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दो हत्यारोपियों को उम्रकैद दस-दस हजार का जुर्माना
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 12 Aug 2015 08:07 PM IST
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मामूली कहासुनी के बीच ग्रामीण की गोली मारकर हत्या कर देने के मामले में एडीजे एमजी मदार ने दो हत्यारोपियों को दोषी पाया है। दोनो को अजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये का जुर्माना भरने की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कफील अहमद अंसारी ने बताया कि धौरहरा थाना क्षेत्र के ग्राम नीबियापुरवा निवासी राममूर्ति के परिवार की गांव के लोगों से कहासुनी हो गई थी। इसी कड़ी में छह नवंबर 2007 की रात को श्रीधर, यूनुस और राजेश, राममूर्ति के घर आए और उसके छोटे भाई शिवकुमार को तलाशने लगे, न मिलने पर बड़बड़ाते हुए चले गए। इसी रात करीब 12 बजे जब राममूर्ति अपने भाई शिवकुमार और रामसनेही के साथ अपने मकान के बाहर बंगले में लेटा था तभी फायर की आवाज से राममूर्ति की नींद खुल गई, तब देखा कि यूनुस, श्रीधर और राजेश भाग रहे हैं। गोली लगने से शिवकुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी।
राममूर्ति ने तीनों हत्यारोपियों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच कोतवाल एके उपाध्याय को सौंपी गई, तो उन्होंने तफ्तीश के बाद केवल यूनुस और श्रीधर के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की। मुकदमा सुनवाई के दौरान राममूर्ति, रामसनेही, एके उपाध्याय और आईबी त्रिपाठी की गवाही दर्ज कराई गई।
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सुनवाई पूरी करने के बाद बुधवार को अदालत ने निर्णय सुनाते हुए श्रीधर और यूनुस को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला।
गोला कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
अपने फैसले में अदालत ने पुलिस प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाते हुए विवेचक एके उपाध्याय की कार्यशैली पर तीखी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने फैसले में लिखा है कि नामजद हत्यारोपी राजेश के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत होने के बाद भी किन हालात में क्लीन चिट दे दी गई, इसके लिए विवेचक की भूमिका भी जांच किए जाने योग्य है, साथ ही कोर्ट ने प्रभारी निरीक्षक एके उपाध्याय के खिलाफ जांच और कार्रवाई करने के लिए एसपी को फैसले की प्रति भेजी है।
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अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी कफील अहमद अंसारी ने बताया कि धौरहरा थाना क्षेत्र के ग्राम नीबियापुरवा निवासी राममूर्ति के परिवार की गांव के लोगों से कहासुनी हो गई थी। इसी कड़ी में छह नवंबर 2007 की रात को श्रीधर, यूनुस और राजेश, राममूर्ति के घर आए और उसके छोटे भाई शिवकुमार को तलाशने लगे, न मिलने पर बड़बड़ाते हुए चले गए। इसी रात करीब 12 बजे जब राममूर्ति अपने भाई शिवकुमार और रामसनेही के साथ अपने मकान के बाहर बंगले में लेटा था तभी फायर की आवाज से राममूर्ति की नींद खुल गई, तब देखा कि यूनुस, श्रीधर और राजेश भाग रहे हैं। गोली लगने से शिवकुमार की मौके पर ही मौत हो गई थी।
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राममूर्ति ने तीनों हत्यारोपियों को नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच कोतवाल एके उपाध्याय को सौंपी गई, तो उन्होंने तफ्तीश के बाद केवल यूनुस और श्रीधर के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की। मुकदमा सुनवाई के दौरान राममूर्ति, रामसनेही, एके उपाध्याय और आईबी त्रिपाठी की गवाही दर्ज कराई गई।
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सुनवाई पूरी करने के बाद बुधवार को अदालत ने निर्णय सुनाते हुए श्रीधर और यूनुस को दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई, साथ ही दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी डाला।
गोला कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश
अपने फैसले में अदालत ने पुलिस प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाते हुए विवेचक एके उपाध्याय की कार्यशैली पर तीखी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने फैसले में लिखा है कि नामजद हत्यारोपी राजेश के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सबूत होने के बाद भी किन हालात में क्लीन चिट दे दी गई, इसके लिए विवेचक की भूमिका भी जांच किए जाने योग्य है, साथ ही कोर्ट ने प्रभारी निरीक्षक एके उपाध्याय के खिलाफ जांच और कार्रवाई करने के लिए एसपी को फैसले की प्रति भेजी है।