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प्रधान मध्यस्थता कर सुलझाएं विवाद
अजान।
Updated Tue, 19 Jan 2016 05:48 PM IST
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रानी लक्ष्मीबाई कन्या इंटर कॉलेज शहाबुद्दीनपुर में विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर का मुख्य अतिथि अपर जिला जज हाजी अशरफ अली अंसारी और एमजी मदार ने दीप जलाकर शुभारंभ किया। मुख्य अतिथि ने कहा कि छोटे-छोटे मुकदमों को आपसी सुलह समझौते से निपटाना चाहिए। इससे समय और पैसे की बचत होती है।
उन्होंने प्रधानों को मध्यस्थता कर वादों को निपटाने में अदालतों के बोझ कम करने में मदद करने की बात कही। कहा कि लोक अदालत के माध्यम से सुलह समझौते के आधार पर मुकदमों का निस्तारण किया जा सकता है। बताया कि लोक अदालत में निस्तारित मुकदमों में फैसले अंतिम होते हैं। इनके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती है।
सीजीएम एमजी मदार ने बताया कि बालश्रम तथा लिंग की जांच कराना कानूनी अपराध है। ऐसे व्यक्ति को तीन वर्ष का कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माना लग सकता है। जांच करने वाले डॉक्टर, उसके अस्पताल तथा जांच करवाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। यदि किसी पीड़ित पक्षकार को वकील करने की क्षमता नहीं है तो प्राधिकरण से पैरवी के लिए नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। ताकि कोई गरीब न्याय से वंचित न रह जाए।
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सिविल जज सचिव विधिक प्राधिकरण ने बताया कि प्रथम सूचना रिपार्ट दर्ज कराने के लिए धारा 156/3 सीआरपीसी के तहत प्रार्थनापत्र दिया जा सकता है। महिलाओं को अराजक तत्वों से निपटने के लिए महिला हेल्पलाइन 1090 का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया। विधिक साक्षरता शिविर को अशोक कुमार यादव तहसीलदार गोला, डॉ बीबी राम डिप्टी सीएमओ खीरी, भूषण कुमार खंड विकास अधिकारी गोला ने भी संबोधित किया। मनु ला कॉलेज के असिस्टेंट लॉ प्रोफेसर संदीप वर्मा और विद्यालय के प्रबंधक संजय वर्मा ने विधिक साक्षरता शिविर में बताई गई बातों पर अमल कर इसका लाभ उठाने को कहा।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य सर्वेश कुमार वर्मा, रामसिंह वर्मा, अशोक कुमार, जयचंद अवस्थी, अनुमोद वर्मा, पंकज वर्मा, सुधीर गौतम, गौरव राज, विजय वर्मा, विनोद वर्मा, प्रधान सर्वेश कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने प्रधानों को मध्यस्थता कर वादों को निपटाने में अदालतों के बोझ कम करने में मदद करने की बात कही। कहा कि लोक अदालत के माध्यम से सुलह समझौते के आधार पर मुकदमों का निस्तारण किया जा सकता है। बताया कि लोक अदालत में निस्तारित मुकदमों में फैसले अंतिम होते हैं। इनके विरुद्ध कोई अपील नहीं होती है।
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सीजीएम एमजी मदार ने बताया कि बालश्रम तथा लिंग की जांच कराना कानूनी अपराध है। ऐसे व्यक्ति को तीन वर्ष का कारावास और 15 हजार रुपये जुर्माना लग सकता है। जांच करने वाले डॉक्टर, उसके अस्पताल तथा जांच करवाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान है। यदि किसी पीड़ित पक्षकार को वकील करने की क्षमता नहीं है तो प्राधिकरण से पैरवी के लिए नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। ताकि कोई गरीब न्याय से वंचित न रह जाए।
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सिविल जज सचिव विधिक प्राधिकरण ने बताया कि प्रथम सूचना रिपार्ट दर्ज कराने के लिए धारा 156/3 सीआरपीसी के तहत प्रार्थनापत्र दिया जा सकता है। महिलाओं को अराजक तत्वों से निपटने के लिए महिला हेल्पलाइन 1090 का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया। विधिक साक्षरता शिविर को अशोक कुमार यादव तहसीलदार गोला, डॉ बीबी राम डिप्टी सीएमओ खीरी, भूषण कुमार खंड विकास अधिकारी गोला ने भी संबोधित किया। मनु ला कॉलेज के असिस्टेंट लॉ प्रोफेसर संदीप वर्मा और विद्यालय के प्रबंधक संजय वर्मा ने विधिक साक्षरता शिविर में बताई गई बातों पर अमल कर इसका लाभ उठाने को कहा।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य सर्वेश कुमार वर्मा, रामसिंह वर्मा, अशोक कुमार, जयचंद अवस्थी, अनुमोद वर्मा, पंकज वर्मा, सुधीर गौतम, गौरव राज, विजय वर्मा, विनोद वर्मा, प्रधान सर्वेश कुमार वर्मा आदि मौजूद रहे।