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वसूली एक्सप्रेस बनकर रह गई हैं पीआरवी
Updated Fri, 29 Sep 2017 11:52 PM IST
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Police
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लखीमपुर खीरी।
जिले में जहां यूपी 100 की पीआरवी प्रदेश में अपना नाम कर रही हैं तो वहीं कुछ पीआरवी ऐसी हैं जो सिर्फ वसूली एक्सप्रेस बनकर रह गई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो थाना सिंगाही और कोतवाली तिकुनियां क्षेत्र में यूपी 100 की पीआरवी रात में न तो हूटर बजाती हैं और न ही लाइट बार जलाती हैं। अवैध खनन का मामला हो या फिर अन्य मामले। आरोप है कि यूपी 100 की पीआरवी आरोपी पक्ष से ही पैसा लेकर दबाव बनाकर दोनों पक्षों में समझौता करा देती है। इसकी शिकायत भी लोगों ने यूपी 100 के डीआईजी लखनऊ को भेजी है।
यूपी 100 शासन का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके लागू होने के बाद लोगों में सुरक्षा का भाव जागा था, लेकिन कुछ पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण पुलिस की यह सेवा सवालों के घेरे में आ गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कस्बा बेलरायां में यूपी 100 की पीआरवी के चालक और स्टॉप लाइट बार रात में बंद रखते हैं। इसके अलावा रात में भी हूटर नहीं बजाते। लाइट बार बंद होने और हूटर न बजने से अपराधियों भी बेखौफ रहते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सिंगाही और बेलरायां क्षेत्र की पीआरवी रात में अवैध खनन कर मिट्टी, रेत लेकर आने वाली ट्रैक्टर-ट्रालियों के पीछे चलती हैं। इतना ही नहीं छोटे-मोटे विवादों की सूचना पर पहुंचकर आरोपी पक्ष से डील कर पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाकर समझौता करा देते हैं। कस्बे के कुछ जागरूक लोगों ने इसकी शिकायत पत्र भेजकर यूपी 100 लखनऊ के डीआईजी से भी की है।
आला अफसरों के न आने का उठाते हैं लाभ
जिला मुख्यालय से कोतवाली तिकुनियां करीब 75 किलोमीटर दूर है, जबकि सिंगाही 60 किलोमीटर पर स्थित है। अधिक दूरी होने के कारण रात में एसपी या एएसपी रेंडम चेकिंग नहीं कर पाते। इसका पीआरवी के कर्मचारी पूरा लाभ उठाते हैं और अपनी मनमानी करते हैं।
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खनन माफिया के सामने महकमा लाचार
तहसील निघासन क्षेत्र में अभी तक खनन का पट्टा नहीं हो सका है। खनन माफिया राजस्व अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर रेत और मिट्टी का खनन करते हैं। वर्तमान समय से ग्राम पंचायत मोतीपुर के मजरा भौका और ग्राम पंचायत मांझा के पास से बड़े पैमाने पर रेत और मिट्टी का खनन जारी है। बताते हैं कि ग्राम सिंगहाखुर्द, माझा और मोतीपुर के कुछ खनन माफियाओं को पुलिस और हल्का लेखपालों का संरक्षण प्राप्त है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
अगर पीआरवी मूवमेंट पर है तो उसे हूटर और लाइट बार का उपयोग करना चाहिए। खनन में संलिप्तता होने की उन्हें जानकारी नहीं है। आज ही इसे मैं स्वयं देखता हूं।
- सविरत्न गौतम, सीओ निघासन
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जिले में जहां यूपी 100 की पीआरवी प्रदेश में अपना नाम कर रही हैं तो वहीं कुछ पीआरवी ऐसी हैं जो सिर्फ वसूली एक्सप्रेस बनकर रह गई हैं। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो थाना सिंगाही और कोतवाली तिकुनियां क्षेत्र में यूपी 100 की पीआरवी रात में न तो हूटर बजाती हैं और न ही लाइट बार जलाती हैं। अवैध खनन का मामला हो या फिर अन्य मामले। आरोप है कि यूपी 100 की पीआरवी आरोपी पक्ष से ही पैसा लेकर दबाव बनाकर दोनों पक्षों में समझौता करा देती है। इसकी शिकायत भी लोगों ने यूपी 100 के डीआईजी लखनऊ को भेजी है।
यूपी 100 शासन का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके लागू होने के बाद लोगों में सुरक्षा का भाव जागा था, लेकिन कुछ पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण पुलिस की यह सेवा सवालों के घेरे में आ गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कस्बा बेलरायां में यूपी 100 की पीआरवी के चालक और स्टॉप लाइट बार रात में बंद रखते हैं। इसके अलावा रात में भी हूटर नहीं बजाते। लाइट बार बंद होने और हूटर न बजने से अपराधियों भी बेखौफ रहते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सिंगाही और बेलरायां क्षेत्र की पीआरवी रात में अवैध खनन कर मिट्टी, रेत लेकर आने वाली ट्रैक्टर-ट्रालियों के पीछे चलती हैं। इतना ही नहीं छोटे-मोटे विवादों की सूचना पर पहुंचकर आरोपी पक्ष से डील कर पीड़ित पक्ष पर दबाव बनाकर समझौता करा देते हैं। कस्बे के कुछ जागरूक लोगों ने इसकी शिकायत पत्र भेजकर यूपी 100 लखनऊ के डीआईजी से भी की है।
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आला अफसरों के न आने का उठाते हैं लाभ
जिला मुख्यालय से कोतवाली तिकुनियां करीब 75 किलोमीटर दूर है, जबकि सिंगाही 60 किलोमीटर पर स्थित है। अधिक दूरी होने के कारण रात में एसपी या एएसपी रेंडम चेकिंग नहीं कर पाते। इसका पीआरवी के कर्मचारी पूरा लाभ उठाते हैं और अपनी मनमानी करते हैं।
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खनन माफिया के सामने महकमा लाचार
तहसील निघासन क्षेत्र में अभी तक खनन का पट्टा नहीं हो सका है। खनन माफिया राजस्व अधिकारियों और पुलिस की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर रेत और मिट्टी का खनन करते हैं। वर्तमान समय से ग्राम पंचायत मोतीपुर के मजरा भौका और ग्राम पंचायत मांझा के पास से बड़े पैमाने पर रेत और मिट्टी का खनन जारी है। बताते हैं कि ग्राम सिंगहाखुर्द, माझा और मोतीपुर के कुछ खनन माफियाओं को पुलिस और हल्का लेखपालों का संरक्षण प्राप्त है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
अगर पीआरवी मूवमेंट पर है तो उसे हूटर और लाइट बार का उपयोग करना चाहिए। खनन में संलिप्तता होने की उन्हें जानकारी नहीं है। आज ही इसे मैं स्वयं देखता हूं।
- सविरत्न गौतम, सीओ निघासन