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वन विभाग की भूमि राजस्व अभिलेखों में दूसरों के नाम
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक ने एसडीएम पूरनपुर को लिखा कड़ा पत्र, अमल दरामद की कार्रवाई करने को कहा
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के संपूर्णानगर रेंज अतंर्गत टाटरगंज में करीब 2058.831 हेक्टेयर वन भूमि राजस्व अभिलेखों में दूसरे के नाम दर्ज होने पर वन विभाग ने कड़ी आपत्ति जताई है। उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने एसडीएम पूरनपुर (पीलीभीत) को एक कड़ा पत्र लिखकर अतिक्रमित भूमि को वन विभाग के नाम अमल दरामद करने को कहा है। उन्होंने पत्र में उच्च न्यायालय के आदेश का भी हवाला दिया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की संपूर्णानगर रेंज का कुछ हिस्सा पीलीभीत जिले के पूरनपुर तहसील में पड़ता है। इस रेंज की 2058.831 हेक्टेयर वन भूमि पर स्थानीय लोगों ने कब्जा कर रखा है। यहीं नहीं राजस्व विभाग से सांठगांठ कर अवैध कब्जेदारों ने भूमि के कई हिस्सों पर अपना नाम भी राजस्व अभिलखों में दर्ज करा लिया है। इस संबध में डीटीआर के डीडी डॉ अनिल कुमार पटेल पहले भी एसडीएम पूरनपुर को पत्र लिख चुके हैं। बावजूद इसके एसडीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की। हाल ही में उन्होंने एक और पत्र एसडीएम को लिखकर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि समस्त अतिक्रमित वन भूमि से अवैध कब्जेदारों के नाम खारिज कर वन विभाग के नाम अमल दरामद कराएं। उन्होंने इस संबंध में उच्च न्यायालय के पूर्व में किए गए आदेश का हवाला दिया है और आदेश की प्रति भी संलग्न की है।
मालूम हो कि दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के संपूर्णानगर रेंज की अधिकतर वन भूमि पर अवैध कब्जेदारों ने कब्जा कर रखा है और उस पर खेती-बाड़ी कर रहे हैं। कई मामले उच्च न्यायालय में लंबित हैं। जिसके चलते वन भूमि को खाली कराना वन विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इतना ही नहीं इस अवैध कब्जे में राजस्व विभाग की मिलीभगत भी सामने आई है। जिसके चलते राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने तमाम वन भूमि को राजस्व अभिलेखों में अवैध कब्जेदारों के नाम दर्ज कर दिया है।
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मालूम हो कि आजादी के बाद खीरी-पीलीभीत उपनिवेशन योजना के तहत विस्थापित 162 परिवार के लोगों को पुनर्वासित करने के लिए वन विभाग ने 1200 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग को सौंपी थी। जिस पर निर्धारित संख्या में लोगों को बसाने की योजना थी लेकिन निर्धारित संख्या से अधिक लोग वहां आकर बस गए और 1200 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर खेती-बाड़ी करने लगे। उस समय वन विभाग ने इस भूमि को खाली कराने के कोई प्रयास नहीं किए। जिससे अवैध कब्जेदार अपने को कब्जे की भूमि का मालिक समझने लगे। दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन में संपूर्णानगर रेंज के शामिल होने के बाद अब इस वन भूमि खाली कराने के प्रयासों में तेजी आई है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की संपूर्णानगर रेंज में अतिक्रमित वन भूमि पर राजस्व अभिलेखों में अवैध कब्जेदारों के नाम हटाकर वन विभाग के नाम अमल दरामद करने का एसडीएम पूरनपुर (पीलीभीत) से अनुरोध किया गया है। उम्मीद है कि जल्दी ही अतिक्रमिति भूमि वन विभाग के नाम दर्ज हो जाएगी।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक के पत्र के अनुरूप वन भूमि का राजस्व अभिलेखों में अंकन कराया जा रहा है। जल्दी ही यह प्रकिया पूरी हो जाएगी।
- चंद्रभानु सिंह एसडीएम, पूरनपुर (पीलीभीत)
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बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के संपूर्णानगर रेंज अतंर्गत टाटरगंज में करीब 2058.831 हेक्टेयर वन भूमि राजस्व अभिलेखों में दूसरे के नाम दर्ज होने पर वन विभाग ने कड़ी आपत्ति जताई है। उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने एसडीएम पूरनपुर (पीलीभीत) को एक कड़ा पत्र लिखकर अतिक्रमित भूमि को वन विभाग के नाम अमल दरामद करने को कहा है। उन्होंने पत्र में उच्च न्यायालय के आदेश का भी हवाला दिया है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की संपूर्णानगर रेंज का कुछ हिस्सा पीलीभीत जिले के पूरनपुर तहसील में पड़ता है। इस रेंज की 2058.831 हेक्टेयर वन भूमि पर स्थानीय लोगों ने कब्जा कर रखा है। यहीं नहीं राजस्व विभाग से सांठगांठ कर अवैध कब्जेदारों ने भूमि के कई हिस्सों पर अपना नाम भी राजस्व अभिलखों में दर्ज करा लिया है। इस संबध में डीटीआर के डीडी डॉ अनिल कुमार पटेल पहले भी एसडीएम पूरनपुर को पत्र लिख चुके हैं। बावजूद इसके एसडीएम ने कोई कार्रवाई नहीं की। हाल ही में उन्होंने एक और पत्र एसडीएम को लिखकर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि समस्त अतिक्रमित वन भूमि से अवैध कब्जेदारों के नाम खारिज कर वन विभाग के नाम अमल दरामद कराएं। उन्होंने इस संबंध में उच्च न्यायालय के पूर्व में किए गए आदेश का हवाला दिया है और आदेश की प्रति भी संलग्न की है।
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मालूम हो कि दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के संपूर्णानगर रेंज की अधिकतर वन भूमि पर अवैध कब्जेदारों ने कब्जा कर रखा है और उस पर खेती-बाड़ी कर रहे हैं। कई मामले उच्च न्यायालय में लंबित हैं। जिसके चलते वन भूमि को खाली कराना वन विभाग के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। इतना ही नहीं इस अवैध कब्जे में राजस्व विभाग की मिलीभगत भी सामने आई है। जिसके चलते राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने तमाम वन भूमि को राजस्व अभिलेखों में अवैध कब्जेदारों के नाम दर्ज कर दिया है।
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मालूम हो कि आजादी के बाद खीरी-पीलीभीत उपनिवेशन योजना के तहत विस्थापित 162 परिवार के लोगों को पुनर्वासित करने के लिए वन विभाग ने 1200 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग को सौंपी थी। जिस पर निर्धारित संख्या में लोगों को बसाने की योजना थी लेकिन निर्धारित संख्या से अधिक लोग वहां आकर बस गए और 1200 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर खेती-बाड़ी करने लगे। उस समय वन विभाग ने इस भूमि को खाली कराने के कोई प्रयास नहीं किए। जिससे अवैध कब्जेदार अपने को कब्जे की भूमि का मालिक समझने लगे। दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन में संपूर्णानगर रेंज के शामिल होने के बाद अब इस वन भूमि खाली कराने के प्रयासों में तेजी आई है।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की संपूर्णानगर रेंज में अतिक्रमित वन भूमि पर राजस्व अभिलेखों में अवैध कब्जेदारों के नाम हटाकर वन विभाग के नाम अमल दरामद करने का एसडीएम पूरनपुर (पीलीभीत) से अनुरोध किया गया है। उम्मीद है कि जल्दी ही अतिक्रमिति भूमि वन विभाग के नाम दर्ज हो जाएगी।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक के पत्र के अनुरूप वन भूमि का राजस्व अभिलेखों में अंकन कराया जा रहा है। जल्दी ही यह प्रकिया पूरी हो जाएगी।
- चंद्रभानु सिंह एसडीएम, पूरनपुर (पीलीभीत)