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अतिक्रमण में फंसा जंगल, बाघ खेतों में मना रहे मंगल
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जंगल में अतिक्रमण, खेतों में बाघ
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन एरिया का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण के शिकंजे में है। बाघों के घर यानि जंगल पर माफिया कब्जा कर खेती कर रहे हैं। जबकि बाघ जंगल से निकलकर खेतों में विचरण कर रहे हैं। वनभूमि पर अतिक्रमण का यह हाल है कि बफर जोन के पलिया रेंज के पूरे के पूरे वन ब्लॉक की भूमि पर अवैध कब्जा है। वन विभाग कब्जा हटाने के तमाम जतन कर रहा है लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में नौ रेंज हैं। इनमें वनभूमि पर अतिक्रमण के मामले में पलिया रेंज सबसे ऊपर है। दूसरे नंबर पर संपूर्णानगर है। इन दोनों रेंजों की वनभूमि दो जिलों पीलीभीत और खीरी जिले के बीच फंसी हुई है। खीरी जिले के संपूर्णानगर रेंज की अधिकांश वनभूमि पीलीभीत जिले की है। कब्जा हटाने के दौरान दोनों जिलों के बीच समन्वय नहीं बन रहा है।
वनभूमि पर अतिक्रमण का यह हाल है कि पलिया रेंज के कई ऐसे वन ब्लॉक हैं जिनकी समूची वन भूमि पर अतिक्रमण है। पलिया के ऐठपुर वन ब्लॉक की 737.742 हेक्टेयर भूमि में से 737.740 हैक्टेयर भूमि अवैध कब्जे में फंसी है। हरीनगर वन ब्लॉक में कुल 448.480 हेक्टेयर वनभूमि है और यह पूरी की पूरी अवैध कब्जे में है। बाजपुर की 307.220 हेक्टेयर की पूरी भूमि पर माफिया कब्जा कर खेती कर रहे हैं। संपूर्णानगर रेंज की कुल 7309 हेक्टेयर वनभूमि में से 2361 हेक्टेयर वनभूमि अवैध कब्जेदारों के शिकंजे में है।
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इंसेट......
तीस साल से है वन भूमि पर अवैध कब्जा
गंगासागर परियोजना से विस्थापित हुए लोगों को संपूर्णानगर में बसाने के लिए वन विभाग ने 1991 में सिंचाई विभाग को 3000 हेक्टेयर वनभूमि दी थी। खीरी पीलीभीत उपनिवेशन योजना के तहत 168 लोगों को बसाया जाना था। लेकिन इससे ज्यादा लोग यहां आ गए और दी गई भूमि की आड़ में इससे कई गुना भूमि पर कब्जा कर लिया और खेती करना शुरू कर दिया जब वन विभाग ने वनभूमि खाली कराने का प्रयास किया तो यह लोग कोर्ट चले गए। अधिकांश वन भूमि कोर्ट के पचड़े में फंस कर रह गई है। इसे खाली कराने में वनविभाग के पसीने छूट रहे हैं।
लखीमपुर खीरी। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन एरिया का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण के शिकंजे में है। बाघों के घर यानि जंगल पर माफिया कब्जा कर खेती कर रहे हैं। जबकि बाघ जंगल से निकलकर खेतों में विचरण कर रहे हैं। वनभूमि पर अतिक्रमण का यह हाल है कि बफर जोन के पलिया रेंज के पूरे के पूरे वन ब्लॉक की भूमि पर अवैध कब्जा है। वन विभाग कब्जा हटाने के तमाम जतन कर रहा है लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन में नौ रेंज हैं। इनमें वनभूमि पर अतिक्रमण के मामले में पलिया रेंज सबसे ऊपर है। दूसरे नंबर पर संपूर्णानगर है। इन दोनों रेंजों की वनभूमि दो जिलों पीलीभीत और खीरी जिले के बीच फंसी हुई है। खीरी जिले के संपूर्णानगर रेंज की अधिकांश वनभूमि पीलीभीत जिले की है। कब्जा हटाने के दौरान दोनों जिलों के बीच समन्वय नहीं बन रहा है।
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वनभूमि पर अतिक्रमण का यह हाल है कि पलिया रेंज के कई ऐसे वन ब्लॉक हैं जिनकी समूची वन भूमि पर अतिक्रमण है। पलिया के ऐठपुर वन ब्लॉक की 737.742 हेक्टेयर भूमि में से 737.740 हैक्टेयर भूमि अवैध कब्जे में फंसी है। हरीनगर वन ब्लॉक में कुल 448.480 हेक्टेयर वनभूमि है और यह पूरी की पूरी अवैध कब्जे में है। बाजपुर की 307.220 हेक्टेयर की पूरी भूमि पर माफिया कब्जा कर खेती कर रहे हैं। संपूर्णानगर रेंज की कुल 7309 हेक्टेयर वनभूमि में से 2361 हेक्टेयर वनभूमि अवैध कब्जेदारों के शिकंजे में है।
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तीस साल से है वन भूमि पर अवैध कब्जा
गंगासागर परियोजना से विस्थापित हुए लोगों को संपूर्णानगर में बसाने के लिए वन विभाग ने 1991 में सिंचाई विभाग को 3000 हेक्टेयर वनभूमि दी थी। खीरी पीलीभीत उपनिवेशन योजना के तहत 168 लोगों को बसाया जाना था। लेकिन इससे ज्यादा लोग यहां आ गए और दी गई भूमि की आड़ में इससे कई गुना भूमि पर कब्जा कर लिया और खेती करना शुरू कर दिया जब वन विभाग ने वनभूमि खाली कराने का प्रयास किया तो यह लोग कोर्ट चले गए। अधिकांश वन भूमि कोर्ट के पचड़े में फंस कर रह गई है। इसे खाली कराने में वनविभाग के पसीने छूट रहे हैं।