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करोड़ों खर्च फिर भी नहीं मिला साफ पानी
लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 10 Apr 2015 07:37 PM IST
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गर्र्मी में सबसे बड़ी जरूरत पानी की होती है, लेकिन जिले के अलग-अलग गांवों में ग्रामीण पाइप पेयजल योजना में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी हालात इस कदर खराब है कि कहीं पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है तो कहीं पाइप लाइन ही गायब हो चुकी है। कई जगहों पर गुणवत्ता ठीक न होने की वजह से काफी समय से पाइप लाइनों को हैंडओवर नहीं किया जा सका है।
वर्ष 2011-12 में ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत रमियाबेहड़ ब्लाक के गांव तेलियार में करीब 10 किलोमीटर से अधिक लंबी पाइप लाइन बिछाई गई, लेकिन अभी तक यह पाइप लाइन शोपीस बनी हुई है। इससे पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। इसी तरह योजना के अंतर्गत फूलबेहड़ ब्लाक के बड़ागांव और पयाग में बिछाई गई पाइप लाइन की गुणवत्ता खराब होने के कारण वह शुरू नहीं हो पा रही है। बताते हैं जैसे ही सप्लाई बहाल की जाती हैं, पाइप लाइन से लीकेज शुरू हो जाता है। बड़ागांव का मजरा चकई में करीब पांच किलोमीटर तक पाइप लाइन का निर्माण काफी समय से अधर में लटका हुआ है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आधी पाइप लाइन नहर तक बिछाई जा चुकी है, लेकिन आगे पाइप लाइन बिछाने के लिए जलनिगम को नहर विभाग की अनुमति चाहिए। इसे लेकर दोनों विभागों में सामंजस्य नहीं बन पा रहा। जिससे आधी बनी पाइप लाइन का काफी हिस्सा गायब भी हो चुका है। पेयजल योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत पयाग के मजरा गड़रियनपुरवा में भी पाइप लाइन बिछाने का कार्य कई महीनों से अधूरा पड़ा है। ऐसे में गर्मी में पेयजल को लेकर गांवों में परेशानी और बढ़ेगी।
यहां ट्रॉयल में ही फट गई पाइप लाइन
आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्र धौरहरा और ईसानगर में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करीब छह साल पहले टंकियां बनाई गईं और भूमिगत पाइप लाइन बिछाकर सप्लाई की बात कही गई। शुरू में विभागीय अधिकारी बिजली का रोना रोते रहे। बाद में ईसानगर में बिछाई गई पाइप लाइन में सप्लाई शुरू की गई। ग्रामीणों के मुताबिक पहले ही ट्रॉयल में ईसानगर, मक्कापुरवा, शिवपुर, नरगड़ा, रमपुरवा आदि गांवों में बिछी पाइप लाइन फट गई। जिसके बाद से अब तक स्वच्छ पेयजल लोगों के लिए सपना बना हुआ है।
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ग्रामीण पेयजल योजनाओं में बरती गई अनियमितताओं को लेकर शिकायतें मिली हैं, जिसकी जांच कराई जाएगी। इसके लिए डीडीओ सहित तीन जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम बनाई गई है। जो गांवों में पेयजल व्यवस्था की छानबीन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
-नितीश कुमार, मुख्य विकास अधिकारी
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वर्ष 2011-12 में ग्रामीण पेयजल योजना के अंतर्गत रमियाबेहड़ ब्लाक के गांव तेलियार में करीब 10 किलोमीटर से अधिक लंबी पाइप लाइन बिछाई गई, लेकिन अभी तक यह पाइप लाइन शोपीस बनी हुई है। इससे पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। इसी तरह योजना के अंतर्गत फूलबेहड़ ब्लाक के बड़ागांव और पयाग में बिछाई गई पाइप लाइन की गुणवत्ता खराब होने के कारण वह शुरू नहीं हो पा रही है। बताते हैं जैसे ही सप्लाई बहाल की जाती हैं, पाइप लाइन से लीकेज शुरू हो जाता है। बड़ागांव का मजरा चकई में करीब पांच किलोमीटर तक पाइप लाइन का निर्माण काफी समय से अधर में लटका हुआ है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि आधी पाइप लाइन नहर तक बिछाई जा चुकी है, लेकिन आगे पाइप लाइन बिछाने के लिए जलनिगम को नहर विभाग की अनुमति चाहिए। इसे लेकर दोनों विभागों में सामंजस्य नहीं बन पा रहा। जिससे आधी बनी पाइप लाइन का काफी हिस्सा गायब भी हो चुका है। पेयजल योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत पयाग के मजरा गड़रियनपुरवा में भी पाइप लाइन बिछाने का कार्य कई महीनों से अधूरा पड़ा है। ऐसे में गर्मी में पेयजल को लेकर गांवों में परेशानी और बढ़ेगी।
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यहां ट्रॉयल में ही फट गई पाइप लाइन
आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्र धौरहरा और ईसानगर में लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करीब छह साल पहले टंकियां बनाई गईं और भूमिगत पाइप लाइन बिछाकर सप्लाई की बात कही गई। शुरू में विभागीय अधिकारी बिजली का रोना रोते रहे। बाद में ईसानगर में बिछाई गई पाइप लाइन में सप्लाई शुरू की गई। ग्रामीणों के मुताबिक पहले ही ट्रॉयल में ईसानगर, मक्कापुरवा, शिवपुर, नरगड़ा, रमपुरवा आदि गांवों में बिछी पाइप लाइन फट गई। जिसके बाद से अब तक स्वच्छ पेयजल लोगों के लिए सपना बना हुआ है।
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ग्रामीण पेयजल योजनाओं में बरती गई अनियमितताओं को लेकर शिकायतें मिली हैं, जिसकी जांच कराई जाएगी। इसके लिए डीडीओ सहित तीन जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम बनाई गई है। जो गांवों में पेयजल व्यवस्था की छानबीन कर अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
-नितीश कुमार, मुख्य विकास अधिकारी