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29 पशु बरामद, चार की मौत
मोहम्मदी/मैगलगंज
Updated Sun, 30 Aug 2015 07:44 PM IST
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हत्या के लिए गोवंशीय पशुओं से भरे दस टायरा ट्रक को पुलिस ने पकड़ लिया। इस ट्रक से 29 पशु बरामद किए। हमेशा की तरह इस बार भी पशु तस्कर पुलिस के हाथ नहीं लगे। उधर मोहम्मदी पुलिस ने ट्रक के अंदर भूसे की तरह मुंह और पैर बांधकर भरे गए पशुओं का बंधनमुक्त तक नहीं कराया और ट्रक को 38 किलोमीटर दूर मैगलगंज क्षेत्र में स्थित मढ़ियाघाट गोशाला रवाना कर दिया, जिससे चार पशुओं की मौत हो गई। जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो ट्रक रोक लिया और पशुओं को बंधनमुक्त करने की मांग की। बाद में 25 पशुओं को गोसदन बरवर के सुपुर्द किया गया। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ गोवध अधिनियम तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज की है।
प्रभारी कोतवाल मोहम्मदी आनंद शाही ने बताया कि शनिवार की रात सूचना मिली कि पुवायां बैरियर से पहले बंद पड़े पेट्रोल पंप से तुरकहटा हट जाने वाले मार्ग से ट्रक जा रहा है। सूचना पर एसएसआई रामसिंह पंवार और दरोगा अतुल कुमार आदि ने शनिवार रात ढाई बजे ट्रक का पीछा करके उसे रोकने का प्रयास किया। चालक ने पुलिस को देखते ही ट्रक भगा दिया और पुलिस टीम को रौंदने का प्रयास किया, लेकिन ट्रक कच्चे मार्ग पर फंस गया तो चालक मौका पाकर फरार हो गया। पुलिस ने गोला मार्ग से जा रहे एक अन्य ट्रक के डाइवर को ले जाकर फंसे पड़ ट्रक को निकलवाया और उसमें 29 पशुओं को बरामद किया। बाद में पुलिस वाले पशुओं को मैगलगंज थाना क्षेत्र के मढ़ियाघाट गोशाला ले गए। उधर ग्रामीणों ने पशुओं से भरे ट्रक को रेलवे फाटक पर रोक लिया। ग्रामीणों ने पशुओं की हालत पर पुलिस को खूब खरीखोटी सुनाई। इधर, पुलिस के घेराव की सूचना पर मैगलगंज एसओ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने मोहम्मदी के दरोगा पर रिवाल्वर तानने का आरोप लगाया। बाद में पशुओं को गोसदन बरवर ले जाने के आश्वासन पर लोग माने। इस बीच चार पशुओं की मौत हो गई।
कोतवाली प्रभारी आनंद कुमार शाही ने बताया कि सरकारी काम से जिले से बाहर था। पुलिस को पहले पशुओं को सुरक्षित करना चाहिए था यदि ऐसा नहीं किया है और कोई लापरवाही की गई है तो मामले की जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
इन्होंने जताया विरोध
भाजपा युवा नेता श्याम किशोर अवस्थी, माले नेता क्रांति कुमार सिंह भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए। कई घंटों तक भूखे प्यासे बंधे कुल 29 पशुओं में से चार की मौत के लिए उन्होंने मोहम्मदी पुलिस को दोषी करार दिया।
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पशुओं को देखा तक नहीं
29 पशुओं की बरामदगी का काम नि:संदेह अच्छा है, लेकिन जिस हालत में पशु ट्रक के अंदर बंधे पड़े थे। उन्हें शायद पुलिस ने देखा तक नहीं वरना कोई भी संवेदनशील व्यक्ति पहले उन्हें बंधनमुक्त करता, फिर चारा-पानी की व्यवस्था होती इसके बाद ही पशुओं को गोसदन भेजा जाता। इसे पुलिस की अमानवीयता ही कहेंगे कि सभी पशुओं को उसी हालत में 38 किलोमीटर दूर ट्रक से भेज दिया। इतने लंबे समय तक बंधे रहने से जहां अधिकतर पशुओं की हालत गंभीर हो गई, वहीं चार ने दम तोड़ दिया।
क्यों नहीं पकड़े जाते पशु तस्कर
