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कम्प्यूटर नहीं खाताबही चलाता था बैंक मित्र रोहित
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धौरहरा। इलाहाबाद बैंक की कफारा की लघु शाखा का बैंकमित्र खुद को खाताधारकों से बैंक मैनेजर बताया करता था। इनके खातों का लेनदेन एक रजिस्टर पर करता था। पासबुक पर हाथ से जमा व निकासी दर्ज करता था। यह खेल लगभग दो साल चला। हर छमाही बैंकों के आडिट करने वाले अधिकारियों की नजर से भी वह बच गया। बैंक अफसर सब कुछ जानने के बाद भी अनजान बने रहे। रोहित ने तमाम खाताधारकों को लाखों का चूना लगा दिया।
इलाहाबाद बैंक में बैंक मित्र रोहित उर्फ रोमी के मामले में खाताधारकों ने एक बड़ा खुलासा खुलासा किया है। खाताधारक रामविलास रामलखन महिपाल सिंह आदि ने बताया कि रोहित ने शाखा प्रबंधक बताकर उनसे रुपये जमा कराए। वह रजिस्टर पर जमा और निकासी की रकम दर्ज कर हस्ताक्षर कराकर बैंक पासबुक पर हाथ से ही लिखता था। जब कोई खाताधारक उससे कंप्यूटर से प्रिंट कराने की बात कहता तो प्रिंटर खराब होने का बहाना बनाकर पास बुक भी रख लेता था। फिर दूसरे दिन पासबुक ले जाने को कहता था। दो वर्षों में रोहित उर्फ रोमी ने 20 लाख से अधिक की रकम खातों में हेराफेरी कर निकाल ली।
ऑडिट में भी नही पकड़ में आया गबन
धौरहरा। सूत्रों की मानें तो हर बैंक अपनी शाखाओं में हर तिमाही ऑडिट कराती हैं। बैंक मित्र के लेनदेन का भी लेखा जोखा प्रिंटर रसीद शाखा प्रबंधक हर महीने देखते हैं। कफारा की अति लघु शाखा मे ऐसी क्या वजह रही कि रोहित उर्फ रोमी दो वर्षों से एक रजिस्टर पर ही लेनदेन करता रहा। इसकी भनक बैंक के शाखा प्रबंधक को क्यों नहीं लग सकी।
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हम हर महीने बीसी केंद्र का निरीक्षण करते थे। हाथ से लिखी पासबुक सामने आई तो जांच शुरू की। उसी समय खातों में हेराफेरी का पता चला। बैंक मित्र रोहित को शाखा बुलाया गया तो वह भाग गया। कुल 21 खाताधारकों का पैसा वापस करवाया गया। बाकी को कार्यदायी संस्था विजन इंडिया पैसा वसूली कर वापस करेंगी। आगे की कार्रवाई भी विजन इंडिया के लोग ही कराएंगे। -मोहम्मद शोएब, शाखा प्रबंधक, रमियाबेहड़।
खातों में हेराफेरी का मामला सिद्ध हो चुका है। रोहित ने जिनका पैसा गायब किया है, हमारी प्राथमिकता है कि पहले वह खाताधारकों को वापस हो। बाद में जो विधिक प्रक्रिया होगी. की जाएगी। -अरविंद कुमार, सुपरवाइजर, विजन इंडिया।
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इलाहाबाद बैंक में बैंक मित्र रोहित उर्फ रोमी के मामले में खाताधारकों ने एक बड़ा खुलासा खुलासा किया है। खाताधारक रामविलास रामलखन महिपाल सिंह आदि ने बताया कि रोहित ने शाखा प्रबंधक बताकर उनसे रुपये जमा कराए। वह रजिस्टर पर जमा और निकासी की रकम दर्ज कर हस्ताक्षर कराकर बैंक पासबुक पर हाथ से ही लिखता था। जब कोई खाताधारक उससे कंप्यूटर से प्रिंट कराने की बात कहता तो प्रिंटर खराब होने का बहाना बनाकर पास बुक भी रख लेता था। फिर दूसरे दिन पासबुक ले जाने को कहता था। दो वर्षों में रोहित उर्फ रोमी ने 20 लाख से अधिक की रकम खातों में हेराफेरी कर निकाल ली।
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धौरहरा। सूत्रों की मानें तो हर बैंक अपनी शाखाओं में हर तिमाही ऑडिट कराती हैं। बैंक मित्र के लेनदेन का भी लेखा जोखा प्रिंटर रसीद शाखा प्रबंधक हर महीने देखते हैं। कफारा की अति लघु शाखा मे ऐसी क्या वजह रही कि रोहित उर्फ रोमी दो वर्षों से एक रजिस्टर पर ही लेनदेन करता रहा। इसकी भनक बैंक के शाखा प्रबंधक को क्यों नहीं लग सकी।
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हम हर महीने बीसी केंद्र का निरीक्षण करते थे। हाथ से लिखी पासबुक सामने आई तो जांच शुरू की। उसी समय खातों में हेराफेरी का पता चला। बैंक मित्र रोहित को शाखा बुलाया गया तो वह भाग गया। कुल 21 खाताधारकों का पैसा वापस करवाया गया। बाकी को कार्यदायी संस्था विजन इंडिया पैसा वसूली कर वापस करेंगी। आगे की कार्रवाई भी विजन इंडिया के लोग ही कराएंगे। -मोहम्मद शोएब, शाखा प्रबंधक, रमियाबेहड़।
खातों में हेराफेरी का मामला सिद्ध हो चुका है। रोहित ने जिनका पैसा गायब किया है, हमारी प्राथमिकता है कि पहले वह खाताधारकों को वापस हो। बाद में जो विधिक प्रक्रिया होगी. की जाएगी। -अरविंद कुमार, सुपरवाइजर, विजन इंडिया।