की सरियों में जंक और छतों की परतें उखड़ने से अचानक ढहने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर संकरी गलियों में मौजूद इमारतों के गिरने पर बचाव कार्य भी मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद नगर पालिका इन भवनों को खाली कराकर ढहाने का कार्य नहीं करा पा रही है।
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चिन्हित जर्जर भवनों की सूची तैयार कर करीब 10 भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही इन्हें खाली कराने या ढहाने की कार्रवाई होगी।
संजय कुमार, ईओ, नगर पालिका
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मोहल्ला संकटा देवी, हाथीपुर, बाजार मोहल्ला, रानीगंज सहित कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां करीब 40-50 घर गिरने के कगार पर हैं। बारिश की वजह से इन इमारतों के गिरने का खतरा और भी बढ़ गया है। नगर पालिका के मुताबिक, शहर में करीब 10 इमारतें ही बेहद खतरनाक स्थिति में हैं, जिनके मालिकों को इन्हें ध्वस्त कराने के लिए कहा गया है।
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कुछ जगह मालिक आर्थिक तंगी के कारण मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं करा पा रहे हैं तो कुछ मामलों में कानूनी विवाद के चलते भवन वर्षों से अधर में लटके हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन सिर्फ नोटिस चिपकाकर अपनी कागजी औपचारिकता को पूरी कर लेता है, लेकिन असली खतरे को नजरअंदाज किया जा रहा है।
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लोगों का मानना है कि बारिश और नमी के कारण कमजोर ढांचे की मजबूती तेजी से घट जाती है। दीवारों में सीलन, लोहे की सरियों में जंक और छतों की परतें उखड़ने से अचानक ढहने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर संकरी गलियों में मौजूद इमारतों के गिरने पर बचाव कार्य भी मुश्किल हो जाता है। इसके बावजूद नगर पालिका इन भवनों को खाली कराकर ढहाने का कार्य नहीं करा पा रही है।
चिन्हित जर्जर भवनों की सूची तैयार कर करीब 10 भवन स्वामियों को नोटिस जारी किया गया है। जल्द ही इन्हें खाली कराने या ढहाने की कार्रवाई होगी।
संजय कुमार, ईओ, नगर पालिका