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डीएफओ ने देखा घटनास्थल, बाघ की निगरानी के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो/मैलानी/बांकेगंज।
Updated Wed, 17 Aug 2016 11:43 PM IST
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- मंगलवार को बाघ के हमले से हुई थी किशोरी की मौत
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज की गदनिया बीट के सुआबोझ ब्लाक वन में बाघ हमले से हुई किशोरी की मौत के बाद डीएफओ संजय बिस्वाल ने विभागीय अमले के साथ घटनास्थल का मुआयना किया। घटनास्थल पर बाघ के पद चिन्ह मिलने पर उन्होंने रेंजर मैलानी डीएस यादव से बाघ की निगरानी के सख्त निर्देश दिए।
मालूम हो कि सोमवार दोपहर गांव कपरहाकुआ निवासी 13 वर्षीय किशोरी सरस्वती सहेलियों के साथ गांव से सटे जंगल में लकड़ी बीनने गई थी। इस दौरान सुआबोझ ब्लाक वन में झाड़ियों में छिपे बैठे बाघ के हमले से उसकी मौत हो गई थी। सूचना मिलने पर मंगलवार दोपहर डीएफओ साउथ ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। इस दौरान उन्हें ब्लाक वन में बाघ के पद चिन्ह देखकर वहां बाघ मौजूदगी की पुष्टि की है। उन्होंने बातचीत में बताया कि घटना जंगल के अंदर हुई है, इसलिए बाघ हमले में हुई सरस्वती मौत का मुआवजा मिलना संभव नहीं है। डीएफओ ने बताया बावजूद इसके एनजीओ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों से बातचीत के जरिए परिवारीजनों को मुआवजा दिलाने के लिए विभाग प्रयासरत है। कहा वन्यजीव अकारण हमलावर नहीं होते। उन्होंने लोगों से जंगल के अंदर न जाने की अपील के साथ ही सतर्कता बरतने की बात कही है। इस मौके पर रेंजर मैलानी डीएस यादव, फारेस्टर राजेश कुमार, सुदर्शन सिंह, महेश यादव आदि मौजूद रहे।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज की गदनिया बीट के सुआबोझ ब्लाक वन में बाघ हमले से हुई किशोरी की मौत के बाद डीएफओ संजय बिस्वाल ने विभागीय अमले के साथ घटनास्थल का मुआयना किया। घटनास्थल पर बाघ के पद चिन्ह मिलने पर उन्होंने रेंजर मैलानी डीएस यादव से बाघ की निगरानी के सख्त निर्देश दिए।
मालूम हो कि सोमवार दोपहर गांव कपरहाकुआ निवासी 13 वर्षीय किशोरी सरस्वती सहेलियों के साथ गांव से सटे जंगल में लकड़ी बीनने गई थी। इस दौरान सुआबोझ ब्लाक वन में झाड़ियों में छिपे बैठे बाघ के हमले से उसकी मौत हो गई थी। सूचना मिलने पर मंगलवार दोपहर डीएफओ साउथ ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। इस दौरान उन्हें ब्लाक वन में बाघ के पद चिन्ह देखकर वहां बाघ मौजूदगी की पुष्टि की है। उन्होंने बातचीत में बताया कि घटना जंगल के अंदर हुई है, इसलिए बाघ हमले में हुई सरस्वती मौत का मुआवजा मिलना संभव नहीं है। डीएफओ ने बताया बावजूद इसके एनजीओ डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों से बातचीत के जरिए परिवारीजनों को मुआवजा दिलाने के लिए विभाग प्रयासरत है। कहा वन्यजीव अकारण हमलावर नहीं होते। उन्होंने लोगों से जंगल के अंदर न जाने की अपील के साथ ही सतर्कता बरतने की बात कही है। इस मौके पर रेंजर मैलानी डीएस यादव, फारेस्टर राजेश कुमार, सुदर्शन सिंह, महेश यादव आदि मौजूद रहे।
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