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‘आरोपियों को सुनाई जाए मौत की सजा’
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निघासन (लखीमपुर खीरी)। थाना परिसर में हुए 10 वर्षीय सोनम हत्याकांड के मामले में तत्कालीन सीओ और उसके गनर को कोर्ट के दोषी करार दिए जाने की खबर जब सोनम की मां तरन्नुम को मिली तो उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने कहा, नौ साल के लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है, कोर्ट अब दोषियों को मौत की सजा सुनाए।
क्या था मामला
वर्ष 2011 में सीओ इनायत उल्ला निघासन सीओ था। उसका सिपाही अतीक गनर (कांस्टेबल) था, जो थाने में बने सरकारी आवास में रहता था। थाने के पीछे रहने वाले इंतजाम अली के परिवार का थाने में आना जाना था। थाने के पीछे की ओर बाउंड्रीवाल नहीं थी। इससे मोहल्ले के लोग मवेशी आदि चराने के लिए आते थे। इंतजाम अली की 10 वर्षीय पुत्री सोनम भी भैंस चराने के लिए आई थी। आरोप था कि सिपाही अतीक ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और दुपट्टे को उसके गले में डालकर शव थाने में लगे पेड़ से लटका दिया। शव मिलने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। नतीजतन तत्कालीन एसपी, एसओ सहित 11 पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए थे। इस मामले में सीओ पर आला अफसरों को गुमराह करने और सबूत मिटाने का आरोप था।
मासूम अरमान की भी हुई थी गवाही
सोनम की हत्या के बाद जब शव को पेड़ से हत्या आरोपी लटका रहा था, उस समय उसका पांच साल का मासूम भाई अरमान भी थाना परिसर में पहुंच गया। उस वक्त इमरान ने शव लटकाते देखे जाने की बात कही थी। सीबीआई ने इमरान की भी गवाही ली थी और उसके बयान दर्ज किए थे।
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चार साल पहले सिंगाही थाने में तैनात था दोषी अतीक
सोनम हत्याकांड में निलंबन के बाद आरोपी अतीक फिर बहाल हो गया था। उसे पड़ोसी थाने सिंगाही में चार साल पहले तैनात किया गया था। बताते हैं कि आरोपी ने सोनम की मां से सुलह करने का दबाव भी बनाया था। बाद में एक शिकायत पर उसे लाइन हाजिर कर दिया गया था।
क्या कहते हैं विधि ज्ञाता
वकील सर्वेश गुप्ता का कहना है कि घटना की जितनी निंदा की जाए कम हैं। सीबीआई की जांच निष्पक्ष है। सीबीआई ने इस घटना को परत दर परत खोला है। घटना के समय में सीओ ने अपने उच्चाधिकारियों को भी गुमराह किया था। एसपी, थानाध्यक्ष के साथ अन्य पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी, लेकिन सीओ बच निकले थे। सीओ और उनके गनर (कांस्टेबल) पर कार्रवाई करके सीबीआई ने अपना विश्वास कायम रखा है।
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क्या था मामला
वर्ष 2011 में सीओ इनायत उल्ला निघासन सीओ था। उसका सिपाही अतीक गनर (कांस्टेबल) था, जो थाने में बने सरकारी आवास में रहता था। थाने के पीछे रहने वाले इंतजाम अली के परिवार का थाने में आना जाना था। थाने के पीछे की ओर बाउंड्रीवाल नहीं थी। इससे मोहल्ले के लोग मवेशी आदि चराने के लिए आते थे। इंतजाम अली की 10 वर्षीय पुत्री सोनम भी भैंस चराने के लिए आई थी। आरोप था कि सिपाही अतीक ने गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और दुपट्टे को उसके गले में डालकर शव थाने में लगे पेड़ से लटका दिया। शव मिलने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। नतीजतन तत्कालीन एसपी, एसओ सहित 11 पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए थे। इस मामले में सीओ पर आला अफसरों को गुमराह करने और सबूत मिटाने का आरोप था।
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मासूम अरमान की भी हुई थी गवाही
सोनम की हत्या के बाद जब शव को पेड़ से हत्या आरोपी लटका रहा था, उस समय उसका पांच साल का मासूम भाई अरमान भी थाना परिसर में पहुंच गया। उस वक्त इमरान ने शव लटकाते देखे जाने की बात कही थी। सीबीआई ने इमरान की भी गवाही ली थी और उसके बयान दर्ज किए थे।
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चार साल पहले सिंगाही थाने में तैनात था दोषी अतीक
सोनम हत्याकांड में निलंबन के बाद आरोपी अतीक फिर बहाल हो गया था। उसे पड़ोसी थाने सिंगाही में चार साल पहले तैनात किया गया था। बताते हैं कि आरोपी ने सोनम की मां से सुलह करने का दबाव भी बनाया था। बाद में एक शिकायत पर उसे लाइन हाजिर कर दिया गया था।
क्या कहते हैं विधि ज्ञाता
वकील सर्वेश गुप्ता का कहना है कि घटना की जितनी निंदा की जाए कम हैं। सीबीआई की जांच निष्पक्ष है। सीबीआई ने इस घटना को परत दर परत खोला है। घटना के समय में सीओ ने अपने उच्चाधिकारियों को भी गुमराह किया था। एसपी, थानाध्यक्ष के साथ अन्य पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हुई थी, लेकिन सीओ बच निकले थे। सीओ और उनके गनर (कांस्टेबल) पर कार्रवाई करके सीबीआई ने अपना विश्वास कायम रखा है।