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पति को दस, ससुर को सात साल की कैद
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 13 Sep 2016 11:35 PM IST
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सजा सुनने के बाद भाग
- फोटो : amar ujala
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दहेज के लिए विवाहिता की हत्या का मामला
दहेज के लिए विवाहिता की हत्या के मामले में जिला जज राजवीर सिंह ने पति को दस साल की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही ससुर को दोषसिद्ध करते हुए उसे सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी शिवराज सिंह यादव ने बताया कि सिंगाही थाना क्षेत्र के गांव निबौरिया निवासी रामखेलावन की शादी अगस्त 2007 को सुनीता देवी के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही दहेज की मांग के चलते सुनीता को परेशान किया जाने लगा, उसे मायके भी नहीं भेजा जाता था। तीन अप्रैल 2008 को भी जब सुनीता की मां मायादेवी अन्य लोगों के साथ लड़की को विदा कराने पहुंची। विदाई के लिए पंचायत होने लगी, गांव प्रधान ने शाम हो जाने की बात कहते हुए अगली सुबह सुनीता को साथ में ही विदा करा ले जाने की बात कही, इसी बात पर मां मायादेवी अन्य लोगों के साथ ग्राम निबौरिया में ही रुक गई। आरोप है कि इसी रात सुनीता देवी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इस मामले में मायादेवी ने मृतका के पति रामखेलावन, ससुर सोहन लाल, जेठ देशराज और सास राजकुमारी को नामजद किया। अदालत ने सुनवाई के बाद पति और ससुर को दोषी पाया। पति रामखेलावन को दस साल के कठोर कारावास की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि ससुर सोहन को सात साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही अपने फैसले में यह भी व्यवस्था दी कि वसूले गए जुर्माने में से चार हजार रुपये मृतका की मां को बतौर मुआवजा दिए जाएं।
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दहेज के लिए विवाहिता की हत्या के मामले में जिला जज राजवीर सिंह ने पति को दस साल की कैद की सजा सुनाई है। साथ ही ससुर को दोषसिद्ध करते हुए उसे सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी शिवराज सिंह यादव ने बताया कि सिंगाही थाना क्षेत्र के गांव निबौरिया निवासी रामखेलावन की शादी अगस्त 2007 को सुनीता देवी के साथ हुई थी। आरोप है कि शादी के बाद से ही दहेज की मांग के चलते सुनीता को परेशान किया जाने लगा, उसे मायके भी नहीं भेजा जाता था। तीन अप्रैल 2008 को भी जब सुनीता की मां मायादेवी अन्य लोगों के साथ लड़की को विदा कराने पहुंची। विदाई के लिए पंचायत होने लगी, गांव प्रधान ने शाम हो जाने की बात कहते हुए अगली सुबह सुनीता को साथ में ही विदा करा ले जाने की बात कही, इसी बात पर मां मायादेवी अन्य लोगों के साथ ग्राम निबौरिया में ही रुक गई। आरोप है कि इसी रात सुनीता देवी की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। इस मामले में मायादेवी ने मृतका के पति रामखेलावन, ससुर सोहन लाल, जेठ देशराज और सास राजकुमारी को नामजद किया। अदालत ने सुनवाई के बाद पति और ससुर को दोषी पाया। पति रामखेलावन को दस साल के कठोर कारावास की सजा और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई, जबकि ससुर सोहन को सात साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही अपने फैसले में यह भी व्यवस्था दी कि वसूले गए जुर्माने में से चार हजार रुपये मृतका की मां को बतौर मुआवजा दिए जाएं।
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