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नलकूप विभाग की आरक्षित भूमि पर दबंगों का कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो/ बांकेगंज
Updated Fri, 14 Apr 2017 11:22 PM IST
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
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नलकूप विभाग की आरक्षित भूमि पर दबंगों का कब्जा
47 साल पहले ट्यूबवेल-नाली के लिए आरक्षित हुई थी जमीन
चकबंदी अभिलेखों में हेराफेरी कर जमीन दर्ज कराई अपने नाम
ब्लॉक की ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 में 45 साल पहले हुई चकबंदी के दौरान नलकूप विभाग के लिए लगभग 16 एकड़ जमीन आरक्षित की गई भूमि पर दबंगों का कब्जा अब भी बरकरार है। यही नहीं चार दबंगों ने तो चकबंदी अभिलेखों में हेरा-फेरी कराकर इस सार्वजनिक भूमि को अपने नाम दर्ज करा लिया और संक्रमणीय भूमिधर बन बैठे। इसका खुलासा अब दोबारा हुई चकबंदी में हुआ।
ग्राम पंचायत ग्रंट 10 में पुराने गाटा संख्या 1832 मि 068 एयर और 1834 /3- 0045 एयर पर कुछ लोग अवैध रूप से काबिज थे। चकबंदी के दौरान इसका गाटा संख्या बदलकर 1438 / 0045 और 1458 / मि 68 हो गया, लेकिन इस पर पहले से ही काबिज लोगों ने ही अपना कब्जा कायम रखा। जबकि 1970 में हुई चकबंदी में यह 16 एकड़ भूमि नलकूप विभाग के लिए चकबंदी अभिलेखों में ट्यूबवेल-नाली के लिए आरक्षित की गई थी। नलकूप विभाग ने इस आरक्षित भूमि की 45 वर्षों से कोई सुधि नहीं ली। इस बीच पहले से काबिज श्याम सिंह यादव सहित तीन अन्य लोगों ने चकबंदी अभिलेखों में हेरा-फेरी कराकर सार्वजनिक भूमि अपने नाम दर्ज करा ली। अब जब यहां हाल ही में दोबारा चकबंदी हुई तो यह घोटाला सामने आया। इलाके के कुछ जागरूक लोग अनिल यादव, रतन सिंह, डॉ चंद्र भाल यादव, वीर सिंह, दिनेश कुमार, रमेश, विमलेश, राजपाल आदि ने जनहित में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, चकबंदी आयुक्त, डीएम, एसओसी सहित सीओ चकबंदी (अभिलेख) को रजिस्टर्ड प्रार्थना भेजकर मामले की जांच कराने और आरक्षित भूमि नलकू्प विभाग को सौंपने की मांग की है।
--
वर्जन....
मामला संज्ञान में आया है। संबधित अधिकारियों को त्वरित न्याय के लिए प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएंगे।
-उमेश नरायन पांडे, एडीएम, खीरी
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मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर संबधित के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
-आरएस सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी खीरी
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47 साल पहले ट्यूबवेल-नाली के लिए आरक्षित हुई थी जमीन
चकबंदी अभिलेखों में हेराफेरी कर जमीन दर्ज कराई अपने नाम
ब्लॉक की ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 10 में 45 साल पहले हुई चकबंदी के दौरान नलकूप विभाग के लिए लगभग 16 एकड़ जमीन आरक्षित की गई भूमि पर दबंगों का कब्जा अब भी बरकरार है। यही नहीं चार दबंगों ने तो चकबंदी अभिलेखों में हेरा-फेरी कराकर इस सार्वजनिक भूमि को अपने नाम दर्ज करा लिया और संक्रमणीय भूमिधर बन बैठे। इसका खुलासा अब दोबारा हुई चकबंदी में हुआ।
ग्राम पंचायत ग्रंट 10 में पुराने गाटा संख्या 1832 मि 068 एयर और 1834 /3- 0045 एयर पर कुछ लोग अवैध रूप से काबिज थे। चकबंदी के दौरान इसका गाटा संख्या बदलकर 1438 / 0045 और 1458 / मि 68 हो गया, लेकिन इस पर पहले से ही काबिज लोगों ने ही अपना कब्जा कायम रखा। जबकि 1970 में हुई चकबंदी में यह 16 एकड़ भूमि नलकूप विभाग के लिए चकबंदी अभिलेखों में ट्यूबवेल-नाली के लिए आरक्षित की गई थी। नलकूप विभाग ने इस आरक्षित भूमि की 45 वर्षों से कोई सुधि नहीं ली। इस बीच पहले से काबिज श्याम सिंह यादव सहित तीन अन्य लोगों ने चकबंदी अभिलेखों में हेरा-फेरी कराकर सार्वजनिक भूमि अपने नाम दर्ज करा ली। अब जब यहां हाल ही में दोबारा चकबंदी हुई तो यह घोटाला सामने आया। इलाके के कुछ जागरूक लोग अनिल यादव, रतन सिंह, डॉ चंद्र भाल यादव, वीर सिंह, दिनेश कुमार, रमेश, विमलेश, राजपाल आदि ने जनहित में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ, चकबंदी आयुक्त, डीएम, एसओसी सहित सीओ चकबंदी (अभिलेख) को रजिस्टर्ड प्रार्थना भेजकर मामले की जांच कराने और आरक्षित भूमि नलकू्प विभाग को सौंपने की मांग की है।
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वर्जन....
मामला संज्ञान में आया है। संबधित अधिकारियों को त्वरित न्याय के लिए प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएंगे।
-उमेश नरायन पांडे, एडीएम, खीरी
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मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराई जाएगी। दोषी मिलने पर संबधित के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
-आरएस सिंह, सहायक चकबंदी अधिकारी खीरी