फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Assam teenager with his own mix of WhatsApp

व्हाट्सएप ने असम की किशोरी को अपनों से मिलाया

Wed, 03 Aug 2016 09:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Wed, 03 Aug 2016 09:57 PM IST
विज्ञापन
Assam teenager with his own mix of WhatsApp
- फोटो : डेमो फोटो
असम की किशोरी को बेचने का मामला
विज्ञापन

किशोरी ने भी अपने मां-बाप की तस्वीर पहचानी
तीन बार बेची गई थी असम की किशोरी

डेढ़ साल में तीन बार बेची गई सोलह साल की जिस किशोरी को सिस्टम ने स्वाधार गृह में अपने हाल पर छोड़ दिया था, आखिरकार अमर उजाला की पहल ने उसे अपने परिजनों से मिला दिया। अखबार में खबर छपी तो एसपी अखिलेश चौरसिया ने किशोरी के परिवार वालों का पता लगाने की जिम्मेदारी महिला एसओ कमर सुल्ताना को सौंपी। किशोरी की तस्वीर वाट्सएप पर असम पुलिस को भेजी गई। वहां की पुलिस ने इस तस्वीर की कई गांवों में तस्दीक करवाई। एक परिवार ने फोटो देखते ही अपनी बिटिया को पहचान लिया। यही कवायद असम पुलिस ने भी की। उसने किशोरी के मां-बाप और भाई की तस्वीरें वाट्सअप पर यहां भेजी। किशोरी ने जब मां-बाप की तस्वीरें देखीं तो उसके आंसू छलक आए। तीन-चार दिन में असम से उसके परिवारवाले लखीमपुर आ जाएंगे। किशोरी असम के लखीमपुर जिले की है। 
असम की किशोरी दो साल पहले परिवार वालों की रजामंदी से गांव के युवक के साथ दिल्ली में मजदूरी करने गई थी, जहां वह एक महिला के घर में झाड़ू पोंछा करती थी। प्रताड़ना का शिकार हुई तो भाग निकली और दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जिस महिला ने उसे सहारा दिया, उसने उसे गोला गोकर्णनाथ लाकर एक युवक के हवाले कर दिया। युवक ने उसके साथ शादी रचाई और बाद में एक बूढ़े के हाथ बेच दिया। कुछ दिनों बाद उसने भी उसे किसी व्यक्ति को बेच दिया। इस तरह तीन बार बिकने और लगातार प्रताड़ना का शिकार होने वाली युवती को तब मुक्ति मिली, जब खून की कमी के कारण वह बीमार हो गई। उसे पीटकर भगा दिया गया। 16 जुलाई को वह किसी तरह स्थानीय रेलवे स्टेशन पर आ गई थी, जहां जीआरपी ने उसे चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया था और चाइल्ड लाइन ने उसे मानसी स्वाधार गृह में संरक्षण दिलाया था, लेकिन किशोरी को न तो ढंग से इलाज मिला और न ही उसके परिवार वालों को तलाशने की कोशिश की गई। अमर उजाला ने पहली अगस्त को प्रथम पेज पर 'तीन बार बेची गई किशोरी को सिस्टम ने अपने हाल पर छोड़ा शीर्षक से खबर प्रकाशित की। खबर को एसपी ने गंभीरता से लेते हुए महिला एसओ को किशोरी के घर वालों का पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी, जिस पर महिला एसओ ने असम प्रांत की पुलिस से संपर्क साधा और किशोरी की फोटो व्हाट्सअप पर भेजी और उसे अपने परिवार मिल गया। महिला एसओ कमर सुल्ताना ने बताया कि अब किशोरी के परिवारी तीन-चार दिनों में उसे लेने आ रहे हैं। 
विज्ञापन


परिवार वाले तो मिल गए....क्या किशोरी को इंसाफ मिलेगा
तीन बार बेची जाने वाली असम की किशोरी को डेढ़ साल तक प्रताड़ित किया गया। किशोरी के बयानों की मानें तो उसे जिले की ही तहसील गोला गोकर्णनाथ क्षेत्र में रखा गया। अब देखना यह है कि परिवार वालों को पता लगाने वाली पुलिस किशोरी की ओर से मुकदमा दर्ज करेगी। किशोरी को प्रताड़ित करने वालों को भी सजा दिलाएगी, या फिर किशोरी को परिवार वालों के सुपुर्द कर छुट्टी पा ली जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


मानव तस्करी नहीं मान रही पुलिस
किशोरी ने अपनी आपबीती में भले ही खुद को बेचे जाने की बात कह रही है, लेकिन खीरी पुलिस मानव तस्करी नहीं मान रही है। यही वजह है कि पुलिस ने अभी तक मामले को दर्ज नहीं किया है।


किशोरी को परिवार से मिलाना प्राथमिकता
एसपी अखिलेश चौरसिया का कहना है कि किशोरी अभी बहुत कुछ स्पष्ट नहीं बता पा रही है, इसीलिए उसके परिवार वालों को उससे मिलाना उनकी प्राथमिकता में है। परिवार वालों के सामने यदि वह प्रताड़ना अथवा कोई अन्य आरोप लगाती है तो दोषियों की तलाश कर उन पर कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed