फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   cultural

सती प्रथा की कथा सुना कर भक्तों को किया भाव विभोर

Thu, 19 Dec 2019 02:16 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2019 02:16 AM IST
विज्ञापन
cultural
मोहम्मदी। श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आईं महेश्वरी जी ने बुधवार को श्रीरामचरित मानस के बालकांड में शिव और सती का एक प्रसंग पर चर्चा की।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि भगवान शिव और सती, अगस्त ऋषि के आश्रम में रामकथा सुनने गए। सती को यह थोड़ा अजीब लगा कि श्रीराम शिव के आराध्य देव हैं। सती का ध्यान कथा में नहीं रहा और वह यह सोचतीं रहीं कि शिव जो तीनों लोकों के स्वामी हैं, वे श्रीराम की कथा सुनने के लिए क्यों आए हैं। कथा समाप्त हुई और शिव-सती कैलाश पर्वत लौटने लगे। उस समय रावण ने सीता का हरण किया था और श्रीराम, सीता की खोज में भटक रहे थे। सती को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि शिव जिसे अपना आराध्य देव कहते हैं, वह एक स्त्री के वियोग में साधारण इंसान की तरह रो रहा है। सती ने शिवजी के सामने ये बात कही तो शिव ने समझाया कि यह सब श्रीराम की लीला है। भ्रम में मत पड़ो, लेकिन सती नहीं मानी और शिवजी की बात पर विश्वास नहीं किया।
सती ने श्रीराम की परीक्षा लेने की बात कही तो शिवजी ने रोका, लेकिन सती पर शिवजी की बात का कोई असर नहीं हुआ। सती, सीता जी का रूप धारण करके श्रीराम के सामने पहुंच गईं। श्रीराम ने सीता के रूप में सती को पहचान लिया और पूछा कि हे माता, आप अकेली इस घने जंगल में क्या कर रहीं हैं। शिवजी कहां हैं, जब श्रीराम ने सती को पहचान लिया तो वे डर गईं और चुपचाप शिव के पास लौट आईं।
विज्ञापन

जब शिव जी ने सती से पूछा की वो कहां गई थीं तो वह कुछ जवाब न दे सकीं, लेकिन शिव जी सब समझ गए थे कि जिन श्रीराम को वे अपना आराध्य देव मानते हैं, सती ने उनकी पत्नी का रूप धारण करके परीक्षा लेकर उनका अनादर किया है। इस कारण शिव जी ने मन ही मन सती का त्याग कर दिया। सती भी ये बात समझ गईं और दक्ष के यज्ञ में जाकर आत्मदाह कर लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि इस प्रसंग से विश्वास के महत्व को समझा जा सकता है। कई बार पत्नियां पति की और पति पत्नी की बात पर विश्वास नहीं करते। इसका नतीजा यह होता है कि रिश्ते में बिखराव आ जाता है। आज कथा यजमान के रूप में संतोष देवल, डॉ अवधेश गुप्ता रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed