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मुआवजा राशि हड़पे जाने की आशंका से पीड़ित हलकान
निघासन
Updated Wed, 18 Mar 2015 07:37 PM IST
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बाढ़ और कटान से तबाह किसानों की मुआवजा धनराशि हड़पने के खुलासे के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है। तमाम ऐसे बाढ़ पीड़ित जिन्हें राहत चेक नहीं मिले थे, वे भी धनराशि हड़पे जाने की आशंका से कस्बा और आसपास की बैंक शाखाओं में जाकर पता करने में जुट गए।
इंडो-नेपाल बार्डर की निघासन तहसील के बाशिंदे दशकों से बाढ़ और कटान का दंश झेलते आ रहे है। शासन और प्रशासन उनकी फसलों और जमीन का मुआवजा देने के लिए सहायता राशि का वितरण कराती है। निघासन तहसील में फर्जी बैंक खाते खुलवाकर लाखों रुपये की मुआवजा धनराशि हड़पने का खुलासा ‘अमर उजाला’ ने 18 मार्च के अंक में किया था। अब राजस्व विभाग के अधिकारी, कर्मचारी इस घपलेबाजी को दबाने के प्रयास में जुटे हैं। प्रशासनिक अफसर इस मामले पर पर्दा डालने का तानाबाना बुन रहे हैं।
एसडीएम, निघासन पीके सिंह ने बताया कि पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है। किस स्तर से घपलेबाजी हुई है पता लगाकर दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत हुई तो दोषियों पर एफआईआर भी दर्ज होगी।
फर्जी पहचान पत्र बनाने का भी है गोरखधंधा
निघासन में तहसील गेट पर स्थित कई दुकानों पर फर्जी वोटर आईडी बनाने का काम बड़े पैमाने पर हो रहा है। किसी के नाम का भी फोटो पहचानपत्र बनवाना है तो वहां पर पैसा देकर आसानी से बनवाया जा सकता है।
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प्रधान और लेखपाल की साठगांठ से होता है घपला
बताते हैं राहत चेक आने पर लेखपाल और प्रधान यह पता लगाते हैं कि कौन-कौन किसान बाहर रहते हैं, कौन से ऐसे किसान हैं जो जागरूक नहीं जिन्हें आसानी से टरकाया जा सकता है, ऐसे किसानों के नाम से फर्जी आईडी के आधार पर खाते खुलवाकर उनमें चेक जमाकर पैसा निकाल लिया जाता है। खाता खुलवाने के लिए ग्राम प्रधान आवास प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं।
मनमाने ढंग से चेकों में पैसा वसूलने का आरोप
लालपुर निवासी सुनीता, अनीता, सरोज आदि ने बताया कि हल्का लेखपाल मुआवजा धनराशि की चेक देने के लिए पैसे की मांग करते हैं। चेक की धनराशि के हिसाब से सुविधा शुल्क देकर किसी की भी चेक लेखपाल से हासिल की जा सकती है।
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इंडो-नेपाल बार्डर की निघासन तहसील के बाशिंदे दशकों से बाढ़ और कटान का दंश झेलते आ रहे है। शासन और प्रशासन उनकी फसलों और जमीन का मुआवजा देने के लिए सहायता राशि का वितरण कराती है। निघासन तहसील में फर्जी बैंक खाते खुलवाकर लाखों रुपये की मुआवजा धनराशि हड़पने का खुलासा ‘अमर उजाला’ ने 18 मार्च के अंक में किया था। अब राजस्व विभाग के अधिकारी, कर्मचारी इस घपलेबाजी को दबाने के प्रयास में जुटे हैं। प्रशासनिक अफसर इस मामले पर पर्दा डालने का तानाबाना बुन रहे हैं।
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एसडीएम, निघासन पीके सिंह ने बताया कि पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जा रही है। किस स्तर से घपलेबाजी हुई है पता लगाकर दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जरूरत हुई तो दोषियों पर एफआईआर भी दर्ज होगी।
फर्जी पहचान पत्र बनाने का भी है गोरखधंधा
निघासन में तहसील गेट पर स्थित कई दुकानों पर फर्जी वोटर आईडी बनाने का काम बड़े पैमाने पर हो रहा है। किसी के नाम का भी फोटो पहचानपत्र बनवाना है तो वहां पर पैसा देकर आसानी से बनवाया जा सकता है।
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प्रधान और लेखपाल की साठगांठ से होता है घपला
बताते हैं राहत चेक आने पर लेखपाल और प्रधान यह पता लगाते हैं कि कौन-कौन किसान बाहर रहते हैं, कौन से ऐसे किसान हैं जो जागरूक नहीं जिन्हें आसानी से टरकाया जा सकता है, ऐसे किसानों के नाम से फर्जी आईडी के आधार पर खाते खुलवाकर उनमें चेक जमाकर पैसा निकाल लिया जाता है। खाता खुलवाने के लिए ग्राम प्रधान आवास प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं।
मनमाने ढंग से चेकों में पैसा वसूलने का आरोप
लालपुर निवासी सुनीता, अनीता, सरोज आदि ने बताया कि हल्का लेखपाल मुआवजा धनराशि की चेक देने के लिए पैसे की मांग करते हैं। चेक की धनराशि के हिसाब से सुविधा शुल्क देकर किसी की भी चेक लेखपाल से हासिल की जा सकती है।