{"_id":"5dadfac78ebc3e017a2126cf","slug":"crimc-lakhimpur-news-bly381168030","type":"story","status":"publish","title_hn":"फूहड़ डांस ने कराया मेले में बवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फूहड़ डांस ने कराया मेले में बवाल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखीमपुर खीरी। रामलीला मेला मंच पर रविवार को देर रात भोजपुरी संगीत कार्यक्रम में डांस के दौरान बवाल हो गया। मेला कोतवाली पुलिस की बदइंतजामी का फायदा उठाते हुए कुछ युवक डांस करते हुए दर्शक दीर्घा में आ गए, उन्हें कुछ लोगों ने रोका तो मारपीट हो गई। उत्पाती युवकों ने दर्जनों कुर्सियां तोड़ डालीं और बैरिकेडिंग की बल्लियां तक उखाड़ डालीं। अफरातफरी के बीच आधे घंटे तक बवाल चलता रहा और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। बाद में कई थानों की फोर्स के साथ सदर थाना प्रभारी पहुंचे तो उत्पाती युवक भाग निकले।
भोजपुरी संगीत के कार्यक्रम में यह स्थिति पौने एक बजे तब बनी, जब महिला डांसर डीजे पर गानों पर फूहड़ तरीके से नाचने लगीं। दर्शक दीर्घा में कुछ अराजक तत्व भी उछल-कूद करने लगे। कुछ लोगों ने युवकों को मना किया, लेकिन वे नहीं माने और उल्टा उनसे भिड़ गए। कहासुनी के बाद दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। मौके पर पहुंची मेला कोतवाली पुलिस चार-पांच लोगों को पकड़कर मेला कोतवाली लाई, जहां कुछ देर रोकने के बाद उन्हें छोड़ दिया। लेकिन हंगामा करने वाले शांत नहीं हुए। उत्पाती युवकों ने दर्शक दीर्घा में पड़ी कुर्सियां तोड़ते हुए उनसे ही लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया, जिससे कई लोगों के चोटें आईं। इससे वहां भगदड़ मच गई। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने मेले में लगी बैरिकेडिंग की बल्लियां उखाड़ दीं। यह बवाल मेला कोतवाली पुलिस के सामने होता रहा, लेकिन पुलिस असहाय होकर खड़ी सब कुछ देखती रही। इधर सूचना पर सदर थाने के प्रभारी निरीक्षक अजय प्रकाश मिश्र, खीरी, फरधान और फूलबेहड़ पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। भारी पुलिस फोर्स देखकर उपद्रवी भाग निकले। पुलिस ने इस मामले में किसी तरफ से कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।
नाकामी छुपाने में जुटी मेला कोतवाली पुलिस
रामलीला मंच पर फूहड़ डांस पर हुए बवाल को लेकर मेला कोेेेतवाली पुलिस बैकफुट पर आ गई है। पुलिस अब अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि उम्मीद से अधिक भीड़ आने पर पंडाल छोटा पड़ गया। डांस के दौरान कुछ गानों पर युवा वर्ग के लोग कुर्सियों पर चढ़ गए, जिससे कुर्सियां टूटीं। पुलिस मारपीट और कुर्सियों को तोड़ने की बात को मान ही नहीं रही है। शायद यही वजह की इतना बड़ा बवाल होने के बाद भी मेला कोतवाली पुलिस हरकत में नहीं आई। पुलिस ने न तो किसी उपद्रवी को गिरफ्तार किया। न ही रिपोर्ट दर्ज की।
विज्ञापन
एक-दूसरे को धक्का देकर भागे दर्शक
जिस वक्त बवाल हुआ। उस समय दर्शक दीर्घा खचाखच भरी हुई थी। हालात यह थे उसमें पैर रखने भर की जगह नहीं थीं। इतनी भीड़ होने के बाद भी मेला कमेटी और पुलिस प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित रखने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया था। इसी का लाभ उठाकर उपद्रवियों ने जब बवाल किया तो लोगों में भगदड़ मच गई। दर्शक दीर्घा में महिलाएं, लड़कियां और बच्चे भी बैठे थे। हालात यह थे कि खौफ में आए सभी दर्शक एक-दूसरे को धक्का देकर भागे।
मंच पर हुए ये गाने, बवाल के बाद बंद हुआ कार्यक्रम
भोजपुरी संगीत सम्मेलन का शुभारंभ सदर विधायक योगेश वर्मा, पालिका अध्यक्ष निरूपमा बाजपेई ने दीप जलाकर किया। गीत संगीत की शुरूआत सुरेश कुशवाहा ने देवी गीत ‘निमिया के डार मैया डालली झुलवा..’ एवं ‘पांव में पायलिया सो है गोरिया चांद के अंजुरिया गोर बाड़ू...’ से की । उन्होंने ‘कश्मीर जिगर के टुकड़ा कहे हिंदुस्तान..’ भी सुनाया। इसके बाद कार्यक्रम रंगारंग की तरफ बढ़ा तो कलाकारों ने ‘कोठे ऊपर कोठरी..’ ‘पियवा से पहिले हमार रहलू..’ के अलावा ‘हाय शरमाऊं, किस किस को बताऊं..’ पर भी नृत्य पेश किया। इन गानों पर नृत्य देखकर देखकर युवा बेकाबू हो गए और उसके बाद अराजकता शुरू हो गई। अफरा-तफरी मची तो भोजपुरी संगीत कार्यक्रम को बंद कर दिया गया।
