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न जानकारी दी, न बरामद माल की कराई शिनाख्त

Tue, 13 Feb 2018 07:16 PM IST
Updated Tue, 13 Feb 2018 07:16 PM IST
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न जानकारी दी, न बरामद माल की कराई शिनाख्त
मुकदमाती
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13 एलकेएच 7

न जानकारी दी, न बरामद
माल की कराई शिनाख्त
एएसपी से मिलकर पीड़ित ने डकैती के खुलासे पर उठाए सवाल
पिपरिया और चंदपुरा में हुई वारदातों के खुलासे का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
लखीमपुर खीरी।
पिपरिया गांव में पड़ी लाखों की डकैती का खुलासा करने का दावा पुलिस कर रही है, लेकिन पीड़ित को इसकी जानकारी नहीं है। पुलिस ने न तो बदमाशों के पास से बरामद माल की शिनाख्त मुकदमा वादी से कराई और न ही उसे कोई जानकारी दी। पीड़ित को आशंका है कि पुलिस ने गुडवर्क दिखाने के लिए फर्जी खुलासा कर दिया है। पीड़ित ने मंगलवार को एएसपी से मिलकर पुलिस के कथित खुलासे पर सवाल उठाए हैं।
पांच फरवरी 17 को गांव चंदपुरा निवासी रफीक के घर चोरी और नौ दिंसबर 17 को बदमाशों ने एलआरपी पुलिस चौकी क्षेत्र में गांव पिपरिया निवासी मुनीष कुमार वर्मा के घर में डकैती डाली थी। पुलिस ने दोनों मामलों में चोरी की रिपोर्ट दर्ज की थी। 11 फरवरी को सदर कोतवाली पुलिस ने नाटकीय ढंग से दोनों घटनाओं का खुलासा कर दिया था। सदर कोतवाल अशोक कुमार पांडेय ने दावा किया था कि दोनों घटनाएं कोतवाली सदर के गांव अंसारीपुरवा मौजा चंदपुरा निवासी राका उर्फ अंसार और थाना खीरी के गांव लगुचा निवासी करन राज ने अपने तीन अन्य साथियों के साथ मिलकर की थीं। पुलिस ने दोनों के कब्जे से दो-दो जोड़ी पायल, 2500 रुपये की नकदी और एक तमंचा बरामद किया था। अमर उजाला ने 12 फरवरी के अंक में पेज संख्या चार पर ‘जांच हो तो बरामद पायलों से खुल सकता है खुलासे का खेल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित करते हुए सवाल उठाए थे। मंगलवार को गांव पिपरिया निवासी मुनीष कुमार वर्मा एसपी दफ्तर पहुंचे। एसपी के अवकाश पर होने के कारण वह एएसपी घनश्याम चौरसिया से मिले और उन्हें पूरी बात बताई। पीड़ित ने बताया कि पुलिस ने उन्हें खुलासा होने की जानकारी तक नहीं दी और न ही बरामद माल की शिनाख्त कराई। उन्होंने कई सवाल उठाते हुए खुलासे को संदिग्ध बताया और सही जांच कराने की मांग की।
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... तो क्या किए गए फर्जी दस्तखत
एक इंस्पेक्टर के मुताबिक पुलिस जब कोई माल बरामद कर घटना का खुलासा करती है, तो पुलिस वादी को बुलाकर माल की शिनाख्त कराती है। शिनाख्त होने के बाद माल सील होने पर उस पर आरोपी और माल मालिक के साथ पकड़ने वाले अफसर के हस्ताक्षर होते हैं। पीड़ित मुनीष कुमार वर्मा की माने तो उसे कोतवाली बुलाया ही नहीं गया तो फिर माल पर उसके दस्तखत कैसे हो गए? इससे फर्जी दस्तखत बनाने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि इंस्पेक्टर सदर अशोक कुमार पांडेय बताते हैं कि जिस दिन खुलासा हुआ, उस दिन मुकदमा वादी मुनीष वर्मा पूरे दिन कोतवाली में मौजूद रहे। पुलिस ने उनसे ही माल पर दस्तखत कराए हैं।
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पुलिस के बचाव
में दिखे एएसपी
एएसपी घनश्याम चौरसिया सदर कोतवाली पुलिस के बचाव में पूरी तरह से नजर आए। उनसे जब खुलासे को लेकर उठे सवालों के बावत पूछा गया तो उन्होंने पहले तो ऐसी किसी शिकायत आने से इंकार कर दिया। बाद में बोले, शिकायती पत्र आया होगा तो मार्क कर दिया होगा। मुकदमा वादी यदि संतुष्ट नहीं है, तो इंस्पेक्टर को बुलाकर मुकदमा वादी को आमने-सामने कराएंगे।
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