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अर्थियां उठीं तो रो पड़ा खीरी कस्बा

खीरी टाउन (लखीमपुर खीरी)। Updated Thu, 02 Jul 2015 06:30 PM IST
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So wept rose Arthiyan Kheri town
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अवध खनन कर ईंट भट्ठे के लिए खोदे गए गड्ढे में भरे पानी में डूबकर चार बच्चों की मौत की दिल दहला देने वाली घटना से पूरा खीरी कस्बा स्तब्ध है। गुरुवार को चारों मृतक बच्चों की अर्थियां उठीं तो खीरी कस्बे के हिंदू हो या मुस्लिम सभी की आंखों से आंसू छलक पड़े। बच्चों के अंतिम संस्कार में कस्बे के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चों की मौत से परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। बच्चों के शवों को रामापुर रोड पर स्थित श्मशान में दफना दिया गया। इस दौरान हैरत की बात यह थी कि बच्चों के अंतिम संस्कार में कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। सदर विधायक उत्कर्ष वर्मा ने जरूर खीरी कस्बा पहुंचकर पीड़ित परिवारीजनों से मिलकर ढाढंस बंधाया। विधायक ने परिवारीजनों को शासन से आर्थिक सहायता दिलवाने की बात भी कही।
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चार बच्चों की मौत पर भी संजीदा नहीं हुआ प्रशासन
खीरी टाउन। हनिया टोला मोहल्ले के चार बच्चों की गहरे गड्ढे में भरे पानी में डूबकर हुई मौत की घटना तमाशा बनकर रह गई है। प्रशासन इसे महज एक हादसा मान रहा है। शायद यहीं कारण है कि 24 घंटे बाद भी अधिकारी उस ईंट-भट्ठे को ट्रेस नहीं कर पाए हैं, जिसके लिए खेत में मिट्टी खोदी गई थी। प्रशासन के पास फरार खेत मालिक की भी कोई जानकारी नहीं है।

बता दें कि खीरी कस्बे के हनिया टोला निवासी कंधईलाल की पुत्री रेशमा और पुत्र राकेश, डालूचंद का पुत्र संजय और घनश्याम की खेलते समय अवैध खनन कर खोदे गए गहरे गड्ढे में भरे पानी में डूबकर मौत हो गई थी। जिसके बाद खीरी कस्बे में कोहराम मच गया था। उस समय मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने तेजी दिखाई और बच्चों के शव पानी से बाहर निकाले। प्रशासन की यह तेजी सिर्फ उसी समय तक सीमित रही। इसके बाद अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को उसके हाल पर छोड़ दिया है। चार बच्चों की मौत का जिम्मेदार कौन है, यह जानने की कोशिश नहीं की गई। खासकर घटना के 24 घंटे बाद भी खेत मालिक का न मिलना और ईंट-भट्ठे का न ट्रेस न होना कहीं न कहीं अधिकारियों की लापरवाही उजागर कर रहा है।

सरकारी मदद के भी हकदार नहीं
गड्ढे में भरे पानी में डूबकर चार बच्चों की मौत के बाद पीड़ित परिवार की मदद के लिए खीरी टाउन के लोग आगे आए और आपस में सहयोग कर परिवार को 80 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी पर प्रशासन की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि चार बच्चों की मौत बेहद दुखद घटना है, लेकिन परिवार को पारिवारिक लाभ योजना, दैवीय आपदा या कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत सरकारी मदद नहीं दी जा सकती है, क्योंकि यह हादसा किसी श्रेणी में नहीं आता है।

परिवार की तरफ से कोई शिकायत नहीं आई है और न ही वह कोई कार्रवाई चाह रहे हैं। फिर भी इस बात की जांच की जा रही है कि मिट्टी की खुदाई के लिए रायल्टी जमा की गई थी या नहीं। जिस तरह से बच्चों की मौत की घटना हुई, उससे परिवार को किसी मद से सरकारी मदद नहीं दी जा सकती है।
-आलोक वर्मा, एसडीएम सदर
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