भीड़ अधिक बढ़ गई थी। इससे पंडाल छोटा पड़ गया। मनपसंद गानों पर कुछ युवा कुर्सियों पर खड़े होकर नाचने लगे, जिससे कुछ कुर्सियां टूट गईं। न मारपीट हुई और न कोई और बवाल हुआ। -भानु प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक, मेला कोतवाली
विज्ञापन
भोजपुरी संगीत के कार्यक्रम में यह स्थिति पौने एक बजे तब बनी, जब महिला डांसर डीजे पर गानों पर फूहड़ तरीके से नाचने लगीं। दर्शक दीर्घा में कुछ अराजक तत्व भी उछल-कूद करने लगे। कुछ लोगों ने युवकों को मना किया, लेकिन वे नहीं माने और उल्टा उनसे भिड़ गए। कहासुनी के बाद दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। मौके पर पहुंची मेला कोतवाली पुलिस चार-पांच लोगों को पकड़कर मेला कोतवाली लाई, जहां कुछ देर रोकने के बाद उन्हें छोड़ दिया। लेकिन हंगामा करने वाले शांत नहीं हुए। उत्पाती युवकों ने दर्शक दीर्घा में पड़ी कुर्सियां तोड़ते हुए उनसे ही लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया, जिससे कई लोगों के चोटें आईं। इससे वहां भगदड़ मच गई। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने मेले में लगी बैरिकेडिंग की बल्लियां उखाड़ दीं। यह बवाल मेला कोतवाली पुलिस के सामने होता रहा, लेकिन पुलिस असहाय होकर खड़ी सब कुछ देखती रही। इधर सूचना पर सदर थाने के प्रभारी निरीक्षक अजय प्रकाश मिश्र, खीरी, फरधान और फूलबेहड़ पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। भारी पुलिस फोर्स देखकर उपद्रवी भाग निकले। पुलिस ने इस मामले में किसी तरफ से कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं की है।
विज्ञापन
नाकामी छुपाने में जुटी मेला कोतवाली पुलिस
रामलीला मंच पर फूहड़ डांस पर हुए बवाल को लेकर मेला कोेेेतवाली पुलिस बैकफुट पर आ गई है। पुलिस अब अपनी नाकामी छुपाने की कोशिश कर रही है। पुलिस का कहना है कि उम्मीद से अधिक भीड़ आने पर पंडाल छोटा पड़ गया। डांस के दौरान कुछ गानों पर युवा वर्ग के लोग कुर्सियों पर चढ़ गए, जिससे कुर्सियां टूटीं। पुलिस मारपीट और कुर्सियों को तोड़ने की बात को मान ही नहीं रही है। शायद यही वजह की इतना बड़ा बवाल होने के बाद भी मेला कोतवाली पुलिस हरकत में नहीं आई। पुलिस ने न तो किसी उपद्रवी को गिरफ्तार किया। न ही रिपोर्ट दर्ज की।
विज्ञापन
एक-दूसरे को धक्का देकर भागे दर्शक
जिस वक्त बवाल हुआ। उस समय दर्शक दीर्घा खचाखच भरी हुई थी। हालात यह थे उसमें पैर रखने भर की जगह नहीं थीं। इतनी भीड़ होने के बाद भी मेला कमेटी और पुलिस प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित रखने का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया था। इसी का लाभ उठाकर उपद्रवियों ने जब बवाल किया तो लोगों में भगदड़ मच गई। दर्शक दीर्घा में महिलाएं, लड़कियां और बच्चे भी बैठे थे। हालात यह थे कि खौफ में आए सभी दर्शक एक-दूसरे को धक्का देकर भागे।
मंच पर हुए ये गाने, बवाल के बाद बंद हुआ कार्यक्रम
भोजपुरी संगीत सम्मेलन का शुभारंभ सदर विधायक योगेश वर्मा, पालिका अध्यक्ष निरूपमा बाजपेई ने दीप जलाकर किया। गीत संगीत की शुरूआत सुरेश कुशवाहा ने देवी गीत ‘निमिया के डार मैया डालली झुलवा..’ एवं ‘पांव में पायलिया सो है गोरिया चांद के अंजुरिया गोर बाड़ू...’ से की । उन्होंने ‘कश्मीर जिगर के टुकड़ा कहे हिंदुस्तान..’ भी सुनाया। इसके बाद कार्यक्रम रंगारंग की तरफ बढ़ा तो कलाकारों ने ‘कोठे ऊपर कोठरी..’ ‘पियवा से पहिले हमार रहलू..’ के अलावा ‘हाय शरमाऊं, किस किस को बताऊं..’ पर भी नृत्य पेश किया। इन गानों पर नृत्य देखकर देखकर युवा बेकाबू हो गए और उसके बाद अराजकता शुरू हो गई। अफरा-तफरी मची तो भोजपुरी संगीत कार्यक्रम को बंद कर दिया गया।
भीड़ अधिक बढ़ गई थी। इससे पंडाल छोटा पड़ गया। मनपसंद गानों पर कुछ युवा कुर्सियों पर खड़े होकर नाचने लगे, जिससे कुछ कुर्सियां टूट गईं। न मारपीट हुई और न कोई और बवाल हुआ। -भानु प्रताप सिंह, प्रभारी निरीक्षक, मेला कोतवाली