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पलिया में भी फसल तबाह

Wed, 08 Apr 2015 06:13 PM IST
मझगईं
मझगईं Updated Wed, 08 Apr 2015 06:13 PM IST
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Crop losses in Palia
मिनी पंजाब के नाम से मशहूर तराई इलाके के  इस हिस्से के किसान तेज आंधी के साथ हुई बरसात से पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं, लेकिन प्रशासन को यहां बर्बादी दिखाई नहीं दी है। इसकी वजह यह है कि किसी ने धरातल पर जाकर सर्वे नहीं किया है। इधर, लेखपालों का कहना है कि कोई नुकसान नहीं हुआ है।
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मझगईं इलाके के लोकनपुरवा, नौगवां, त्रिलोकपुर, भगवंत नगर, गुलरा टंाडा, मटेहिया, चौखड़ा फार्म आदि दर्जनों गांवों के किसान गन्नेे के साथ गेहूं, मसूर, मक्के, धान की फसल भी बोतें हैं। इस बार भी ऐसा ही हुआ था, किसानों ने यह फसलें बोईं थीं। इन फसलों से उन्हें उम्मीद थी कि गन्ना भुगतान की मार को वे सह लेंगे और इससे अपने कर्ज आदि उतार देंगे, लेकिन बारिश, तेज हवा और ओलावृष्टि के रूप में टूटी आफत से उनकी यह फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। इन फसलों के बर्बाद होते ही किसान हाशिए पर आ गए। उम्मीद थी कि ठीक ठाक मुआवजा मिल जाएगा, लेकिन ऐसा भी न हुआ। किसानाें का कहना है कि प्रशासन की ओर से कोई आया ही नहीं जो सर्वे करता, लेकिन प्रशासन के पास आंकड़े पहुंच गए और इसके मुताबिक यह बताया गया कि किसानों का कोई नुकसान नहीं हुआ है, जबकि हकीकत सब जानते हैं। कुल मिलाकर किसान पहले कुदरत तो अब प्रशासन की मार से पूरी तरह टूट चुके हैं।
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प्रधान-भगवंतनगर राधिका देवी ने बताया कि ग्राम पंचायत में करीब 40 से 50 प्रतिशत तक फसल बरबाद हो गईं है, लेकिन लेखपाल ने अब तक सर्वे नहीं किया है। इससे सैकड़ों किसान प्रभावित हुए हैं।
लेखपाल, भगवंतनगर उत्तम कुमार मौर्या ने बताया कि सर्वे किया गया है, लेकिन कहीं भी 20 प्रतिशत से अधिक नुकसान नहीं हुआ है। दोबारा सर्वे रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हो सकी है। गुरुवार तक दोबारा सर्वे की रिपोर्ट तैयार कर तहसील को भेज दी जाएगी।
किसान बोले, मौसम ने कर दिया बर्बाद
मेरी चार बीघे गेहूं की फसल बारिश और ओले गिरने से तहस नहस हो गई। उम्मीद थी कि मुआवजा मिलेगा, लेकिन यहां तो कोई जांच के लिए आया ही नहीं। -पंचम, लोकनपुरवा
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गन्ने का भुगतान न होने से कर्ज लेकर रोजमर्रा के खर्च चलाए। दो बीघा जमीन पर बोई गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। सोचा मुआवजा मिल जाएगा लेकिन यहां तो कोई जांच करने ही नहीं आया। पता चला है कि लेखपाल ने कोई नुकसान ही नहीं माना।

-रामबहादुर, किसान
पांच बीघा गेहूं की फसल से काफी उम्मीद थी, लेकिन इस मौसम ने फसल को तबाह करने के साथ सबकुछ बर्बाद कर दिया। अब कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाना पड़ेगा।
-शिवनाथ ओझा, नौगवां
मेरी दो बीघे मसूर और गेहूं की फसल आंधी, पानी ओलावृष्टि में खराब हो गई, लेकिन तहसील से कोई भी गिरी फसल देखने तक नहीं आया। ऐसे में मुआवजे की आस लगाना बेकार है।
-पवन राठौर, त्रिलोकपुर

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