पशुओं की बरामदगी के अधिकतर मामलों में पशु तस्कर क्यों नहीं पकड़े जाते। अक्सर ट्रकों के फंसने या खराब होने पर पशुओं की बरामदगी होती है या फिर सूचना पर पुलिस उन्हें घेरती है तो वह अंधेरे का लाभ लेकर भाग जाते हैं और पशु बरामद हो जाते हैं। अब या तो पुलिस को पशु तस्करों की सूचना ही नहीं मिल पाती या फिर उसकी मिलीभगत होती है। इसके अलावा कुछ और नहीं हो सकता। फिलहाल यह जांच का मामला है और इस पर कार्रवाई हो तो पशु तस्करी पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
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प्रभारी कोतवाल मोहम्मदी आनंद शाही ने बताया कि शनिवार की रात सूचना मिली कि पुवायां बैरियर से पहले बंद पड़े पेट्रोल पंप से तुरकहटा हट जाने वाले मार्ग से ट्रक जा रहा है। सूचना पर एसएसआई रामसिंह पंवार और दरोगा अतुल कुमार आदि ने शनिवार रात ढाई बजे ट्रक का पीछा करके उसे रोकने का प्रयास किया। चालक ने पुलिस को देखते ही ट्रक भगा दिया और पुलिस टीम को रौंदने का प्रयास किया, लेकिन ट्रक कच्चे मार्ग पर फंस गया तो चालक मौका पाकर फरार हो गया। पुलिस ने गोला मार्ग से जा रहे एक अन्य ट्रक के डाइवर को ले जाकर फंसे पड़ ट्रक को निकलवाया और उसमें 29 पशुओं को बरामद किया। बाद में पुलिस वाले पशुओं को मैगलगंज थाना क्षेत्र के मढ़ियाघाट गोशाला ले गए। उधर ग्रामीणों ने पशुओं से भरे ट्रक को रेलवे फाटक पर रोक लिया। ग्रामीणों ने पशुओं की हालत पर पुलिस को खूब खरीखोटी सुनाई। इधर, पुलिस के घेराव की सूचना पर मैगलगंज एसओ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने मोहम्मदी के दरोगा पर रिवाल्वर तानने का आरोप लगाया। बाद में पशुओं को गोसदन बरवर ले जाने के आश्वासन पर लोग माने। इस बीच चार पशुओं की मौत हो गई।
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कोतवाली प्रभारी आनंद कुमार शाही ने बताया कि सरकारी काम से जिले से बाहर था। पुलिस को पहले पशुओं को सुरक्षित करना चाहिए था यदि ऐसा नहीं किया है और कोई लापरवाही की गई है तो मामले की जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।
इन्होंने जताया विरोध
भाजपा युवा नेता श्याम किशोर अवस्थी, माले नेता क्रांति कुमार सिंह भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए। कई घंटों तक भूखे प्यासे बंधे कुल 29 पशुओं में से चार की मौत के लिए उन्होंने मोहम्मदी पुलिस को दोषी करार दिया।
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पशुओं को देखा तक नहीं
29 पशुओं की बरामदगी का काम नि:संदेह अच्छा है, लेकिन जिस हालत में पशु ट्रक के अंदर बंधे पड़े थे। उन्हें शायद पुलिस ने देखा तक नहीं वरना कोई भी संवेदनशील व्यक्ति पहले उन्हें बंधनमुक्त करता, फिर चारा-पानी की व्यवस्था होती इसके बाद ही पशुओं को गोसदन भेजा जाता। इसे पुलिस की अमानवीयता ही कहेंगे कि सभी पशुओं को उसी हालत में 38 किलोमीटर दूर ट्रक से भेज दिया। इतने लंबे समय तक बंधे रहने से जहां अधिकतर पशुओं की हालत गंभीर हो गई, वहीं चार ने दम तोड़ दिया।
क्यों नहीं पकड़े जाते पशु तस्कर
पशुओं की बरामदगी के अधिकतर मामलों में पशु तस्कर क्यों नहीं पकड़े जाते। अक्सर ट्रकों के फंसने या खराब होने पर पशुओं की बरामदगी होती है या फिर सूचना पर पुलिस उन्हें घेरती है तो वह अंधेरे का लाभ लेकर भाग जाते हैं और पशु बरामद हो जाते हैं। अब या तो पुलिस को पशु तस्करों की सूचना ही नहीं मिल पाती या फिर उसकी मिलीभगत होती है। इसके अलावा कुछ और नहीं हो सकता। फिलहाल यह जांच का मामला है और इस पर कार्रवाई हो तो पशु तस्करी पर काफी हद तक रोक लग सकती है।